Aarambh Civil Services Academy
संक्षिप्त खबरें
सामयिक सामान्य ज्ञान
ये भारतीय-अमेरिकी सीईओ, अमेरिका में नई टी-20 लीग 'मेजर लीग क्रिकेट' में निवेश करेंगे। - सत्य नडेला (माइक्रोसॉफ्ट) और शांतनु नारायण (एडोब)
आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक ए गोपालकृष्णन ने वर्ष 2020 के लिए यह पुरस्कार जीता है। - VASVIK (Vividhlaxi Audyogik Samshodhan Vikas Kendra) औद्योगिक अनुसंधान पुरस्कार
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और असम राइफल कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ रोजगार पाने में मदद करने के उद्देश्य से, गृह मंत्रालय ने यह पोर्टल लॉन्च किया है। - 'सीएपीएफ पुनर्वास' (CAPF Punarvaas) पोर्टल
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी निधि छिब्बर को किस संस्थान का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है? - केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई)
Medha IAS
आलेख
सामयिक प्रश्न

सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-

  1. सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों (Community Forest Resource rights) को ‘अनुसूचित जाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम’ की धारा 3(1)(i) के तहत मान्यता प्राप्त है। इस क़ानून को आमतौर पर ‘वन अधिकार अधिनियम’ या ‘एफआरए’ के रूप में संदर्भित किया जाता है।
  2. यह कानून सामुदायिक वन संसाधनों को “संरक्षित, पुनर्जीवित या संरक्षित या प्रबंधित” करने के अधिकार की मान्यता प्रदान करता है।
  3. ये अधिकार, समुदाय को स्वयं और दूसरों के द्वारा वन उपयोग के लिए नियम बनाने की अनुमति देते हैं और इस तरह ‘वन अधिकार अधिनियम’ (FRA) की धारा 5 के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?

A
केवल 1 और 2
B
केवल 2
C
केवल 2 और 3
D
1, 2 और 3

साक्षात्कार
राजीव कुमार
राजीव कुमार
बीपीएससी रैंक-45 65वीं डीएसपी पद पर चयन


नाम: राजीव कुमार

पिता का नाम एवं पेशा: श्री बिरेन्द्र सिंह, किसान

माता का नाम एवं पेशा: श्रीमती सुनीता देवी, गृहिणी

शैक्षिक योग्यता: स्नातक (गणित प्रतिष्ठा)- बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर (प्रथम श्रेणी)

आदर्श व्यक्ति: मेरे पिताजी

अभिरुचियां: घूमना, संगीत सुनना

वैकल्पिक विषय (मुख्य परीक्षा): भूगोल

पूर्व चयन: (1) C.I.S.F., HC/CLK, (2) CENTRAL EXISE - TAX ASSISTANT,(3) CGL 2008 - PREVENTIVE OFFICER, (4) CGL 2010 - EXCISE INSP.(5) CDS – 2007

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्रॉनिकलः 65वीं बीपीएससी में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई. आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

राजीव कुमारः जी बहुत-बहुत धन्यवाद। मेरी सफलता में ईश्वर, माता-पिता, छोटे भाई, परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग विशेष रूप से मेरी पत्नी तथा प्यारी बेटी का त्याग/सहयोग महत्वपूर्ण है। शिक्षक के रूप में अभिनव झा सर जिन्होंने भूगोल वैकल्पिक का मार्गदर्शन किया, साथ ही शाहिद इकबाल सर जो 60-62वीं एवं 63वीं बीपीएससी में डीएसपी पद पर चयनित है, उनका भी योगदान महत्वपूर्ण है। मित्र में आलोक परासर, संजीत, मुकेश जी, प्रणव प्रकाश, रणधीर ने मुझे तैयारी के प्रत्येक स्तर पर अकथनीय सहयोग किये हैं। चूंकि मैं ग्रामीण पृष्ठभूमि का छात्र रहा हूं, अतः गांव के लोगों के बारे में, उनकी समस्याओं के बारे में अच्छी तरह से अवगत हूं। अतः उन लोगों के लिए कुछ करने की इच्छा हमेशा से जागृत रही है। कहीं न कहीं इन सबने भी मुझे सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया?

राजीव कुमारः मैंने परीक्षा की तैयारी का आरंभ परीक्षा पैटर्न, सिलेबस तथा विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का गहन अध्ययन करते हुए किया। तैयारी के दौरान मैंने तीनों स्तरों (प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार) के लिए अलग-अलग रणनीति बनाई। प्रारंभिक परीक्षा के लिए तथ्यात्मक अध्ययन पर जोर दिया। मुख्य परीक्षा के लिए विगत वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए विस्तृत अध्ययन पर बल दिया तथा साक्षात्कार में अधिक से अधिक मॉक साक्षात्कार में शामिल हुआ। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान ही मैं लक्ष्य कोचिंग दरभंगा के निदेशक आदरणीय पी.एन.झा सर से जुड़ा, उनके तथा हरिओम झा सर के मार्गदर्शन में ही मैंने साक्षात्कार में अच्छा अंक प्राप्त किया। साक्षात्कार की तैयारी के दौरान कैरियर क्वेस्ट के निदेशक संजीव कबीर सर से भी काफी सहयोग मिला।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

राजीव कुमारः मैं हिन्दी माध्यम से इस परीक्षा में सफल हुआ हूं। जहां तक अंग्रेजी भाषी छात्रों की लाभप्रद स्थिति का सवाल है इस संबंध में, मैं यह कहना चाहूंगा कि विगत वर्षों के परिणाम से स्पष्ट है कि वर्ष दर वर्ष हिन्दी माध्यम से चयनित छात्रों की संख्या घटती जा रही है। 65वीं बी.पी.एस.सी. में ही अंतिम रूप से चयनित प्रथम 50 छात्रों में केवल दो छात्रों का माध्यम हिन्दी था। इसमें मेरा स्थान द्वितीय था। मैं अपने अनुभव के आधार पर हिन्दी माध्यम के छात्रों, अभ्यर्थियों से कहना चाहूंगा कि वो माध्यम को लेकर हतोत्साहित/निराश न हो तथा सही दिशा में, मानक अध्ययन सामग्री को आधार बनाते हुए तैयारी करें, आपको सफलता अवश्य मिलेगी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

