पर्यावरण संबंधित प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान/संगठन

द बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी

स्थापना: 1883 ई. में

मुख्यालय: इस सोसायटी का मुख्यालय मुम्बई में है।

उद्देश्य: प्रकृति का संरक्षण मुख्य रूप से जैव विविधता का संरक्षण करना।

स्वरूप: मुंबई में स्थित एक अखिल भारतीय वन्यजीव अनुसंधान संगठन है, जो भारत का सबसे बड़ा गैर-सरकारी संगठन है तथा वर्ष 1883 से प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा दे रहा है।

मिशन: अनुसंधान, शिक्षा एवं सार्वजनिक जागरुकता के आधार पर कार्रवाई के माध्यम से प्रकृति का संरक्षण मुख्य रूप से जैव विविधता का संरक्षण करना है।

अन्य तथ्य:

  • संरक्षण अनुसंधानों से जुड़ी यह भारत की प्राचीनतम् सोसायटी है। इस सोसायटी द्वारा प्रकाशित ‘हार्नबिल’ पत्रिका जहां पर्यावरण प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, वहीं ‘जर्नल ऑफ नेचुरल हिस्ट्री’ इस सोसायटी द्वारा प्रकाशित प्रसिद्ध पत्रिका है।
  • इस सोसायटी के अन्य प्रमुख प्रकाशन ‘हैंडबुक ऑन बर्ड्स’, ‘बुक ऑफ इंडियन रेप्टाइल्स’, ‘बुक ऑफ इण्डियन ट्रीज’ आदि हैं। इस सोसायटी का बहुचर्चित अभियान ‘खामोशवादी को बचाओ’ था।
  • जाने-माने पक्षीविद् सलीम अली इस सोसायटी से सम्बंधित थे।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife-NBWL)

स्थापना: वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत वर्ष 2003 में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का गठन किया गया था।

उद्देश्य: वन्यजीवों और वनों के संरक्षण और विकास को प्रोत्साहन देना।

स्वरूप: यह वन्य पारस्थितिकी से संबंधित मामलों में सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करता है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है। सैद्धांतिक रूप से राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) की प्रकृति एक सलाहकार जैसी होती है; जो कि केंद्र सरकार को देश में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए नीतियों और उपायों को तैयार करने की सलाह देता है।

कार्य: वन्य जीवन से जुड़े मामलों तथा राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के आस-पास निर्माण या अन्य परियोजनाओं की समीक्षा करता है।

  • यह केन्द्रीय सरकार को देश के वन्यजीवन के संरक्षण के लिए नीतियाँ बनाने और अन्य उपाय करने के विषय में परामर्श देता है। इस बोर्ड का प्राथमिक कार्य वन्यजीवों और वनों के संरक्षण एवं विकास को प्रोत्साहन देता है।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)

स्थापना: वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में कुछ संशोधन प्रस्तावित किये गए और इस निकाय का गठन वर्ष 2006 में किया गया।

उद्देश्य: बाघों के वास स्थान का संरक्षण करना।

स्वरूप: यहकेंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है। इस प्राधिकरण में 8 विशेषज्ञ या पेशेवर होते हैं, जिनके पास वन्यजीव संरक्षण और आदिवासियों सहित अन्य लोगों के कल्याण का अनुभव होता है। इन 8 में से तीन संसद सदस्य होते हैं, जिनमें से दो लोकसभा तथा एक राज्यसभा का सदस्य होता है।

कार्य: इसका प्रमुख कार्य बाघों के वास स्थान का संरक्षण और इन क्षेत्रें में औद्योगिक गतिविधियों को नियंत्रित करना। संरक्षित क्षेत्र में पर्यटन के लिये मानक बनाना तथा बाघों के संरक्षण हेतु राज्यों तथा केंद्र सरकार के उत्तरदायित्वों को निर्धारित करना आदि प्रमुख हैं।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India-WII)

स्थापना: केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय के अंतर्गत एक स्वतंत्र निकाय है, इसका गठन वर्ष 1982 में किया गया था।

