'मुख्यमंत्री बागायत विकास मिशन'


गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने 19 जनवरी, 2021 को बागवानी विकास मिशन 'मुख्यमंत्री बागायत विकास मिशन' (Mukhyamantri Bagayat Vikas Mission) की घोषणा की।

उद्देश्य: औषधीय और बागवानी खेती में शामिल किसानों की आय को दोगुना करना।

  • इस मिशन के तहत, सरकार की बंजर भूमि को बागवानी और औषधीय फसलों की खेती के लिए 30 साल के पट्टे (Lease) पर दिया जाएगा।
  • सरकार ने पहले चरण में कच्छ, सुरेंद्रनगर, पाटन, साबरकांठा और बनासकांठा जिलों को शामिल किया है। इस मिशन के तहत, भूमि रूपांतरण पर कर माफ कर दिया जाएगा।
  • आवंटन के लिए उपलब्ध बेकार भूमि की एक सूची i-Khedut पोर्टल पर जारी की जाएगी।
  • यह मिशन स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई का उपयोग करके किसानों को प्राथमिकता देगा। इस मिशन ने लीज राशि 100 रुपये से 500 रुपये प्रति वर्ष प्रति एकड़ तय की है।

गुजरात सरकार का 'ड्रैगन फ्रूट' का नाम बदलकर 'कमलम' रखने का फैसला


जनवरी 2021 में गुजरात सरकार ने 'ड्रैगन फ्रूट' (dragon fruit) का नाम बदलकर 'कमलम' रखने का फैसला किया है।

  • 'कमलम' शब्द एक संस्कृत शब्द है। मुख्यमंत्री विजय रूपानी के अनुसार, फल का बाहरी आकार कमल के फूल से मिलता जुलता है। 'कमलम' के पेटेंट के लिए भी आवेदन किया गया है।
  • ड्रैगन फ्रूट दक्षिण और मध्य अमेरिका में पाए जाने वाले देसी जंगली कैक्टस (wild cactus) की एक प्रजाति का फल है, जहाँ इसे पिटाया (Pitaya) या पिटाहाया (Pitahaya) कहा जाता है।
  • फल बाहर से आमतौर पर सफेद या लाल रंग का होता है, हालाँकि इसमें पीला पिटाया (Pitaya) भी होता है, लेकिन यह कम मिलता है। यह किवी फ्रूट की तरह छोटे बीज वाला होता है।
  • ड्रैगन फ्रूट का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक वियतनाम है, जहां 19वीं शताब्दी में फ्रांसीसी द्वारा इसके संयंत्र को लाया गया था। वियतनामी इसे लंबे समय से ‘थान्ह लोंग’ (Thanh long) कहते रहे हैं, जिसका अर्थ 'ड्रैगन आई' (dragon’s eyes) होता है।
  • ड्रैगन फ्रूट की खेती लैटिन अमेरिका के अलावा थाईलैंड, ताइवान, चीन, ऑस्ट्रेलिया, इजरायल और श्रीलंका में भी की जाती है।
  • यह 1990 के दशक में भारत में लाया गया था, और कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में उगाया जाता है।

प्रधानमंत्री द्वारा गुजरात में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 दिसंबर, 2020 को गुजरात के कच्छ में राज्य की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं में एक विलवणीकरण संयंत्र, एक हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा पार्क और एक पूर्ण रूप से स्वचालित दूध प्रसंस्करण और पैकिंग संयंत्र शामिल हैं।

विलवणीकरण संयंत्र: कच्छ के मांडवी में प्रस्तावित विलवणीकरण संयंत्र से समुद्री जल को पीने के पानी में बदला जाएगा।

  • यह संयत्र 10 करोड़ लीटर प्रति दिन की क्षमता (100 एमएलडी) के साथ नर्मदा ग्रिड, सौनी नेटवर्क और अपशिष्ट जल शोधन बुनियादी ढांचे के पूरक के रूप में गुजरात में जल सुरक्षा की स्थिति को मजबूत बनाएगा।

हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा पार्क: गुजरात के कच्छ जिले के विगहाकोट गांव के पास हाइब्रिड अक्षय ऊर्जा पार्क देश का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन पार्क होगा। यहां 30 गीगावॉट तक नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन होगा।

  • 72,600 हेक्टेयर से भी ज्यादा विशाल क्षेत्र में फैले इस पार्क में पवन और सौर ऊर्जा संचय के लिए एक समर्पित हाइब्रिड पार्क क्षेत्र होगा।

पूर्ण रूप से स्वचालित एक दूध प्रसंस्करण संयंत्र: कच्छ के अंजार में सरहद डेयरी के पूर्ण रूप से स्वचालित एक दूध प्रसंस्करण और पैकिंग संयंत्र का शिलान्यास भी किया।