राजीव कुमारः मेरा वैकल्पिक विषय भूगोल था। इस विषय के प्रति मेरी अभिरुचि, अध्ययन सामग्री की उपलब्धता, अंकदायी होने के कारण मैंने इस विषय का चयन किया। मैं वर्ष 2011 संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली गया था। उस समय मुखर्जी नगर में सर्वत्र यह चर्चा का विषय था कि UPSC में वैकल्पिक विषय के रूप में केवल लोक प्रशासन एवं विधिशास्त्र (LAW) को ही वैकल्पिक विषय के रूप में रख सकेंगे। मैंने लोक प्रशासन विषय को चुना। लेकिन 56-59वीं एवं 64वीं बी.पी.एस.सी. में मैंने भूगोल वैकल्पिक का चयन किया तथा मुझे अंतिम रूप से इस परीक्षा में सफलता मिली।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःपरीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुत्तफ़ मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

राजीव कुमारः तीनों चरणों की तैयारी के लिए उपयुक्त समय परीक्षार्थी की रणनीति, कार्य के प्रति समर्पण आदि पर निर्भर करता है। फिर भी यदि प्रयास स्नातक स्तर से ही किया जाए तो स्नातक के उपरांत एक वर्ष का समय पर्याप्त है। मुझे ज्यादा समय लगने का कारण यह है कि मैं सरकारी सेवा में कार्यरत हूं तथा तैयारी केवल परीक्षा के समय में ही अनियोजित तरीके से करता था। साथ ही पिछले 4-5 वर्षों से बी.पी.एस.सी. की परीक्षा नियमित होने लगी है, उससे पहले फार्म प्रकाशित होने से अंतिम परिणाम तक लगभग 4-5 वर्ष लगते थे, इस कारण भी देर हुई। इसके अतिरिक्त लॉकडाउन के कारण ऑफिस में रोस्टर सिस्टम लागू था, जिससे मुझे 65वीं मुख्य परीक्षा की तैयारी में काफी सहायता मिली।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

राजीव कुमारः सामान्य अध्ययन की तैयारी का सर्वोत्तम तरीका है कि इस विषय के दोनों पेपर के विभिन्न खंडों का विभाजन कर तैयारी करना। जैसे स्टैटिक्स को अधिक बल देना ताकि इसमें अधिकतम अंक प्राप्त हो सके। इस भाग में अच्छा स्कोर मिलने पर ही उच्च रैंक प्राप्त करने की सम्भावना रहती है। परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करते समय मैंने समय प्रबंधन पर विशेष बल दिया तथा प्रत्येक खंड के सभी प्रश्नों को एक निर्धारित समय-सीमा में हल करने का प्रयत्न किया। साथ में यह भी ध्यान रखा कि कोई भी प्रश्न छूट न जाए। एक भी प्रश्न छूट जाने पर उच्च रैंक तो दूर सफलता की संभावना भी नगण्य हो जाती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःक्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

राजीव कुमारः वैकल्पिक विषय भूगोल तथा समान्य अध्ययन के इतिहास एवं राजव्यवस्था खंड का नोट्स बनाया था। स्वयं का बनाया नोट्स तैयारी के दौरान तथा परीक्षा के समय रिवीजन में काफी लाभप्रद साबित हुआ। मैंने किसी कोचिंग के नोट्स का उपयोग नहीं किया। मैंने मूल किताब से स्वयं नोट्स बनाया तथा इसे नियमित रूप से अपडेट किया। मैंने सामान्य अध्ययन के लिए बी.पी.एस.सी. पाठशाला टेलीग्राम चैनल द्वारा मुफ्त में आयोजित टेस्ट सीरीज में भाग लिया तथा टॉपर्स की कॉपी से अपने उत्तर तथा नोट्स को अपडेट किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

राजीव कुमारः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली में निर्धारित समय में सरल भाषा में तथा प्रश्न की मांग के अनुरूप सभी भागों को कवर करना चाहिए। इसके लिए मैंने नियमित रूप से टेस्ट सीरीज में भाग लेकर अपने उत्तर को अपडेट करने का प्रयास किया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःआपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

राजीव कुमारः साक्षात्कार हेतु मैंने संजीव कबीर सर (Career Quest) से काफी सहयोग मिला, सर ने साक्षात्कार के दौरान क्या, क्यों, कब करना चाहिए, आपके ड्रेस पैटर्न, बैठने का तरीका, प्रवेश करने तथा निकलने के समय अभिवादन आदि के बारे में बताया। मॉक साक्षात्कार में, मैं संजीव सर, आस्था आईएएस, परम आईएएस तथा लक्ष्य कोचिंग दरभंगा में शामिल हुआ। लक्ष्य कोचिंग में ही मैंने सबसे अधिक मॉक दिया, वहां पर आदरणीय पी.एन. झा सर का सहयोग काफी प्रशंसनीय था। मेरा साक्षात्कार 6 अगस्त, 2021 को प्रथम पाली में श्री चौधरी सर के बोर्ड में था। साक्षात्कार में मुझसे ऐच्छिक विषय, वर्तमान नौकरी तथा हॉबी से संबंधित प्रश्न पूछे गए। बोर्ड का व्यवहार बहुत ही सहयोगपूर्ण था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? वैसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

अनुशंसित पुस्तक सूची

प्रारंभिकी:

  • इतिहास-घटना चक्र (इतिहास), KCT, Lucent
  • भूगोल-महेश बर्णवाल, Lucent
  • राजव्यवस्था-एम- लक्ष्मीकांत
  • बिहार विशेष-विवास पैनोरमा
  • विज्ञान-Lucent, Speedy प्रकाशन
  • समसामयिकी-क्रॉनिकल, GKT

मुख्य परीक्षा:

  • GS-I-बिहार समग्र (इतिहास)
  • -L.K. Jha (सांख्यिकी)
  • -क्रॉनिकल मासिक (IR/CA)
  • GS-II-लक्ष्मीकांत (राजव्यवस्था)
  • -क्रॉनिकल मासिक (विज्ञान)

वैकल्पिक विषय: भूगोल

  • (1)सविन्द्र सिंह (भौतिक भूगोल)
  • (2)D.R. खुल्लर

राजीव कुमारः साक्षात्कार हेतु मार्गदर्शन व मॉक इंटरव्यू के अतिरिक्त मैंने कोई कोचिंग नहीं ली थी। जो छात्र तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें कहना चाहूंगा कि सर्वप्रथम वे वैकल्पिक विषय का चयन कर पाठयक्रम तथा विगत वर्षों के प्रश्न को ध्यान में रखते हुए एक बेस तैयार कर लें फिर कोचिंग जॉइन करें। वैसे, बिना कोचिंग के भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःजो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

राजीव कुमारः तैयारी आरंभ करने वाले छात्र को मेरी सलाह है कि वह बिना समय गवाएं वैकल्पिक विषय का चयन कर पाठयक्रम के अनुसार, प्रामाणिक अध्ययन सामग्री को इकट्ठा कर एक सही रणनीति बनाकर तैयारी शुरु कर दे। ग्रामीण पृष्ठभूमि के तथा आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मैं सलाह दूंगा कि वे भी उक्त रणनीति के अनुसार तैयारी करें। आज के समय में स्मार्टफोन सभी के पास उपलब्ध है, अतः उन्हें शहर की ओर जाने की कोई जरूरत नहीं है। वे सभी प्रकार की सूचना अपने निवास स्थान पर भी प्राप्त कर सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलःतैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

राजीव कुमारः मासिक पत्रिका जैसे क्रॉनिकल मेरी तैयारी का महत्वपूर्ण भाग था। इससे न केवल समसामयिकी बल्कि प्रत्येक माह में सामान्य अध्ययन के सभी भागों पर अध्ययन सामग्री छपने के कारण, सामान्य अध्ययन की तैयारी भी आसान हो जाती है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें किसी प्रकार की बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

राजीव कुमारः यह पत्रिका सिविल सेवा के प्रत्येक चरणों की तैयारी में काफी उपयोगी सिद्ध हुई। सामान्य अध्ययन में अच्छे अंक प्राप्त होने के साथ ही भूगोल वैकल्पिक को करेंट से जोड़ने में यह पत्रिका काफी लाभप्रद सिद्ध हुई। क्रॉनिकल टीम को धन्यवाद एवं आभार।

विशेषज्ञ सलाह
कैसे करें तैयारी? कैसे दें साक्षात्कार?
निर्देशकः पतंजलि आईएएस

सिविल सेवा की त्रि-स्तरीय परीक्षा प्रणाली (प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा एवं व्यक्तित्व परीक्षण) में व्यक्तित्व परीक्षण अर्थात् साक्षात्कार का महत्वपूर्ण स्थान है। यद्यपि मुख्य परीक्षा के 1750 अंकों की तुलना में साक्षात्कार 275 अंकों का होता है, परन्तु अंतिम रूप से चयन और वरीयता-सूची में स्थान निर्धारण के क्रम में इसकी निर्णायक भूमिका होती है। उल्लेखनीय है कि यहां अंक-प्राप्ति के स्तर पर बड़ा अंतर दिखायी देता है। कुछ अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में बेहतर नम्बर पाने के बाद भी साक्षात्कार में 30-40 प्रतिशत नम्बर पाकर बाहर हो जाते हैं जबकि मुख्य परीक्षा में कम नम्बर प्राप्त अनेक अभ्यर्थी साक्षात्कार में बेहतरीन अंक अर्जित कर अंतिम रूप से चयनित हो जाते हैं। जो भी अभ्यर्थी IAS/IPS आदि के रूप में चयनित होते हैं उनमें से अधिकांश के ‘इंटरव्यू’ में बेहतरीन अंक होते हैं। स्पष्ट है कि इस स्तर पर समुचित तरीके से किया गया सकारात्मक प्रयास आपकी सफलता में निर्णायक योगदान कर सकता है।

साक्षात्कार या व्यक्तित्व परीक्षण के माध्यम से देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पदों पर आसीन होने वाले उम्मीदवारों की मानसिक सजगता, समीक्षात्मक दृष्टिकोण, स्पष्ट एवं तार्किक अभिव्यक्ति, नेतृत्व क्षमता, संतुलित निर्णय की शक्ति, रुचि की विविधता, बौद्धिक एवं नैतिक ईमानदारी, आस-पास के परिवेश में घटित हो रही घटनाओं के बारे में अभिरुचि एवं दृष्टिकोण इत्यादि के संबंध में जांच की जाती है। यह जांच एवं आकलन विभिन्न क्षेत्रें के अति अनुभवी, वरिष्ठ, निष्पक्ष विशेषज्ञों के द्वारा की जाती है।

साक्षात्कार बोर्ड का उद्देश्य आपके ज्ञान मात्र का परीक्षण करना नहीं होता तथा कुछ प्रश्नों का उत्तर न देना साक्षात्कार के बिगड़ने का परिचायक नहीं है। साथ ही यह भी कि सभी प्रश्नों का उत्तर दे देना ही एक अच्छे साक्षात्कार का प्रतीक नहीं है। यहां यह बात अधिक महत्वपूर्ण होती है कि आप अवधारणात्मक प्रश्नों के संदर्भ में कैसा दृष्टिकोण रखते हैं, प्रश्नों का उत्तर आप किस प्रकार से देते हैं, आपका शारीरिक हाव-भाव (Body Language) कैसा है। जैसे- कुछ अभ्यर्थी किसी प्रश्न का उत्तर न जानने पर सॉरी बोलते वक्त अपराध या ग्लानि की भावना से युक्त हो जाते हैं और यह उनके चेहरे से अभिव्यक्त होने लगता है। दूसरी ओर कुछ अति आत्मविश्वासी उम्मीदवार बेहतरीन प्रश्नों के संदर्भ में बिना किसी विनम्रता के, कठोरता के साथ ‘सॉरी सर’ बोल देते हैं। ये दोनों स्थितियां ठीक नहीं है।