मुख्यालय: यह संस्थान देहरादून (उत्तराखंड) के चन्द्रबनी में स्थित है।

स्वरूप: भारतीय वन्यजीव संस्थान का परिसर समस्त भारतवर्ष में जैव विविधता सम्बन्धी मुद्दों पर उच्च स्तर के अनुसंधान के लिये श्रेष्ठतम् ढाँचागत सुविधाओं हेतु स्थापित किया गया है।

कार्य: यह संस्थान लुप्तप्राय जीवों, जैवविविधता, वन्यजीव नीति, जैव विकास और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रें में शोध के लिये कार्यक्रमों का संचालन करता है।

लक्ष्य और उदेश्य

  • वन्यजीव संसाधनों पर वैज्ञानिक ज्ञान को समृद्ध करना।
  • वन्यजीव संरक्षण एवं प्रबंधन के लिये कार्मिकों को विभिन्न स्तरों पर प्रशिक्षित करना।
  • विकास की तकनीकों सहित तथा भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रबंधन से सम्बन्ध अनुसंधान करना।
  • वन्यजीव अनुसंधान प्रबंधन तथा प्रशिक्षण पर अन्तरराष्ट्रीय संगठनों से साझेदारी करना।
  • वन्यजीव तथा प्राकृतिक संसाधन संरक्षण पर अन्तरराष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रीय केन्द्र के रूप में विकास करना। वन्यजीव प्रबंधन सम्बन्धी विशेष समस्याओं पर सूचना एवं सलाह देना।

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी)

स्थापना: इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था।

उद्देश्य: वायु गुणवत्ता में सुधार करना तथा वायु प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण और न्यूनीकरण करना।

स्वरूप: केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अधीन भी शक्तियां और कार्य सौंपे गए हैं।

  • यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रलय के एक फील्ड संघटन का काम करता है तथा मंत्रलय को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के बारे में तकनीकी सेवाएं भी प्रदान करता है।

कार्य: जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण, निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 में निर्धारित किए गए अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख कार्य हैं-

  • जल प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण तथा न्यूनीकरण द्वारा राज्यों के विभिन्न क्षेत्रें में नदियों और कुओं की स्वच्छता को बढ़ावा देना।
  • देश की वायु गुणवत्ता में सुधार करना तथा वायु प्रदूषण का निवारण, नियंत्रण और न्यूनीकरण करना।

तरुण भारत संघ

स्थापना: 1975

संस्थापक: राजेन्द्र सिंह इसके संस्थापक एवं वर्तमान अध्यक्ष हैं।

उद्देश्य: वन और जल संरक्षण को बढ़ावा देना।

स्वरूप: तरुण भारत संघ (टीबीएस) भारत की एक अशासकीय संस्था (NGO) है।

कार्य: यह लोगों को वन एवं जल के संरक्षण के मुद्दों पर जागरुक बनाने का काम कर रही है।

अन्य तथ्य

  • 1975 में जयपुर विश्वविद्यालय के परिसर में एक भीषण आग के पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था।

सुलभ इंटरनेशनल

स्थापना: 1970

संस्थापक: बिन्देश्वरी पाठक

स्वरूप: सुलभ इंटरनेशनल एक समाज सेवी संगठन है।

कार्य: यह मानव अधिकारों, पर्यावरण की स्वच्छता, ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों, अपशिष्ट प्रबंधन एवं शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तनों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है। इसने भारत में लोगों का ध्यान स्वच्छता की ओर आकर्षित करने में अहम् भूमिका अदा की है।

  • इसने लोगों को खुले में मल-मूत्र त्याग की आदत को रोकने में अहम भूमिका निभाई एवं लोगों को टॉयलेट (शौचालयों) के इस्तेमाल के लिए उत्साहित किया तथा स्वच्छता के प्रयास करने के लिए भी तैयार किया है।

