देश का पहला फॉरेस्ट हीलिंग सेंटर


7 मार्च, 2021 को लोगों को प्रकृति के सीधे संपर्क में लाकर उन्हें स्वस्थ बनाने की अवधारणा पर आधारित देश के पहले फॉरेस्ट हीलिंग सेंटर (Forest Healing centre) का उद्घाटन उत्तराखंड के रानीखेत के निकट कालिका में किया गया।

मुख्य उद्देश्य: तनावग्रस्त लोगों को तनाव से बाहर निकालना।

  • लगभग 13 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस केंद्र को उत्तराखंड वन विभाग की अनुसंधान शाखा ने वन स्नान की जापानी तकनीक शिनरिन- योकू [Japanese technique of forest bathing (shinrin-yoku)] से प्रेरणा लेते हुए तैयार किया है।

तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री


गढ़वाल लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद तीरथ सिंह रावत ने 10 मार्च, 2021 को उत्तराखंड के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें त्रिवेन्द्र सिंह रावत के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री चुना गया।

  • 57 वर्षीय तीरथ सिंह रावत, 2013-2015 में उत्तराखंड भाजपा प्रमुख थे। 1997-2002 के दौरान उत्तराखंड के निर्माण से पहले वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं।
  • वे 2012-2017 में उत्तराखंड में चौबट्टाखाल निर्वाचन क्षेत्र से विधायक थे और 2000-2002 में उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री के पद पर भी रहे।
  • तीरथ सिंह रावत मंत्रिमंडल में नए चेहरों में बंशीधर भगत, बिशन सिंह चुफाल, गणेश जोशी और स्वामी यतिस्वरानंद शामिल हैं, जो क्रमशः कालाढूंगी, डीडीहाट, मसूरी और हरिद्वार (ग्रामीण) विधानसभा क्षेत्रों से निर्वाचित हैं।
  • त्रिवेंद्र सरकार मंत्रिमंडल में शामिल मदन कौशिक को भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

भारत का पहला पॉलीनेटर पार्क


उत्तराखंड वन विभाग ने 29 दिसंबर, 2020 को ‘भारत के पहले पॉलीनेटर (पराग कण) पार्क’ (India’s first pollinator park) को जनता को समर्पित किया।

उद्देश्य: विभिन्न परागण प्रजातियों का संरक्षण करना, उनके महत्व के बारे में आम जनता के बीच जागरूकता पैदा करना और परागण के विभिन्न पहलुओं पर शोध, पर्यावास खतरों और प्रदूषण के प्रभाव, कीटनाशकों के उपयोग और विभिन्न परागणकों और पादप प्रजातियों के बीच संबंध सहित अन्य अनुसंधानों को बढ़ावा देना।

  • यह नैनीताल जिले के हल्द्वानी में 4 एकड़ में फैला हुआ है। पार्क में तितलियों, मधुमक्खियों, पक्षियों, कीटों, पतंगों, भृंगों, ततैया और छोटे स्तनधारियों की 40 से अधिक परागकण प्रजातियाँ हैं।
  • पार्क में रस और परागकण पैदा करने वाले फूलों जैसे गेंदा, गुलाब, गुडहल, चमेली आदि की पौध लगाकर विभिन्न पॉलीनेटरों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास बनाए गए हैं।
  • तितली अनुसंधान केंद्र भीमताल के जाने-माने तितली विशेषज्ञ पीटर स्मेटासेक ने पोलिनेटर पार्क का उद्घाटन किया।

नौवां ‘सतत पर्वत विकास शिखर सम्मलेन'


'सतत पर्वत विकास शिखर सम्मलेन' (Sustainable Mountain Development Summit- SMDS) का नौवां संस्करण 11 से 14 दिसंबर, 2020 तक देहरादून, उत्तराखंड में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन की मेजबानी सतत विकास मंच उत्तरांचल (SDFU), देहरादून द्वारा की गई।

सम्मलेन का विषय (Theme): Emerging Pathways for Building a Resilient Post COVID-19 Mountain Economy, Adaptation, Innovation and Acceleration.