साक्षात्कार की तैयारी के संदर्भ में आप अन्य अभ्यर्थियों, मित्रें, परिवारजनों, अध्यापकों, चयनित प्रशासकों से विभिन्न मुद्दों पर व्यक्तिगत या सामूहिक वाद-विवाद (Group Discussion) कर सकते हैं। इस क्रम में छद्म साक्षात्कार (Mock Interview) भी दें। इस प्रक्रिया के क्रम में आप कभी स्वयं को बोर्ड के सदस्य के रूप में प्रस्तुत करें, तो कभी साक्षात्कार देने वाले उम्मीदवार के रूप में। इससे आप अपने भीतर तेज गति से परिवर्धन कर सकते हैं, अपने आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं।

साक्षात्कार की तैयारी आप तीन भागों में बांटकर कर सकते हैं-

1. बायोडेटा (Bio-data)

2. विषय (Subject)

3. समसामयिकी (Current Affairs-National & International)

1. नाम

  • अपने नाम का अर्थ, नाम से संबंधित कोई महान व्यक्तित्व, उससे समानता और विषमता
  • एक गुण, जो आप उस महान व्यक्तित्व से लेना चाहेंगे।
  • अभ्यर्थी का नाम यदि किसी ऐतिहासिक या धार्मिक महत्व का हो या किसी प्रमुख व्यक्तित्व से संबंधित है, तो फिर उस पर प्रश्न बन सकता है।

2. जन्म तिथि

  • महत्व
  • उस वर्ष यदि कोई विशेष घटना घटी हो, उसकी जानकारी

3. ग्राम

  • प्रमुख समस्याएं
  • प्रमुख विशेषताएं, संभावनाएं
  • आस-पास का चर्चित स्थल/घटना
  • ग्रामीण विकास के प्रमुख कार्यक्रम (केन्द्र + राज्य)
  • सामाजिक-आर्थिक दशाएं, आजीविका के साधन

4- जिला

  • जिले के नामकरण का आधार और उससे संबंधित जानकारी जैसे- सुलतानपुर, संत रविदास नगर, अम्बेडकर नगर, अहमदनगर, इलाहाबाद/प्रयागराज आदि।
  • प्रमुख विशेषताएं, समस्याएं, संभावनाएं व सीमाएं
  • चर्चित घटनाएं, प्रमुख व्यक्तित्व
  • DM बनने पर जिले के लिए कौन-से तीन काम सबसे पहले करेंगे?
  • जिला स्तरीय विकास कार्यक्रम
  • जिले की सामाजिक-आर्थिक स्थिति
  • अपने जिले का एक विकास मॉडल बताएं

5. राज्य

  • प्रमुख विशेषताएं
  • प्रमुख समस्याएं
  • आपके राज्य में क्या संभावनाएं हैं?
  • विस्तार व सीमाएं
  • चर्चित घटना, चर्चित व्यक्तित्व
  • राज्य स्तरीय विवाद (अन्य राज्यों से)
  • आंतरिक विवाद के वर्तमान मुद्दे
  • केन्द्र से संबंध की स्थिति (विवाद, मतभेद)
  • राज्य की सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक स्थिति

6. बायोडेटा

  • IAS क्यों बनना चाहते हैं?
  • आप में ऐसा कौन-सा गुण है कि आपको IAS बना दिया जाए?
  • अपनी तीन कमजोरियां बताएं
  • वरीयता क्रम और उसके निर्धारण का आधार
  • IAS, IPS, IFS, IRS - कार्य एवं भूमिका
  • अपना परिचय दें (1 मिनट में)

7. अन्य पक्ष

  • इस कक्ष का वर्णन करें?
  • यदि आप किसी सरकारी या निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं, तो फिर आपसे आपकी नौकरी, कार्य-क्षेत्र, समस्याएं, उसके निदान के उपाय, व्यक्तिगत अनुभव और उसे छोड़ने के कारण पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

8. गैप

  • एकेडमिक कैरियर (अगर एकेडमिक कैरियर में कोई गैप हो तो उसका कारण क्या है)
  • आपके स्कूल या कॉलेज का Motto क्या है।
  • Switch Over यानी एक क्षेत्र को छोड़कर दूसरे में क्यों आना चाहते हैं (शिक्षा से प्रशासन में)
  • आपने साइंस विषय को छोड़कर आटर्स के विषय को क्यों लिया है?
  • आप इंजीनियर हैं तो प्राइवेट सेक्टर में क्यों नहीं जाना चाहते?
  • शोध-विषय - मेथेडोलॉजी - डेटा कलेक्शन, परिकल्पना
  • उच्च शिक्षा की स्थितिए गठित प्रमुख आयोग और उसकी सिफारिशें (उच्च शिक्षा से संबंधित अभ्यर्थी इस पर ध्यान देंगे)

9. विषय

  • आपने विषय का चयन किस आधार पर किया है?
  • आपने दर्शनशास्त्र/इतिहास/भूगोल/ समाजशास्त्र--- विषय को क्यों चुना?
  • प्रशासन में इसकी क्या उपयोगिता है?

10. हॉबी

  • आपकी हॉबी (Hobby) प्रशासन में किस तरह मददगार होगी?
  • इसको अच्छी तैयारी करें तथा सभी संभावित पक्षों पर सोच लें।
  • Hobby से संबंधित उत्तर केवल तथ्यात्मक होने के बजाय बौद्धिक एवं व्यावहारिक (Intellectual Orientation) होना चाहिए।
  • जैसे यदि आपकी हॉबी Diary writing है तो फिर ऐसे प्रश्न बन सकते हैं कि-
  • आप क्यों Diary writing करते हैं?
  • लाभ एवं नुकसान क्या है?
  • Diary writing हॉबी के रूप में कैसे विकसित हुई?
  • क्या प्रशासन में आने के बाद भी आप इसे जारी रखेंगे?
  • Diary writing का प्रशासन में क्या योगदान होगा?
  • क्या आपने किसी की Diary पढ़ी है (हिटलर, जयप्रकाश नारायण आदि)?
  • Interview देने के बाद आप अपनी Diary में क्या लिखेंगे?
  • पिछली बार आपने Diary कब लिखी थी और क्या लिखा था?
  • क्या आप अपनी Diary हमें पढ़ने के लिए देंगे?
  • आज मोबाइल/आईपैड आदि का जमाना है ऐसे में Diary लिखना क्या अप्रासंगिक हो गया है?

