जगन्ना विद्या दीवेना योजना


19 अप्रैल, 2021 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए ‘जगन्ना विद्या दीवेना योजना’ (Jagananna Vidya Deevena scheme) के तहत 10.88 लाख छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के लिए 672 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी की।

  • अब तक कुल 4, 879 करोड़ रुपये जगन्ना विद्या दीवेना योजना के तहत वितरित किए जा चुके हैं।
  • उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों पर केंद्रित जगन्नाथ विद्या दीवेना योजना का मुख्य उद्देश्य उन सभी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करना है, जो वित्तीय बोझ के कारण अपनी फीस का भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं।
  • 2020-21 के लिए फीस प्रतिपूर्ति की दूसरी किस्त जुलाई में, तीसरी किस्त दिसंबर में और अंतिम किस्त अगले साल फरवरी में जारी की जाएगी।
  • 2021 में योजना से लाभान्वित होने वाले छात्रों की संख्या 2020 की तुलना में 77,000 बढ़ी है। 2021 में यह संख्या बढ़कर 10. 88 लाख हो गई है।

‘जगन्ना विद्या कनुका’ योजना


8 अक्टूबर, 2020 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए ‘जगन्ना विद्या कनुका’ योजना शुरू की।

उद्देश्य: सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और नामांकन में सुधार करना।

  • योजना के तहत, कक्षा 1 से 10वीं तक के सरकारी स्कूल के छात्रों को 42,34,222 किट वितरित किए जाएंगे। 650 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर ये किट राज्य भर में वितरित किए जाएंगे।
  • किट में तीन जोड़ी स्कूल यूनिफॉर्म, एक जोड़ी जूते, दो जोड़ी मोजे, निर्धारित पाठ्यपुस्तक, नोटबुक, एक बेल्ट और एक स्कूल बैग शामिल होगा।
  • किट वितरित करने के अलावा, सरकार ने शैक्षणिक वर्ष शुरू होने से पहले सभी स्कूलों में दस आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए ‘नाडु-नेडू पहल’ भी शुरू की।

आंध्र प्रदेश में ‘ऋतु भरोसा केंद्रलु’ का शुभारंभ


30 सितंबर, 2020 को केंद्रीय रसायन और उवर्रक मंत्री डी.वी. सदानंद गौड़ा ने आंध्र प्रदेश में किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता आसान बनाने हेतु प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) सॉफ्टवेयर के नए संस्करण 3.1, एसएमएस सेवा और घर पर उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु ‘ऋतु भरोसा केंद्रलु’ (आरबीके) का शुभारंभ किया।

  • ऋतु भरोसा केंद्रलु (आरबीके) पहल आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई है। इस पहल के तहत राज्य सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों में 10,641 केंद्र शुरू किए हैं।
  • इस प्रणाली के तहत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद किसान अपने गांव में ऐसे किसी भी केंद्र पर उर्वरकों की खरीद का ऑर्डर दे सकते हैं। इस ऑर्डर के आधार पर उर्वरक उनके घर तक पहुंचाया जाएगा।
  • पीओएस 3.1 संस्करण के तहत संपर्क रहित ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण का विकल्प पेश किया गया है।
  • उर्वरक विभाग की ओर से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली की शुरुआत देशभर में 1 मार्च, 2018 को गई थी।

वाईएसआर सम्पूर्ण पोषण योजना


7 सितंबर, 2020 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने ‘वाईएसआर सम्पूर्ण पोषण योजना’ और ‘वाईएसआर सम्पूर्ण पोषण प्लस योजना’ लांच की।

उद्देश्य: स्तनपान कराने वाली माताओं और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन प्रदान करना।

  • इन योजनाओं के माध्यम से लगभग 30.16 लाख बच्चों और माताओं को लाभान्वित किया जायेगा।
  • इसके तहत मुख्य रूप से गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं में कुपोषण और एनीमिया पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। यह योजना आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पूरक पोषण प्रदान करेगी।
  • ‘वाईएसआर सम्पूर्ण पोषण प्लस योजना’ विशेष रूप से 77 जनजातीय क्षेत्रों को कवर करेगी। शेष शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को ‘वाईएसआर सम्पूर्ण पोषण योजना’ के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।
  • योजना के लिए राज्य सरकार को प्रति वर्ष 1,863 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे, जिसमें प्रति माह 1,100 रुपये प्रति लाभार्थी खर्च शामिल है।
  • आंध्र प्रदेश में लगभग 52.9% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। इसके अलावा, राज्य में 31.9% बच्चे जन्म के समय कम वजन वाले हैं।

वाईएसआर चेयुथा योजना


आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने 12 अगस्त, 2020 को महिलाओं के लिए वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने हेतु ‘वाईएसआर चेयुथा’ (YSR Cheyutha) योजना का शुभारंभ किया।

  • योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदाय की 45-60 वर्ष की लगभग 23 लाख महिलाएं लाभान्वित होंगी।

  • योजना के तहत महिलाओं को प्रतिवर्ष 18,750 रुपये के हिसाब से 4 वर्ष में 75000 रुपये की नगद आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

नए जिलों के गठन के अध्ययन हेतु उच्च-स्तरीय समिति


आंध्र प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई, 2020 को राज्य में नए जिलों के गठन के तौर-तरीकों का अध्ययन करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करने का निर्णय लिया।

  • समिति नए जिलों के गठन और कम व्यय से संबंधित विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी।

  • ज्ञात हो कि सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस ने पिछले साल चुनावों की पूर्व संध्या पर, मौजूदा 13 जिलों को विभाजित करके प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र को एक जिला बनाने का वादा किया था। योजना के अनुसार, पुनर्गठन होने के बाद राज्य में 25 जिले होंगे।

  • समिति अध्ययन की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद 31 मार्च, 2021 तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।