ओडिशा रोपेक्स जेटी परियोजना


पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सागरमाला पहल के तहत ओडिशा के भद्रक जिले के कनिनली और केंद्रपाड़ा जिले के तलचुआ को जोड़ने के लिये हर मौसम में काम करने वाले रोपेक्स (रोल-ऑन/रोल-ऑफ पैसेंजर) जेटी और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए 50.30 करोड़ रुपये की मंजूरी को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।

  • ओडिशा सरकार परियोजना की लागत का बाकी 50% हिस्सा वहन करेगी।
  • परियोजना की कुल पूंजी लागत 110.60 करोड़ रुपये है, जिसमें कनिनली और तलचुआ में रोपेक्स जेट्टी का निर्माण, पार्किंग क्षेत्र का विकास, नौवहन संबंधी सहायता और तलकर्षण (dredging) जैसे उपयोगी बुनियादी ढांचे शामिल हैं।
  • यह परियोजना, सड़क मार्ग के छ: घंटे के सफर को जलमार्ग से कम कर एक घंटा कर देगी। भद्रक जिले में कनिनली और केंद्रपाड़ा जिले में तलचुआ, क्रमशः धामरा नदी के उत्तरी और दक्षिणी तट पर स्थित हैं।

ओडिशा सरकार द्वारा जिला निवेश संवर्धन एजेंसियां स्थापित करने का निर्णय


राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और उसे सुविधाजनक बनाने में मदद करने हेतु राज्य सरकार ने मार्च 2021 में राज्य के 30 जिलों में समर्पित ‘जिला निवेश संवर्धन एजेंसियां’ (District Investment Promotion Agencies – DIPA) स्थापित करने का निर्णय लिया है।

  • जिला निवेश प्रोत्साहन एजेंसियां संबंधित जिला कलेक्टर और अन्य घटक सदस्यों जैसे कि एसपी, डीएफओ के नेतृत्व में काम करेगी। इसकी स्थापना जिला कलेक्ट्रेट में की जाएगी।
  • जिला कलेक्टर को निवेश सुविधा प्रदान करने, परियोजना निगरानी और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पेशेवरों की टीम द्वारा सहयोग किया जाएगा।
  • DIPA, ओडिशा औद्योगिक संवर्धन व निवेश निगम लिमिटेड (IPICOL) की विस्तारित शाखा के रूप में काम करेगा। यह अप्रैल 2021 से दिसंबर 2021 तक चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा।

DIPA की मुख्य भूमिका: परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान उद्यमियों को सुविधा प्रदान करना और उन्हें संभालना;

  • बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए उद्यमों को बढ़ावा देना, संबंधित जिलों की स्थानीय शक्तियों को बढ़ावा देने वाले निवेश को बढ़ावा देना;
  • निवेशक शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करना तथा तेजी से परियोजना के कार्यान्वयन के लिए भूमि बैंक का निर्माण करना;
  • प्रत्येक जिले में बड़ी और एमएसएमई परियोजनाएँ स्थापित करना।

ओडिशा करेगा पिछड़े वर्गों का पहला सर्वेक्षण


  • ओडिशा सरकार 1 मई से 20 मई, 2021 तक पिछड़े वर्ग के लोगों के ‘सामाजिक और शैक्षिक स्थिति’ का पहला राज्य सर्वेक्षण शुरू करेगी।
  • राज्य में, लगभग 209 समुदायों की सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBC) के रूप में पहचान की गई है, जिनकी आबादी ओडिशा की कुल आबादी का 54% है।
  • यह सर्वेक्षण राज्य के पिछड़े वर्गों के लोगों की सामाजिक और शैक्षिक स्थितियों के संबंध में किया जाएगा। इसमें उनके व्यवसाय और शिक्षा के स्तर आदि जैसे विवरणों को कवर किया जाएगा।

ऑपरेशन ऑलिव


भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard- ICG) ने ओडिशा में ‘ऑलिव रिडले कछुओं’ (Olive Ridley turtles) की सुरक्षा के लिए ‘ऑपरेशन ऑलिव’ शुरू किया है।