11. जरूर पढे़ं

  • कुछ प्रमुख अखबारों के संपादकीय
  • मनोरमा ईयर बुक

12. आपके रोल-मॉडल कौन हैं?

13. आपके जीवन का दर्शन क्या है?

14. कोई अच्छा काम जो आपने किया है?

15. इंटरव्यू के दिन का महत्व (यदि कोई विशेष दिवस हो तो उससे संबंधित जानकारी)

  • क्या आपने आज का न्यूज पेपर पढ़ा है? 'आज के मुख्य समाचार क्या-क्या हैं?'

उत्तर के दो तरीके-

  • मुख्य पृष्ठ के समाचार को बताना
  • राजनैतिक समाचार, सामाजिक पक्ष, खेल पृष्ठ, राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित, अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित घटना।

16. कल्पनात्मक प्रश्न

  • अगर आपको CM या PM बना दिया जाए तो कौन-से तीन काम पहले करेंगे?
  • एक तरफ कुआं है, और दूसरी तरफ खाई है, किसमें गिरना पसंद करेंगे?
  • गाय और भैंस में क्या अंतर है?
  • यदि आप किसी जिले के DM हैं और आपकी कार को प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने घेर लिया है तो ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे?
  • अगर आपको भारत का प्रधानमंत्री / कृषि मंत्री / वित्त मंत्री बना दिया जाए तो फिर आप महंगाई रोकने के लिये/बेरोजगारी दूर करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाएंगे।

17. इन शब्दों को कम बोलें या न बोलें

  • ‘मतलब कि’, 'Actually', 'Basically', 'you know', 'Carry on', ‘जैसा कि मैने पहले भी कहा है', ‘देखिए' आदि

18. क्या करें

  • बोर्ड के सदस्यों के समक्ष नम्र तथा सकारात्मक रुख (Positive Temperament) अपनाएं। यदि आप बोर्ड के किसी सदस्य के विचार से असहमत हैं तो आप अपनी असहमति को विनम्रता के साथ प्रस्तुत करें। सीधे विरोध करने से बचें।
  • कई बार बोर्ड के किसी सदस्य द्वारा अभ्यर्थी को कुछ Hint दिया जाता है, ऐसी स्थिति में उस सदस्य को धन्यवाद दें।
  • तथ्यात्मक प्रश्नों के उत्तर में प्रश्न कर्त्ता से नजरें अवश्य मिलाए रखनी चाहिए। यदि प्रश्न का उत्तर लंबा हो, तो फिर आप अन्य सदस्यों की तरफ एक नजर डाल सकते हैं।
  • यदि आपको किसी प्रश्न के उत्तर की पूर्ण जानकारी नहीं है या द्वं की स्थिति में हैं तो फिर वैसी स्थिति में आप Hint देने के लिये निवेदन कर सकते हैं, Guess करने की अनुमति मांग सकते हैं, या फिर आप जितना जानते हैं, उतना सीधे-सीधे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं और अपनी अपूर्णता के लिये बोर्ड से क्षमा मांग सकते हैं।
  • अगर आपका इंटरव्यू ‘तनावपूर्ण’ हो तो फिर वैसी स्थिति में आप अंतिम समय तक धैर्य को बनाए रखें। अगर आप अंतिम समय तक Positively बोर्ड के समक्ष विनयशीलता के साथ टिके रह जाते हैं, तो फिर वैसी स्थिति में बेहतरीन नंबर पाने की संभावना प्रबल हो जाती है, भले ही आपने कई प्रश्नों का जवाब पूरा न दिया हो या Sorry बोला हो।
  • तथ्यात्मक प्रश्नों का उत्तर तुरन्त दें। परन्तु यदि कोई अवधारणात्मक प्रश्न हो या विवादास्पद मुद्दे से संबंधित कोई प्रश्न हो, तो फिर वहां थोड़ा Pause अवश्य लें। इससे उत्तर की Framing करने में आसानी होती है।
  • सभी सदस्यों को समान रूप से सम्मान दें एवं विभिन्न सदस्यों को उत्तर देने के क्रम में समान रूप से दिलचस्पी दिखाएं। केवल अध्यक्ष के प्रति विशेष रूप से लगाव न दिखाएं। इसका नकारात्मक प्रभाव हो सकता है।
  • साक्षात्कार में अक्सर यह भी प्रश्न पूछा जाता है कि ‘आप अपनी कमजोरियों को बताएं'। ऐसी स्थिति में आप उन क्षेत्रें को बताएं जिसमें आप सुधार चाहते हैं तथा जिसके लिये आप प्रयासरत भी हैं।