  • 121 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के इस संयंत्र की प्रति दिन 2 लाख लीटर दूध को संसाधित करने की क्षमता होगी।

साबरमती सेंट्रल जेल में 'रेडियो प्रिजन' का शुभारंभ


  • अहमदाबाद में साबरमती सेंट्रल जेल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 151वीं जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर, 2020 को कैदियों के लिए समर्पित रेडियो स्टेशन 'रेडियो प्रिजन' (Radio Prison) का शुभारंभ किया।
  • रेडियो प्रिजन जेल परिसर के भीतर कैदियों को मनोवैज्ञानिक सहायता, कानूनी परामर्श और स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी जानकारी प्रदान करेगा।
  • इसमें किसी भी अन्य रेडियो स्टेशन की तरह एक स्टूडियो बनाया गया है, जिसमें रेडियो जॉकी की भूमिका सहित समस्त संचालन कैदियों द्वारा किया जाएगा। जेल अधिकारी अतिथि कलाकारों को भी प्रदर्शन के लिए आमंत्रित करेंगे।
  • यह सेवा महिलाओं की जेल और फिर भविष्य में नए जेल परिसर में विस्तारित की जाएगी। साबरमती जेल प्रशासन ने इस परियोजना पर 20 लाख रुपये खर्च किए हैं।

डिजिटल सेवा सेतु कार्यक्रम


  • गुजरात सरकार ने 6 अक्टूबर, 2020 को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए डिजिटल सेवा सेतु कार्यक्रम की घोषणा की।
  • फाइबर नेटवर्क के माध्यम से ग्राम पंचायतों को जोड़ने की पहल 'भारत नेट परियोजना के तहत डिजिटल सेवा सेतु की शुरुआत की गई है।
  • गुजरात के गांवों को डिजिटल सेवा सेतु कार्यक्रम के तहत 100 एमबीपीएस ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
  • इस कार्यक्रम के तहत, नागरिक ग्राम पंचायत स्तर पर 20 प्रकार की लोक कल्याणकारी सेवाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए नागरिकों को 20 रुपये के मामूली शुल्क का भुगतान करना होगा।
  • नागरिक इस कार्यक्रम के तहत विभिन्न दस्तावेजों जैसे राशन कार्ड की प्रतिलिपि, आय प्रमाण पत्र, वरिष्ठ नागरिक प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र अपने घर पर प्राप्त कर सकते हैं।
  • कार्यक्रम का पहला चरण 8 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें 2,000 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। दिसंबर 2020 तक अन्य 8000 ग्राम पंचायतों को कवर किया जाएगा।

ई-स्कूटर और ई-रिक्शा के लिए सब्सिडी योजनाएं


गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने 17 सितंबर, 2020 को राज्य में बैटरी चालित दोपहिया और तिपहिया वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए एक सहायता योजना की घोषणा की।

  • राज्य सरकार 9वीं कक्षा से कॉलेज तक पढ़ने वाले स्कूली छात्रों को बैटरी चालित दोपहिया वाहनों के लिए 12,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी। ऐसे 10,000 वाहनों के लिए सब्सिडी देने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • इसी प्रकार, व्यक्तिगत और संस्थागत लाभार्थियों के लिए तिपहिया ई-रिक्शा के लिए 48,000 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी 5,000 ई-रिक्शा के लिए दी जाएगी।
  • ई-वाहनों की चार्जिंग सुविधा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए 50 लाख रुपये की योजना की भी घोषणा की गई।

गुजरात की पहली ‘धरोहर पर्यटन नीति 2020-25’


गुजरात सरकार ने 11 सितंबर, 2020 को राज्य की पहली ‘धरोहर पर्यटन नीति 2020-25’

की घोषणा की।

  • नीति में 1 जनवरी, 1950 से पहले के ऐतिहासिक महलों, किलों और इमारतों के अंदर धरोहर होटल, संग्रहालय, बैंक्वेट हॉल और रेस्तरां खोलने की अनुमति दी गई है।
  • इससे राज्य में ऐतिहासिक इमारतों को पर्यटकों के आकर्षण के केन्द्र के रूप में विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है।
  • राज्य सरकार मौजूदा और नये धरोहर होटलों के रख-रखाव तथा विस्तार के लिए 5-10 करोड़ रूपये तक की सहायता राशि उपलब्ध कराएगी।
  • डेवलपर्स को नई इकाई स्थापित करने या किसी मौजूदा धरोहर संग्रहालय, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल की मरम्मत के लिए 45 लाख से 1 करोड़ रूपये तक की सहायता राशि दी जाएगी।
  • यदि निवेश 25 करोड़ रुपये तक है तो सरकार 20% सब्सिडी (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) देगी। यदि निवेश 25 करोड़ रुपये से अधिक है, तो अधिकतम सब्सिडी 10 करोड़ रुपये होगी।

