मोटर वाहन (संशोधान) बिल, 2019

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने 15 जुलाई, 2019 को लोकसभा में मोटर वाहन (संशोधन) बिल, 2019 पेश किया। यह बिल सड़क सुरक्षा प्रदान करने के लिए मोटर वाहन एक्ट, 1988 में संशोधन का प्रस्ताव करता है। यह एक्ट मोटर वाहनों से संबंधित लाइसेंस और परमिट देने, मोटर वाहनों के लिए मानक और इन प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए दंड का प्रावधान करता है।

विधेयक की प्रमुख विशेषता

  • सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजाः केंद्र सरकार ‘गोल्डन आवर’ (स्वर्णिम घंटे) के दौरान सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का कैशलेस उपचार करने की एक योजना विकसित करेगी। बिल के अनुसार ‘गोल्डन आवर’ घातक चोट के बाद की एक घंटे की समयावधि होती है।
  • अनिवार्य बीमाः बिल में केंद्र सरकार से मोटर वाहन दुर्घटना कोष बनाने की अपेक्षा की गई है। यह कोष भारत में सड़क का प्रयोग करने वाले सभी लोगों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा।
  • वाहनों का रीकॉलः बिल केंद्र सरकार को ऐसे मोटर वाहनों को रीकॉल (वापस लेने) करने का आदेश देने की अनुमति देता है, जिसमें कोई ऐसी खराबी है जो पर्यावरण, ड्राइवर या सड़क का प्रयोग करने वालों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी स्थिति में, मैन्यूफैक्चरर को (i) खरीदार को वाहन की पूरी कीमत लौटानी होगी, या (ii) खराब वाहन को दूसरे वाहन से, जोकि समान या बेहतर विशेषताओं वाला हो, बदलना होगा।
  • राष्ट्रीय परिवहन नीतिः केंद्र सरकार राज्य सरकारों की सलाह से राष्ट्रीय परिवहन नीति बना सकती है। इस नीति में: (i) सड़क परिवहन के लिए एक योजनागत संरचना बनाई जाएगी, (ii) परमिट देने के लिए फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा, और (iii) परिवहन प्रणाली की प्राथमिकताएं विनिर्दिष्ट की जाएंगी, इत्यादि।
  • सड़क सुरक्षा बोर्डः बिल में एक राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का प्रावधान है जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना के जरिए बनाया जाएगा। बोर्ड सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के सभी पहलुओं पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देगा।
  • अपराध और दंडः बिल में एक्ट के तहत विभिन्न अपराधों के लिए दंड को बढ़ाया गया है। उदाहरण के लिए शराब या ड्रग्स के नशे में वाहन चलाने के लिए अधिकतम दंड 2,000 रुपए से बढ़ाकर 10,000 रुपए कर दिया गया है। अगर मोटर वाहन मैन्यूफैक्चरर मोटर वाहनों के निर्माण या रखरखाव के मानदंडों का अनुपालन करने में असफल रहता है तो अधिकतम 100 करोड़ रुपए तक का दंड या एक वर्ष तक का कारावास या दोनों दिए जा सकते हैं। केंद्र सरकार एक्ट में उल्लिखित जुर्माने को हर साल 10% तक बढ़ा सकती है।

सड़क सुरक्षा की दशा में उठाए जाने वाले कदम

  • प्रधानमंत्री सुरक्षित सड़क योजनाः इसे 2,000 करोड़ रुपये के प्रारम्भिक कोष के साथ आरम्भ किया गया है। इसके माध्यम से राजमार्गों पर खतरनाक बिन्दुओं को समाप्त किया जा सकेगा।
  • हाल ही में, सरकार ने दोपहिया वाहनों में अप्रैल 2019 से एंटी ब्रेक लॉक प्रणाली का होना अनिवार्य कर दिया, ताकि आपात स्थिति में ब्रेक का प्रयोग करते समय वाहनों पर नियंत्रण बेहतर किया जा सके।
  • सरकार ने वर्ष 2015 में ब्राजीलिया घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसका संकल्प सड़क हादसों तथा इससे होने वाली जान-माल की हानि का आधार करना था।
  • भारत सरकार ने दिशा-निर्देश जारी करके अस्पतालों, पुलिस तथा सभी अधिकारियों को परोपकारी व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
  • राष्ट्रीय कार्य योजना के मसौदे में वर्ष 2020 तक सड़क हादसों में हेने वाली मौतों की संख्या को आधार करने का लक्ष्य रखा गया है।

सड़क की श्रेणी

सड़कों की लंबाई (कि.मी.)