19. क्या न करें

  • कभी भी वर्तमान व्यवस्था या लोकतंत्र पर सीधी उंगली न उठाएं। जब तक बोर्ड के सदस्य द्वारा पूछा गया प्रश्न पूरा न हो, बीच में न बोलें, टोका-टोकी न करें। प्रश्न को पूरा होने दें। यदि आप प्रश्न को न समझ पाएं तो एक बार आप प्रश्न को दोहराने के लिये सदस्य से निवेदन कर सकते हैं। प्रश्न के उत्तर की जानकारी होने पर मुस्कुराना प्रारंभ न कर दें।
  • यदि आप किसी प्रश्न का उत्तर नहीं जानते हैं तो फिर आप ईमानदारी का परिचय देते हुए स्पष्ट बता दें। घुमा-फिराकर जवाब देने का प्रयास न करें। बोर्ड को गलत या गड़बड़ उत्तर देकर भ्रमित करने का प्रयास न करें।
  • राजनीतिक विवादों में न उलझें। किसी जाति, समुदाय, धर्म या दल विशेष के प्रति पक्षतापूर्ण विचार अभिव्यक्त न करें।
  • कभी भी Chairman या सदस्यों के साथ कुतर्क न करें। अगर आप बोर्ड के किसी सदस्य की बात से असहमत हैं तो आप अपनी असहमति को विनम्रता के साथ प्रस्तुत करें।
  • चेहरे, बाल, शर्ट के बटन पर अपने हाथों को न फिराएं। टाई को बार-बार ठीक करने का प्रयास न करें।
  • साक्षात्कार बोर्ड की दया या सहानुभूति हासिल करने के लिये जज़्बाती न बनें या अपनी गरीबी या ग्रामीण पृष्ठभूमि आदि को बताकर सहानुभूति लेने का प्रयास न करें।
  • प्रश्नों का उत्तर न जानने पर चेहरे पर ग्लानि का भाव, हताशा, निराशा या अपराधबोध का भाव न झलकने दें। आप विनम्रता के साथ Sorry बोल सकते हैं।
  • कुर्सी पर बैठने के बाद आप अपनी स्थिति को बार-बार न बदलें। इससे बेचैनी, शिथिलता एवं आत्मविश्वास की कमी का पता चलता है।

20. साक्षात्कार के बाद

  • यदि Chairman आपसे हाथ मिलाने के लिये अपना हाथ बढ़ाएं तो आप हाथ मिला सकते हैं। आप अपनी तरफ से हाथ न बढ़ाएं।
  • Chairman द्वारा अनुमति दिये जाने पर आप सहज रूप से उठें और मन्द मुस्कान के साथ सभी को धन्यवाद कहकर बाहर आएं।
  • कक्ष से बाहर जाते वक्त पीछे मुड़कर न देखें।
  • अपना शिष्टाचार कक्ष से बाहर जाने तक बनाए रखें। कोई विशेष शारीरिक गतिविधि न करें।
  • संदेशः मन, वचन और कर्म के साथ आत्मविश्वास से युक्त होकर किया गया प्रयास कभी निरर्थक नहीं जाता। ईश्वर भी अच्छे कर्म का अच्छा फल देने के लिये बाध्य है। अतः आप अपना ध्यान नंबर पर न लगाकर अपने कर्म पर केन्द्रित करें। प्रयास करें कि साक्षात्कार में कोई गलती न हो। कोई ऐसी चीज न बोलें जो बोर्ड के सदस्यों को नागवार लगे। आप यह ध्यान रखें कि साक्षात्कार में अंतिम समय तक सकारात्मक दृष्टिकोण से युक्त होकर (Positive Bent of Mind) रहना है।

आप सफलता को शिरोधार्य करें -

इस मंगलकामना के साथ।

'PATANJALI IAS CLASSES'

दर्शनशास्त्र एक वैकल्पिक विषय के रूप में

दर्शनशास्त्र ही क्यों चुनें?

  • इसका पाठ्यक्रम अपेक्षाकृत संक्षिप्त है, अतः इसका रिवीजन आसान है|
  • यह विषय समसामयिक घटनाओं व मुद्दों पर अपेक्षाकृत कम निर्भर है|
  • अन्य विषयों की तुलना में इसे कम समय (लगभग डेढ़ से दो माह) में तैयार किया जा सकता है|
  • पाठ्यक्रम का विभाजन बहुत सरल है|
  • विभिन्न दार्शनिकों केकथनोंका अनुसरण करना है, अतः अपनी कल्पना शक्ति के इस्तेमाल से बचा जा सकताहै|
  • समय-समय पर कई उम्मीदवार इसे चुनकर अच्छी रैंक हासिल कर चुके हैं जैसे- अथर आमिर खान (2015, सेकंड रैंक)
  • प्रश्न की मांग के अनुसार यदि उत्तर खूबसूरती से प्रस्तुत किया जाए तो यह अधिक अंकदायी विषय बन जाता है|

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक विषय और भ्रांतियां

दर्शनशास्त्र उबाऊ (बोरिंग) विषय है

यह मात्र एक कोरी कल्पना है क्योंकि यदिआपको ऐसा लगता है तो इसका अर्थ है कि आपने विषय को सिर्फ पढ़ना (रीडिंग) शुरू किया है अध्ययन (स्टडी) करना नहीं| एक बार विषयवस्तु, उद्देश्य तथा दार्शनिक के मन को समझ लेने के बाद दर्शनशास्त्र से रुचिपूर्ण विषय शायद ही कोई होगा।

दर्शनशास्त्र विषय चलन (ट्रेंड) से बाहर है|

आपको ऐसा इसलिए लग सकता है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में चयनित अभ्यर्थियों में दर्शनशास्त्र वैकल्पिक विषय रखने वाले अभ्यर्थी बहुत कम देखने को मिले हैं; परंतु इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि यह चलन से बाहर है बल्कि तथ्य यह है कि अधिकतर उम्मीदवारों को दर्शनशास्त्र के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है, अतः अपर्याप्त जानकारी तथा अन्य विषयोंके चयनकी बढ़तीआवृत्तिने दर्शनशास्त्र से चयन को हाल ही के वर्षों में प्रभावित किया है।

दर्शनशास्त्र विषय में अधिक अंक नहीं मिलते

यह बात बिल्कुल गलत है, क्योंकि पूर्व चयनित कई अभ्यर्थियों ने इस विषय के साथ अच्छे अंक अर्जित किए हैं ; जैसे- आनंदू सुरेश गोविंद ने वैकल्पिक विषय में कुल 319 अंक प्राप्त किए थे जो अपेक्षा से कहीं अधिक अच्छा स्कोर है|

यहां फिर यह बात दोहराना चाहूंगा कि यदि प्रश्न की मांग के अनुसार सुव्यवस्थित ढंग से उत्तर प्रस्तुत किया जाए तो यह विषय अधिक अंक अर्जित करने की क्षमता रखता है।