टेरी

स्थापना: 1974

मुख्यालय: नई दिल्ली

उद्देश्य: गंभीर एवं कठिन समस्याओं से जूझना एवं उनका समाधान खोजना।

शाखा: उत्तरी अमेरिका, यूरोप, जापान, मलेशिया एवं खाड़ी देशों में है।

स्वरूप: यह एक जनरुचि शोध एवं समर्थक संगठन है, जो पर्यावरण के लिए हितकर एवं न्यायसंगत विकासशील रणनीतियों को बढ़ावा देता है।

कार्य: इसका कार्य उत्पादों समाधानों और नीतियों की एकशृंखला बनाने और बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जो पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करता है।

  • जल उपयोग दक्षता को बढ़ावा देने और वनों के संरक्षण के साथ-साथ वन आश्रित समुदायों की आजीविका को बढ़ाने के लिए अभिनव समाधान विकसित किए हैं।
  • यह ऐसे समाधानों की दिशा में कार्य करता है, जो कचरे के उत्पादन को कम करते हैं, इसके पुनः उपयोग को बढ़ावा देते हैं और एक परिपत्र अर्थव्यवस्था का निर्माण करते हैं।

भारत पशु कल्याण बोर्ड

स्थापना: वर्ष 1962 में पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम, 1960 के तहत की गई है। इस बोर्ड की स्थापना में प्रसिद्ध मानवतावादी रूक्मिणी देवी अरूंडेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

मुख्यालय: पहले चेन्नई में था, जिसे अब हरियाणा के सीकरी, बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) में स्थानांतरित कर दिया गया है।

उद्देश्य: मनुष्यों को छोड़कर सभी प्रकार के जीवों की पीड़ा से बचाव करना।

स्वरूप: भारतीय पशु कल्याण बोर्ड एक वैधानिक सलाहकार निकाय है। यह पशु कल्याण के मामलों पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रलय को सलाह प्रदान करता है।

कार्य: पशुओं के खिलाफ हिंसा रोकने वाले भारत में प्रवृत्त कानूनों से अद्यतन रहना और समय-समय पर इनमें संशोधन करने का सरकार को सुझाव देना तथा भार ढोने वाले पशुओं के बोझ को कम करने के लिये केंद्र सरकार या स्थानीय प्राधिकरण या अन्य व्यक्ति के माध्यम से पशुओं द्वारा चालित वाहनों के डिजाइन में सुधार करना।

केन्द्रीय समुद्री मत्स्यिकी संस्थान

स्थापना: 3 फरवरी, 1947

मुख्यालय: कोच्चि (केरल)

स्वरूप: केन्द्रीय समुद्री मत्स्यिकी अनुसंधान संस्थान भारत सरकार द्वारा कृषि मंत्रलय के तथा वर्ष 1967 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अधीनस्थ कार्यरत है।

  • यह दुनिया में एक प्रमुख उष्णकटिबंधीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान है।

राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण

स्थापना: 20 फरवरी, 2009 को एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट-1986 के सेक्शन 3(3) के अंतर्गत किया गया।

उद्देश्य: नदी पारिस्थितिकी के लिए जरूरी उपाय तथा जल गुणवत्ता बनाए रखने हेतु प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण।

कार्य क्षेत्र: राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) ने चार विभिन्न क्षेत्रें जैसे- अपशिष्ट जल प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण एवं नदी मुख विकास के जरिए गंगा की चुनौतियों से निपटने के लिए परिवर्तित व व्यापक सोच के साथ निर्मल गंगा मिशन की शुरुआत की है।

  • राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) के कार्यों में गंगा नदी घाटी प्रबंधन विकास योजना एवं गंगा नदी घाटी राज्यों में नदी पारिस्थितिकी के लिए जरूरी उपायों तथा जल गुणवत्ता बनाए रखने हेतु प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण आदि शामिल है।
  • इसे गंगा नदी में न्यूनतम पारिस्थितिकी बहाव/स्राव बनाए रखने एवं निम्नलिखित कार्यक्रमों की योजना, वित्त प्रबंधन एवं निष्पादन आदि का कार्य सौंपा गया है-
  1. मल निकास के ढांचों का संवर्धन,
  2. वन क्षेत्र/जल-क्षेत्र परिशोधन,
  3. समतल प्लावन से बचाव,
  4. जन-जागरुकता फैलाना।