  • शिखर सम्मेलन में कोविड-19 के बाद के परिदृश्य और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में एक लचीले और सतत पर्वत अर्थव्यवस्था (sustainable mountain economy) के पथ पर अग्रसर होने के समग्र उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • सम्मलेन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने हिस्सा लिया।
  • ‘सतत पर्वत विकास शिखर सम्मलेन’ नागरिक समाज के नेतृत्व वाले नेटवर्क प्लेटफॉर्म 'इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव' (IMI) का एक प्रमुख वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें देश के विकास के प्रवचन में भारतीय हिमालयी क्षेत्र की प्राथमिकताओं को उजागर करने के निरंतर प्रयास के तहत क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर पर्वतीय क्षेत्रों के मुद्दों को सामने लाया जाता है।

मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना


8 अक्टूबर, 2020 को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ‘मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना’ की शुरुआत की।

उद्देश्य: राज्य के लगभग 10,000 युवाओं के लिए स्वरोजगार उपलब्ध कराना।

  • प्रत्येक लाभार्थी को 25 किलोवॉट के सौर संयंत्र आवंटित किए जाएंगे। लाभार्थियों में कोविड-19 महामारी के कारण देश के विभिन्न हिस्सों से नौकरी छोड़कर घर लौट चुके युवाओं और प्रवासियों को शामिल किया गया है।
  • प्रत्येक सौर संयंत्र को स्थापित करने के लिए भूमि की कुल 1.5-2 नाली (भूमि माप इकाई) और 10 लाख रुपये की आवश्यकता है। संयंत्र में पूरे वर्ष में लगभग कुल 38000 यूनिट प्रतिवर्ष विद्युत उत्पादन हो सकता है।
  • उत्तराखण्ड राज्य/जिला सहकारी बैंक निजी भूमि पर या पट्टे पर ली गई भूमि पर सौर संयंत्र स्थापित करने के लिए 15 वर्षों के लिए प्रति वर्ष 8% की ब्याज दर पर ऋण देंगे।
  • यह बिजली उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा 25 वर्षों के लिए खरीदी जाएगी।

उत्तराखंड में ‘संस्कृत ग्राम’ विकसित करने की योजना


सितंबर 2020 में दैनिक संवाद के साधन के रूप में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने राज्य भर में ‘संस्कृत ग्राम’ विकसित करने का निर्णय लिया है। इन मॉडल गांवों के लोग दैनिक आधार पर प्राचीन भारतीय भाषा में एक-दूसरे से संवाद करेंगे।

  • हरिद्वार स्थित संस्कृत अकादमी उत्तराखंड को शुरू में जिलों में और फिर ब्लॉक स्तर पर ऐसे गांवों को विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
  • राज्य के लगभग सभी जिलों से एक गांव, जहां संस्कृत विद्यालय हैं, को इस अद्वितीय कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए चुना गया है।
  • एक प्रयोगात्मक परियोजना पहले चमोली जिले के किमोठा गांव और बागेश्वर जिले के भंटोला में चलाई गई थी, वहां के निवासी न केवल अपने दैनिक संवाद में संस्कृत का उपयोग करते हैं, बल्कि इसमें लोक गीत भी गाते हैं।
  • संस्कृत अकादमी उत्तराखंड का नाम बदलकर ‘उत्तरांचल संस्कृत संस्थानम हरिद्वार, उत्तराखंड’ करने का भी निर्णय लिया गया।

पवन हंस की पहली उड़ान-आरसीएस सेवा


उत्‍तराखंड में देहरादून को गढवाल पर्वतीय क्षेत्र से जोडने वाली पहली सरकारी अंतरराज्यीय हेलिकॉप्‍टर सेवा 29 जुलाई, 2020 से शुरू हो गई। इससे पर्वतीय क्षेत्र में पयर्टन को बढावा मिलेगा।

  • सरकारी पवन हंस लिमिटेड ने केन्‍द्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना- उडे देश का आम नागरिक के अंतर्गत देहरादून- नई टिहरी- श्रीनगर गढवाल -गौचर रूट पर उडान शुरू की।
  • पवन हंस लिमिटेड इस रूट पर सप्ताह में तीन दिन हेलीकॉप्टर सेवा का परिचालन करेगी। आम लोगों के लिए किरायों को किफायती बनाए रखने के लिए उड़ान योजना के अंतर्गत ऑपरेटर और यात्रियों दोनों को ही वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) उपलब्ध कराई गई है।

‘भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र’


केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 16 जुलाई, 2020 को ‘भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र’ के जोनल मास्टर प्लान को मंजूरी प्रदान कर दी गई।

  • जोनल मास्टर प्लान (जेडएमपी) उत्तराखंड सरकार द्वारा तैयार किया गया और केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय द्वारा इसका मूल्यांकन किया गया।

  • मास्टर प्लान वाटरशेड दृष्टिकोण पर आधारित है और इसमें वन एवं वन्यजीव, जल प्रबंधन, सिंचाई, ऊर्जा, पर्यटन, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, सड़क अवसंरचना आदि के क्षेत्र में गवर्नेंस भी शामिल हैं।

  • केंद्र सरकार ने वर्ष 2012 में स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए गोमुख से उत्तरकाशी तक के करीब 4179.59 वर्ग किमी. क्षेत्र को कवर करने वाले क्षेत्र को ‘भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित’ किया था तथा क्षेत्र के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार से जोनल मास्टर प्लान तैयार करने को कहा था।