दर्शनशास्त्र अंग्रेजी माध्यम वाले अभ्यर्थियों हेतु सही विषय है

यह भी एक गलत भ्रांति है क्योंकि कोई भी विषय भाषा के अनुसार अंक प्रदान नहीं करता| आपकी कोई भी भाषा हो; विषय सामग्री की गुणवत्ता, कम शब्दों में अधिक बात कहना, दार्शनिकों के विचारों का प्रयोग व एक प्रवाहमय प्रस्तुतीकरण ही आपको अधिक अंक अर्जित करवाती है।

दर्शनशास्त्र प्राचीन इतिहास और एथिक्स जैसा विषय है

दर्शनशास्त्र में दार्शनिकों जैसे गौतम बुद्ध, महावीर जैन तथा षड्दर्शन के प्रवर्तकों आदि के शामिल होने के कारण इसे प्राचीन भारतीय इतिहास से संबद्ध कर दिया जाता है, परंतु इन दोनों विषयों में कुछ मौलिक अंतर भी है, जैसे-जहां दर्शनशास्त्र में इन दार्शनिकों की मीमांसा पर जोर होता है वहीं इतिहास में इनसे संबंधित सभी ऐतिहासिक पहलुओं को शामिल किया जाता है| इसी प्रकार एथिक्स की विषयवस्तु दर्शनशास्त्र के अंग ‘नीति मीमांसा’ का एक भाग है।

अंततः यह बात सत्य प्रतीतहोती है कि दर्शनशास्त्र में कुछ बिंदुओं पर इतिहास व एथिक्स विषय की झलक मिलती है।

दर्शनशास्त्र का मुख्य परीक्षा के अन्य प्रश्न-पत्रों में योगदान

दर्शनशास्त्र न सिर्फ वैकल्पिक विषय के रूप में बल्कि मुख्य परीक्षा के अन्य प्रश्न पत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे:-

  • सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1 में इतिहास तथा भारतीय समाज सेक्शन के टॉपिक दर्शनशास्त्र के प्रश्न-पत्र-2 (सामाजिक-राजनीतिक दर्शन) से प्रभावित हैं,
  • इसी प्रकार सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र-2 में संविधान का दर्शन तथा कल्याणकारी संकल्पना पर दर्शनशास्त्र का प्रभाव है,
  • वहीं सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र-3 में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति कुछ इस प्रकार की रहती है कि तकनीकी पर्यावरण आदि विषयों के उत्तर देते समय दर्शनशास्त्र से इनपुट लिए जा सकते हैं।
  • सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र-4 में नीतिशास्त्र स्वयं दर्शनशास्त्र की नीति मीमांसा पर आधारित है।

हाल ही में हुई 2021 की मुख्य परीक्षा के निबंध प्रश्न-पत्र पर गौर करें तो पाते हैं कि सभी 8 निबंधों के विषय सीधे दर्शनशास्त्र से लिए गए है जैसे:-

  1. आत्मसंधान की प्रक्रिया अब तकनीकी रूप से बाहरी स्त्रोतों को सौंप दी गई है।
  2. आपकी मेरे बारे में धारणा आपकी सोच दर्शाती है, आपके प्रति मेरी प्रतिक्रिया मेरा संस्कार है।
  3. इच्छा रहित होने का दर्शन काल्पनिक आदर्श (यूटोपिया) है, जबकि भौतिकता माया है।
  4. सत ही यथार्थ है और यथार्थ ही सत है।
  5. पालना झुलाने वाले हाथों में ही संसार की बागडोर होती है।
  6. शोध क्या है, ज्ञान के साथ एक अजनबी मुलाकात।
  7. इतिहास स्वयं को दोहराता है पहली बार एक त्रासदी के रूप में दूसरी बार एक प्रहसन के रूप में।
  8. सर्वोत्तम कार्य प्रणाली से बेहतर कार्य प्रणालियां भी होती हैं।

उक्त संदर्भित बातों से यदि गणितीय निष्कर्ष निकाला जाए तो दर्शनशास्त्र, अंक अर्जन की दृष्टि से महत्वपूर्ण वैकल्पिक विषय इस प्रकार साबित होता है।

वैकल्पिक विषय प्रश्न पत्र-1

250 अंक

वैकल्पिक विषय प्रश्न पत्र-2

250 अंक

निबंध

250 अंक

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-1, 2, 3 (संयुक्त रूप से)

150 अंक (औसतन)

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र-4

150 अंक (औसतन)

स्पष्ट है कि सही रणनीति द्वारा दर्शनशास्त्र वैकल्पिक विषय के साथ मुख्य परीक्षा में शामिल होने से लगभग 1050 अंक का वेटेज मिल सकता है।

यूपीएससी की अपेक्षाएं

वैकल्पिक विषय के संदर्भ में यूपीएससी यह मानकर चलता है कि विषय की समझ अभ्यर्थी में स्नातक/स्नातकोत्तर स्तर की है, अतः प्रश्नों के उत्तर देते समय आपको यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि उत्तर सारगर्भितएवं सटीक हो तथा विशिष्ट प्रकृति के हो, ना की सामान्य प्रकृति के (जैसे सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों में होते हैं)|

  • यहां भाषा की कोई बाध्यता नहीं है, जिस भी भाषा में आप सहज महसूस करते हैं तथा उक्त अपेक्षाओं को पूर्ण कर सकते हैं उसी भाषा का चयन करना चाहिए।

विषय तैयार करने में आने वाली चुनौतियां व समाधान

दर्शनशास्त्र आपके स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर पर विषय नहीं रहा है अर्थात यह आपके लिए नया है|

  • समाधान: आप पहले विषय के पाठ्यक्रम व पूर्व वर्षो में पूछे गए प्रश्नों का अध्ययन करें| फिर पाठ्यक्रम को सुविधा अनुसार बांटकर पहले उन टॉपिक्स को तैयार करें जिनसे प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

नोट्स बनाएं या सीधे प्रिंटेड मैटेरियल/बुक से पढ़ें?

  • समाधान: यह पूर्णतः आपकी पसंद पर निर्भर करता है परंतु सलाह यही है कि आप उपलब्ध समय अनुसार शॉर्ट नोट्स जरूर बनाएं।

कितनी बार पढ़ें?