अन्य तथ्य -

  • प्राधिकरण की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है और संबंधित केंद्रीय मंत्री तथा उन राज्यों के मुख्यमंत्री जहां से होकर गंगा बहती है; जैसे- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल एवं अन्य इसके सदस्य हैं।
  • जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रलय, राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (एनजीआरबीए) को लागू करने वाली नोडल एजेंसी है

केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण

चिड़ियाघरों को वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार विनियमित तथा राष्ट्रीय चिड़ियाघर नीति, 1992 द्वारा निर्देशित किया जाता है।

उद्देश्य: जंगली जीवन के संरक्षण में राष्ट्रीय प्रयासों का पूरक होना तथा भारत में जानवरों के रख-रखाव और स्वास्थ्य देखभाल के लिए न्यूनतम मानकों तथा मानदंडों को लागू करना है।

स्वरूप: केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, एक सांविधिक निकाय statutory body) है

  • 1991 में केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण स्थापित करने के लिये वन्य जीवन संरक्षण को संशोधित किया गया था।

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो

स्थापना: इसकी स्थापना 2007 में की गई और इसका परिचालन 2008 में शुरू हुआ था।

यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन के बाद स्थापित किया गया था।

मुख्यालय: ब्यूरो का अपना मुख्यालय दिल्ली में है तथा इसके पाँच क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, चेन्नई और जबलपुर में हैं।

स्वरूप: देश में संगठित वन्यजीव अपराध का मुकाबला करने के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय के अधीन भारत सरकार द्वारा स्थापित सांविधिक बहु-विषयक अधीनस्थ संस्था है।

  • वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) एक बहु अनुशासनात्मक वैधानिक निकाय है। इसकी स्थापना संगठित वन्यजीव अपराधों पर नियंत्रण के लिए पर्यावरण और वन मंत्रलय के तहत भारत सरकार द्वारा की गई है।

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण

स्थापना: 1 जुलाई, 1916

मुख्यालय: इसका मुख्यालय कोलकाता में है तथा वर्तमान में इसके 16 क्षेत्रीय स्टेशन देश के विभिन्न भौगोलिक स्थानों में स्थित हैं।

उद्देश्य: समृद्ध जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने हेतु अग्रणी सर्वेक्षण, अन्वेषण और अनुसंधान को बढ़ावा देना।

स्वरूप: यह पर्यावरण और वन मंत्रलय के तहत एक संगठन है।

कार्य: भारतीय जानवरों पर रेड डेटा बुक प्रकाशित करता है तथा भारत के जीव, राज्यों के जीव और संरक्षण क्षेत्रें के जीवों सहित परिणामों का प्रकाशन करता है।

  • यह पर्यावरण सूचना प्रणाली (ENVIS) के विकास और वन्य जीवों और वनस्पतियों (CITES) केंद्रों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन के विकास के लिए काम करता है।

राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी शोध संस्थान (NEERI)

स्थापना: वर्ष 1958 में भारत सरकार द्वारा स्थापित और वित्तपोषित संस्थान है।

मुख्यालय: नागपुर में है तथा इसकी पाँच क्षेत्रीय प्रयोगशालाएँ क्रमशः चेन्नई, दिल्ली, कलकत्ता, हैदराबाद और मुंबई में स्थित हैं।

उद्देश्य: इसका मिशन ज्ञान का आधार विकसित करना, अंतर्विषयक सहायता प्रदान करना, स्थायी पर्यावरण एवं आर्थिक लक्ष्य सुनिश्चित करना है।

  • यह पर्यावरण और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान करता है। यह वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific - Industrial Research - CSIR) की एक घटक प्रयोगशाला है।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण

स्थापना: स्थापना 18 अक्टूबर, 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम (National Green Tribunal Act), 2010 के तहत की गई थी।

मुख्यालय: दिल्ली में है, जबकि चार क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल, पुणे, कोलकाता एवं चेन्नई में स्थित हैं।