गुजरात के पांच शहरों में 70 मंजिला या इससे भी अधिक ऊंची इमारत बनाने की मंजूरी


अगस्त 2020 में राज्य सरकार ने गुजरात के पांच शहरों- अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, राजकोट और गांधीनगर में 70 मंजिला या इससे भी अधिक ऊंची इमारतें बनाने की मंजूरी प्रदान की।

  • राज्‍य सरकार ने इस तरह की इमारतों के निर्माण के लिए 2017 के मौजूदा नियमों में संशोधन का फैसला लिया है।
  • नये नियमों के अनुसार पांच बड़े शहरों में 100 से 150 मीटर तक की ऊंचाई वाली इमारतों के लिए भूखंड का आकार 2,500 वर्ग मीटर से अधिक होना जरूरी होगा।
  • 150 मीटर से अधिक ऊंचाई की इमारत बनाने के लिए 3,500 वर्ग मीटर से अधिक भूखंड की आवश्‍यकता होगी।
  • फिलहाल राज्‍य में 22-23 मंजिलों से अधिक ऊंची इमारतें बनाने पर पाबंदी है।

गुजरात की ‘मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना’


गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने 10 अगस्त, 2020 को राज्य के किसानों के लिए ‘मुख्यमंत्री किसान सहाय योजना’ शुरू करने की घोषणा की।

  • इस योजना के तहत सूखे, अत्यधिक बारिश या बेमौसम बारिश के कारण फसल को होने वाले नुकसान के लिए किसानों को बिना कोई प्रीमियम दिए मुआवजा प्रदान किया जाएगा। यह योजना 1 वर्ष के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के स्थान पर लागू की जाएगी।
  • मुआवजा तभी प्रदान किया जाएगा, जब सूखा या अधिक बारिश या बेमौसम बारिश के कारण फसल का नुकसान 33% से अधिक होगा। किसान अधिकतम 4 हेक्टेयर भूमि पर मुआवजा पाने हेतु पात्र होंगे।
  • 33 से 60% तक प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुए नुकसान पर एक किसान को 20000 रुपये प्रति हेक्टेयर और 60% से अधिक की फसल के नुकसान पर 25000 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

गुजरात औद्योगिक नीति 2020


मुख्‍यमंत्री विजय रूपाणी ने 7 अगस्त, 2020 को गांधीनगर में गुजरात औद्योगिक नीति 2020 की घोषणा की।

  • औद्योगिक नीति में बुनियादी और नये उभरते क्षेत्रों को ऐसे पन्‍द्रह भागों में विभाजित किया गया है जिन पर विशेष जोर दिया जाएगा।
  • बुनियादी क्षेत्र के अंतर्गत जिनपर जोर दिया जाएगा, उनमें विद्युत मशीनरी और उपकरण, औद्योगिक मशीनरी और उपकरण, मोटरवाहन और मोटरवाहन वाहनों के पुर्जे, चीनी मिट्टी, तकनीकी वस्‍त्र, कृषि और खाद्य प्रसंस्‍करण, औषधि और चिकित्‍सा उपकरण, रत्‍न और आभूषण तथा रसायन शामिल हैं।
  • दूसरी ओर नये उभरते क्षेत्रों में जिन पर जोर दिया जाएगा उनमें अत्‍याधुनिक विनिर्माण, अपशिष्‍ट प्रबंधन परियोजनाएं, इलेक्ट्रिक वाहन और उनके पुर्जे, सौर और पवन ऊर्जा समेत प्रदूषण मुक्‍त ऊर्जा उपकरण तथा पारम्‍परिक प्‍लास्टिक के स्‍थान पर सड़ कर नष्‍ट होने वाले पर्यावरण अनुकूल पदार्थ का उत्‍पादन शामिल है।
  • 8,000 करोड़ रुपए तक औसत वार्षिक परिव्यय वाली इस औद्योगिक नीति के तहत सभी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत निर्यात करने वाली इकाइयों की स्‍थापना पर जोर दिया जाएगा।
  • नई नीति राज्य में वित्तीय सेवा, स्वास्थ्य सेवा, ऑडियो विजुअल सेवाओं, निर्माण इंजीनियरिंग तथा पर्यावरण सेवाओं आदि में संलग्न सेवा क्षेत्र के एमएसएमई को 7 वर्ष तक की अवधि के लिए सालाना 35 लाख रुपए तक 7% ब्याज अनुदान की पेशकश करेगी।
  • राज्‍य की नई औद्योगिक नीति केन्‍द्र सरकार के आत्‍मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है। नई नीति, 31 दिसंबर 2019 को समाप्‍त हुई पुरानी नीति के स्‍थान पर लाई गई है।