  • इसके तहत दो जहाजों को रशिकुल्या समुद्र तट और देवी नदी के मुहाने के गहिरमाथा समुद्री अभयारण्य में तैनात किया गया है। ये जहाज कछुओं के प्रमुख घोंसले वाले स्थानों (nesting sites) की देखभाल करेंगे।
  • तट रक्षक बल मछली पकड़ने वाले जहाजों को निषिद्ध क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकेंगे। इन जहाजों के अलावा एक विमान भी इस ऑपरेशन का हिस्सा होगा।
  • ऑपरेशन ऑलिव को वर्ष 1999 में केंद्र सरकार द्वारा समुद्री प्रजातियों की सुरक्षा के लिए लॉन्च किया गया था।
  • पारादीप स्थित भारतीय तटरक्षक बल का मुख्यालय हर साल ओडिशा तट से इस अभियान की शुरुआत करता है। देश के तटीय क्षेत्रों में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भारतीय तटरक्षक बल नोडल एजेंसी है।
  • ऑलिव रिडले कछुए का वैज्ञानिक नाम 'लेपिडोचिल्स ऑलिवैसिया' (Lepidochelys olivacea) है, इसे दुनिया का सबसे बहुल समुद्री कछुआ माना जाता है।
  • यह आमतौर पर प्रशांत महासागर, हिन्द महासागरों और अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों में पाया जाता है। IUCN द्वारा इसे ‘अतिसंवेदंशील प्रजाति’ (Vulnerable Species) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

ओडिशा आवश्यक सेवाएं (रखरखाव) संशोधन विधेयक 2020


राज्य विधान सभा द्वारा 23 नवंबर, 2020 को 'ओडिशा आवश्यक सेवाएं (रखरखाव) संशोधन विधेयक 2020' पारित किया गया।

  • इस विधेयक में राज्य में आवश्यक सेवाओं के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल को प्रतिबंधित करने के लिए 1988 के मौजूदा अधिनियम में संशोधन किया गया है।
  • आवश्यक सेवाओं के दायरे का विस्तार करते हुए, विधेयक में अग्निशमन सेवा, आबकारी, वन, जेल सुधार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना और संचार विभाग जैसी सेवाएं शामिल हैं।
  • अवैध हड़ताल का समर्थन करने वाले या हड़ताल के लिए उकसाने वाले या उसकी फंडिंग करने वालों को एक वर्ष तक के कारावास या पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है।

‘गरिमा’ योजना


11 सितंबर, 2020 को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों के लिए ‘गरिमा’ (GARIMA) नामक एक नई योजना का शुभारंभ किया।

उद्देश्य: स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा व गरिमा को सुनिश्चित करना।

  • योजना के तहत 1 लाख आबादी को कवर करने वाले लगभग 20,000 मुख्य (कोर) स्वच्छता कर्मी और उनके परिवार लाभान्वित होंगे।
  • योजना राज्य आवास और शहरी विकास विभाग द्वारा ओडिशा के सभी 114 शहरी स्थानीय निकायों में लागू की जाएगी। शुरुआत में योजना हेतु 50 करोड़ रुपये के कोष का आवंटन किया गया है।
  • योजना के तहत स्वच्छता कर्मी प्रतिदिन 6 घंटे काम करेंगे तथा स्वच्छता कर्मी और उनके परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जाएगा।
  • विभाग ने इस योजना के कार्यान्वयन हेतु तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए गैर-लाभकारी संगठन ‘अर्बन मैनेजमेंट सेंटर’ के साथ समझौता किया है।

सुजल- ड्रिंक फ्रॉम टैप मिशन


ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 13 अक्टूबर, 2020 को 'सुजल- ड्रिंक फ्रॉम टैप मिशन' (Sujal- Drink from Tap Mission) का शुभारंभ किया।

उद्देश्य: मार्च, 2022 तक सभी शहरी परिवारों को पाइप का पानी उपलब्ध कराना तथा शहरों में 15 लाख से अधिक लोगों को लाभान्वित करना।

  • परियोजना, अपने पहले चरण में, भुवनेश्वर और पुरी को पीने के पानी की आपूर्ति करेगी।
  • ओडिशा भारत का पहला राज्य होगा, जहां शहरी क्षेत्रों में लोग सरकार की इस नई पहल के तहत, सीधे नलों से पानी पी सकेंगे।
  • इस पहल के लिए राज्य, 1,300 करोड़ खर्च कर रहा है, जिसे चरणबद्ध तरीके से अन्य जिलों में विस्तारित किया जाएगा।

झुग्गी उन्नयन कार्यक्रम


ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 28 सितंबर, 2020 को राज्य को तीन वर्ष के भीतर झुग्गी- झोपड़ियों से मुक्त कराने के लिए ‘झुग्गी उन्नयन कार्यक्रम’ (slum upgradation programme) की शुरुआत की।

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत झुग्गी-झोपड़ी निवासियों के लिए नल द्वारा पानी उपलब्ध कराने, बिजली की सुविधा सुनिश्चित करने, पक्की सडकों और मनोरंजन स्थलों के निर्माण की व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
  • तीन वर्षों में राज्य के करीब 3000 झुग्गी बस्तियों के इस कल्याणकारी कार्यक्रम की शुरुआत 100 झुग्गी- झोपड़ी बस्तियों से की जाएगी।
  • आवास और शहरी विकास विभाग और दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। सीपीआर परियोजना के कार्यान्वयन के लिए ज्ञान साझेदार होगा।