उद्देश्य: पर्यावरण संबंधी मुद्दों का तेजी से निपटारा करना है तथा अदालतों में लगे मुकदमों के बोझ को कम करना।

संरचना: अध्यक्ष, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं। वे तीन वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक पद पर रहेंगे और पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे। अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।

  • वर्तमान में इसके अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल हैं।

कल्प वृक्ष

स्थापना: 1979

स्वरूप: यह एक गैर श्रेणीबद्ध (Nonhierarchical) संगठन है। इस समूह में सभी निर्णय उचित बहस और चर्चा के बाद ही लिए जाते हैं।

कार्य: यह पर्यावरणीय जागरुकता, अभियानों, मुकदमों, शोध एवं अन्य क्षेत्रें में कार्य करता है।

अन्य तथ्य

कल्पवृक्ष (Kalpavriksh) का यह विश्वास है कि एक देश का सही मायने में विकास तभी हो सकता है, जब पारिस्थितिकी की सुरक्षा एवं सामाजिक समानता सुनिश्चित हो और प्रकृति व प्राणियों के प्रति एकरूपता तथा आदर का भाव लाया जा सके।

वर्ल्ड वाइड फ़ण्ड फ़ॉर नेचर इण्डिया

स्थापना: इस संस्था का गठन मुम्बई में सन् 1969 में हुआ।

मुख्यालय: दिल्ली

उद्देश्य: पर्यावरण से सम्बन्धित संरक्षण एवं सुरक्षा की देख-रेख करना।

  • इस संस्था की पहचान मुख्य रूप से पर्यावरण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के प्रयासों के लिए की जाती है। इस संस्था ने स्कूलों में बच्चों के लिए भारतीय प्रकृति क्लब जैसे कार्यक्रमों को प्रारम्भ किया है। यह संस्था पर्यावरण से सम्बन्धित सभी बिन्दुओं के साथ-साथ संरक्षण एवं सुरक्षा की भी देख-रेख करती है।

सलीम अली सेंटर फ़ॉर ओर्निथोलोजी एंड नेचुरल हिस्ट्री

स्थापना: केन्द्र की स्थापना मुम्बई नैचुरल हिस्ट्री सोसायटी हिस्ट्री सोसायटी, मुम्बई द्वारा तैयार किए गए एक परियाजना प्रस्ताव के आधार पर सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अन्तर्गत एक गैर-सरकारी संगठन के रूप में जून, 1990 में की गई थी। इस केन्द्र को मंत्रलय द्वारा संचालित ‘‘उत्कृष्टता केन्द्र’’ नामक योजना के अन्तर्गत वित्तीय सहायता दी जाती है।

मिशन: भारतीय जैव विविधता के संरक्षण में सहायता करना तथा अनुसंधान, शिक्षा और जन भागीदारी से सतत उपयोग सुनिश्चित करना है।

  • इसका नामकरण प्रसिद्ध पक्षीविज्ञानी सलीम अली के नाम पर किया गया है। यह तमिलनाडु के कोयम्बत्तूर में स्थित है।
  • जैवविविधता और प्राकृतिक विज्ञान के सभी पहलुओं को शामिल करते हुए पक्षीविज्ञान में डिजाइन और अनुसंधान के साथ साथ भारतीय पक्षी विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास पर डाटा बैंक का निर्माण करता है।

राष्ट्रीय ग्रीन कार्प्स (एनजीसी)

राष्ट्रीय ग्रीन कार्प्स (एनओसी) मंत्रलय द्वारा आरम्भ किया गया और वित्त पोषित एक जागरूकता कार्यक्रम है, जो स्कूली बच्चों में पर्यावरण के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने तथा पारि - क्लबों के माध्यम से उन्हें पर्यावरण से संबंधित कार्यकलापों में शामिल करने के लिए है। पर्यावरण शिक्षा केन्द्र 15 राज्यों और दो संघ शासित प्रदेशों में एन.जी.सी. की संसांधन एजेंसी है जिसके अन्तर्गत 32,300 स्कूल हैं।