राष्ट्रीय राजमार्ग

1,14,158

राज्य राजमार्ग

1,75,036

जिला सड़कें

5,86,181

ग्रामीण सड़कें

41,66,916

शहरी सड़कें

5,26,483

परियोजना वाली सड़कें

3,28,897

कुल

58,97,671

सड़क परिवहन

सड़कें परिवहन की एक बहुआयामी एकीकृत प्रणाली का हिस्सा हैं, जो हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों बंदरगाहों और अन्य लॉजिस्टिक हब जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों को जोड़ती हैं तथा अबाध आपूर्ति प्रबंधन में महत्वूपर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए आर्थिक संवृद्धि के लिए उत्प्रेरक का कार्य करती है। यह रेल, हवाई यातायात और अंतर्देशीय जलमार्गों की तुलना में परिवहन का प्रमुख साधन है, इसकी हिस्सेदारी जी. वी. ए. की लगभग 3.14 प्रतिशत है तथा देश भर में माल ढुलाई एवं यात्री यातायात में इसकी हिस्सेदारी क्रमशः 69 प्रतिशत और 90 प्रतिशत है।

भारतीय सड़क प्रणाली का सकल लम्बाई के मामले में विश्व में दूसरा स्थान है, जबकि 67 लाख किलोमीटर लंबाई के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका प्रथम स्थान पर है। भारतीय सड़क प्रणाली में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्ग, जिला, ग्रामीण, शहरी एवं परियोजना वाली सड़कें शामिल हैं। भारत में 01 मार्च, 2017 की स्थिति के अनुसार लगभग 58.98 लाख किमी. का सड़क नेटवर्क है; जिसमें ग्रामीण सड़कें 70.65% और राष्ट्रीय राजमार्ग 1.94 प्रतिशत हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग कुल यातायात का भार लगभग 40% वहन करता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) द्वारा राजमार्गों के महत्व को देखते हुए वर्ष 2018-19 को ‘निर्माण वर्ष’ घोषित किया था। यह देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के नेटवर्क के विस्तार और उन्नयन के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सड़क निर्माण की गति में वृद्धि हुई। तुलनात्मक रूप से जहां वर्ष 2014-15 में प्रतिदिन 12 किमी. सड़क का निर्माण होता था, वहीं वर्ष 2018-19 में प्रतिदिन 30 किमी. की औसत से सड़कों का निर्माण हुआ।

सरकार द्वारा भौतिक संपर्क को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, औद्योगिक गलियारों, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर, भारतमाला एवं सागरमाला परियोजना, जलमार्ग विकास और यूडीएएन आदि का क्रियान्वयन किया जा रहा है। वर्तमान में सरकार द्वारा सड़कों एवं राजमार्गों के लिए भारतमाला परियोजना, यातायात की गति, सड़क सुरक्षा और आईटी अनुप्रयोग उपयोग बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त परिवहन के बेहतरी एवं एकीकरण के लिए मल्टीमाडल परिवहन लागत कम करना, धन के नए स्रोतों की खोजऔर नए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) माडल पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

  • भारत सरकार द्वारा 2022 तक 2,00,000 किमी से अधिक राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के लिए स्वचालित मार्ग के तहत 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति प्रदान की गई। इसके साथ ही सरकार ने 550 जिलों को 4-लेन वाली सड़क संपर्क प्रदान करने, वाहनों की 20-25% गति बढ़ाने और आपूर्तिश्रृंखला की लागत में 5-6% तक कम करने पर जोर दिया है।
  • सरकार द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीति और नए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के माध्यम सेसड़क दुर्घटनाओं एवं उनसे होने वाली मृत्यु को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। दिल्ली सरकार द्वारा फरिश्ते योजना को प्रारम्भ किया गया है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना से होने वाली मृत्यु को कम करने के लिए बचाव के पहले घंटे गोल्डन आवर में उपचार उपलब्ध करना है।