चुनावी बॉन्ड के जरिेये चंदा देने वालों का नाम घोषित करने वाली पहली पार्टी बनी झारखंड मुक्ति मोर्चा


अप्रैल 2021 में एसोसिएशन आफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ऐसी पहली पार्टी बन गई है, जिसने चुनावी बॉन्ड के माध्यम से चंदा देने वालों के नामों की घोषणा की है।

  • वर्ष 2019-20 में पार्टी को योगदान संबंधी रिपोर्ट में एक करोड़ रूपये के चंदे की घोषणा की गई है । झारखंड में सत्तारूढ़ पार्टी को मिले योगदान संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, उसे एल्यूमिनियम एवं तांबा विनिर्माता कंपनी ‘हिंडाल्को’ ने यह चंदा दिया।
  • हालांकि पार्टी ने वित्त वर्ष 2019-20 की ऑडिट रिर्पोट में चुनावी बॉन्ड के जरिये इस आय की घोषणा नहीं की।
  • ज्ञात हो कि चुनावी बॉन्ड को राजनीतिक दलों को नकद में चंदा देने के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है और इसे राजनीतिक वित्त पोषण में पारदर्शिता लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।
  • 2017 के केंद्रीय बजट में घोषित, चुनावी बॉन्ड व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों द्वारा राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • चुनावी बॉन्ड 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के गुणकों में बेचे जाते हैं और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) उन्हें बेचने के लिए अधिकृत एकमात्र बैंक है।

सामर अभियान


17 मार्च, 2021 को झारखंड सरकार ने राज्य में कुपोषण से निपटने के लिए ‘सामर अभियान’ (Strategic Action for Alleviation of Malnutrition and Anemia Reduction- SAAMAR) शुरू करने की घोषणा की।

उद्देश्य: रक्ताल्पता से ग्रस्त महिलाओं और कुपोषित बच्चों की पहचान करना और राज्य में कुपोषण की बड़ी समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को परस्पर संबद्ध करना।

  • SAAMAR अभियान को 1000 दिनों के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया है, और इसकी प्रगति को ट्रैक करने के लिए वार्षिक सर्वेक्षण किया जाएगा।
  • प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा गंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों की पहचान की जाएगी और उनका कुपोषण उपचार केंद्रों में इलाज किया जाएगा।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर दूसरा बच्चा नाटे कद का और कम वजन का है और और हर 10वां बच्चा गंभीर वेस्टिंग (लम्बाई के अनुपात में कम वजन) से प्रभावित है और लगभग 70% बच्चे खून की कमी से प्रभावित है।

निजी क्षेत्र उद्योग में स्थानीय लोगों के लिए 75% कोटा


मार्च 2021 में झारखंड सरकार ने स्थानीय लोगों के लिए प्रति माह 30,000 रुपये तक के वेतन वाली निजी क्षेत्र की 75% नौकरियों को आरक्षित करने के लिए रोजगार नीति को मंजूरी दी है।

  • इस प्रस्तावित विधेयक में, दुकानों, प्रतिष्ठानों, खदानों, उद्यमों, उद्योगों, कंपनियों, सोसाइटीज, ट्रस्टों, सीमित देयता भागीदारी फर्मों, तथा दस या अधिक व्यक्तियों को नियोजित करने वाले व्यक्ति को निजी क्षेत्र अथवा इकाई माना गया है।
  • इस विधेयक के पारित होने तथा अधिनियम के रूप में लागू होने के तीन महीने के भीतर सभी नियोक्ताओं को, 30,000 रुपये से कम कुल मासिक वेतन या मजदूरी- अथवा सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित निर्देशों के अनुसार वेतन पाने वाले कर्मचारियों को एक निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकृत करना होगा।
  • निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी किये बगैर किसी भी व्यक्ति को काम पर नहीं लिया जाएगा।
  • प्राधिकृत अधिकारी (AO) द्वारा पारित किसी आदेश के खिलाफ असंतुष्ट नियोक्ता द्वारा 60 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी, निदेशक, रोजगार और प्रशिक्षण, झारखंड सरकार के समक्ष अपील की जा सकती है।

किसान फसल राहत योजना


29 दिसंबर‚ 2020 को झारखंड में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के स्थान पर ‘किसान फसल राहत योजना’ (Kisan Fasal Rahat Yojana) शुरू की गई।

  • यह एक क्षतिपूर्ति योजना है‚ जिसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल क्षति के मामले में राज्य के किसानों को सुरक्षा कवर प्रदान करना है।
  • इस योजना के अंतर्गत भूमि मालिक और भूमिहीन किसान दोनों शामिल हैं। यह कोई बीमा योजना नहीं है, जहां प्रीमियम का भुगतान किया जाता है।
  • फसल क्षति का आकलन ‘ग्राउंड ट्रूथिंग’ प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा‚ जो नमूना अवलोकन का एक मिश्रित स्वरूप होगा।
  • योजना के तहत बाढ़‚ तूफान‚ बवंडर‚ ज्वालामुखी विस्फोट‚ भूकंप‚ सुनामी और अन्य भूवैज्ञानिक प्रक्रियाएं जो प्राकृतिक आपदाओं की श्रेणी में शामिल हैं‚ कवर की जाएंगी।
  • जंगली जानवरों के हमले के कारण नुकसान‚ किसानों द्वारा अवैज्ञानिक कृषि जोखिम को योजना के तहत नहीं शामिल किया जाएगा।
  • क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने हेतु पेआउट मैट्रिक्स विकसित किया गया है‚ नुकसान के आधार पर 0.1- 5 एकड़ भूमि हेतु 3000 रुपये से लेकर 3500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे के रूप में प्रदान किया जाएगा।

'सरना संहिता ’के प्रावधान के लिए प्रस्ताव पारित


झारखंड विधान सभा ने 11 नवंबर, 2020 को आदिवासियों के लिए एक अलग 'सरना संहिता’ के प्रावधान के लिए एक प्रस्ताव पारित किया।

  • प्रस्ताव के माध्यम से 2021 की जनगणना में 'सरना’ धर्म के अनुयायियों के लिए एक विशेष कॉलम की मांग की गई है।
  • 'सरना’ के अनुयायी ऐसे प्रकृति पूजक हैं, जो खुद को हिंदू नहीं मानते हैं और दशकों से एक अलग धार्मिक पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • वर्तमान में, उन्हें एक अलग धार्मिक इकाई के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। अब तक, जनगणना सर्वेक्षणों में उन्हें धर्म में 'अन्य' (Others) के रूप में शामिल किया जाता रहा है।