  • समाधान: संपूर्ण पाठ्यक्रम को कम से कम 3 बार तो गहराई से पढ़ना चाहिए तथा 2 बार रिवीजन के तौर पर। इस प्रकार कुल 5 बार पढ़ा जा सकता है|

उत्तर लेखन अभ्यास कब करें?

  • समाधान: कम से कम 4 माह तो उत्तर लेखन अभ्यास करना ही चाहिए। आप अपनी सुविधा अनुसार 3 माह लगातार प्रारंभिक परीक्षा के पहले तथा 1 माह लगातार प्रारंभिक परीक्षा के पश्चात यह लेखन अभ्यास कर सकते हैं|
हिंदी माध्यम में कैसे हों सफ़ल? भाग-3
Civil Services Chronicle

उत्कृष्ट निबंध कैसे लिखें

आगामी मुख्य परीक्षा को ध्यान में रखते हुए हम इस अंक में प्राथमिकता के अनुरूप निबंध विषय के उत्तर लेखन के संबंध में विशेषज्ञ सलाह प्रस्तुत कर रहे हैं। सामान्य अध्ययन के प्रश्न-पत्र 1, 2 एवं 3 की तैयारी के लिए आवश्यक रणनीति की चर्चा पत्रिका के आगामी अंकों में प्रकाशित होने वाले विशेषज्ञ सलाह में की जाएगी।

संपादकीय मंडल

निबंध लेखन की वह महत्वपूर्ण विधा है जिसके द्वारा किसी भी विषय में लेखक के सामान्य ज्ञान, तार्किक विश्लेषण की योग्यता, सूक्ष्म निरीक्षण कला, जागरूकता, भाषा एवं अभिव्यक्ति की क्षमता के साथ-साथ उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व का मूल्यांकन किया जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में निबंध एक महत्वपूर्ण प्रश्न-पत्र के रूप में शामिल है। चूंकि निबंध में रटने की कला का कभी भी मूल्यांकन नहीं होता तथा मौलिकता पर ही अच्छे नंबर निर्भर करते हैं, अतः अभ्यर्थी को मौलिक एवं सटीक निबंध लिखने का अभ्यास करना चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में निबंध का प्रश्न-पत्र 250 अंकों का होता है। इस प्रश्न-पत्र में अभ्यर्थी को 50-60 से लेकर 160-170 अंक तक आते हैं, अतएव अभ्यर्थी के अंतिम चयन में निबंध में प्राप्त अंकों का निर्धारक योगदान माना जा सकता है।

निबंध क्या है?

वस्तुतः निबंध साहित्य का वह स्वरूप है, जिसमें किसी विषय का विचारपूर्ण एवं रोचक पद्धति से सुसम्बद्ध एवं तर्कपूर्ण प्रतिपादन किया जाता है। निबंध जहां मन के भावों की स्वच्छंद उड़ान है, वहीं यह किसी विषय या वस्तु पर उसके स्वरूप, प्रकृति, गुण-दोष आदि की दृष्टि से लेखन की गद्यात्मक अभिव्यक्ति भी है। चूंकि निबंध प्रायः अवधारणात्मक होते हैं, अतः उसमें बुद्धि की विश्लेषण क्षमता, समीक्षा शक्ति एवं अभिव्यक्ति सामर्थ्य की आवश्यकता होती है। उत्कृष्ट एवं प्रभावशाली निबंध की निम्नलिखित विशेषताएं हो सकती हैं-

  1. निबंध का एक निश्चित लक्ष्य होना चाहिए। साथ ही एक विचार एवं एक दृष्टिकोण के आलोक में लिखा जाना चाहिए।
  2. निबंध की आत्म-अभिव्यक्ति ही निबंध की प्रमुख विशेषता है। इस तरह निबंध पूर्वाग्रह से मुक्त होना चाहिए।
  3. निबंध में विचारों को निश्चित श्रेणी में रखा जाना चाहिए अर्थात् एकसूत्रता एवं क्रमबद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही इस क्रमबद्धता का अंत निष्कर्ष के साथ होना चाहिए।
  4. निबंध में लिखी गई बातों को साफ तौर पर लिखा जाना चाहिए अर्थात दृष्टिकोण स्पष्ट हो। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि निबंध के प्रत्येक विचार चिंतन हर एक भाव एवं आवेग की अभिव्यक्ति करते हों।
  5. निबंध में विचारों से यह स्पष्ट झलकना चाहिए कि उसमें मौलिकता है तथा उसमें आप के अनुभव शामिल हैं। किसी के विचारों या आदर्शों का अंधानुकरण निबंध में प्रभावहीनता भी पैदा कर सकता है।

निबंध के विषय

निबंध के अनेक विषय हो सकते हैं, यथा-राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, भावात्मक, काल्पनिक, वैज्ञानिक आदि। किन्तु प्रतियोगी परीक्षाओं विशेषकर संघ एवं राज्य लोक सेवा आयोगों की मुख्य परीक्षा में पूछे जा रहे ज्यादातर निबंध निम्नलिखित चार श्रेणियों के होते हैंः

  1. वर्णनात्मक निबंधः इस श्रेणी के अंतर्गत पूछे गए निबंध का संबंध विचारों, भावों तथा लेखक की प्रतिक्रियाओं से होता है तथा वह अपनी अनुभूति के आधार पर निबंध लिखता है।
  2. कथनात्मक निबंधः इस तरह का निबंध किसी घटना या घटनाओं कीशृंखला का कथनात्मक प्रस्तुतीकरण होता है। इसमें किसी घटना विशेष को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करते हुए अंत में अपना निष्कर्ष देने की अपेक्षा की जाती है।
  3. विवेचनात्मक या उद्घाटनात्मक निबंधः इस प्रकार के निबंधों की प्रमुख विशेषता यह होती है कि किसी विषय के संदर्भ में एक पूर्ण कथन द्वारा इसके समस्त पहलुओं का वर्णन करना होता है।
  4. तार्किक निबंधः इस प्रकार के निबंध का संबंध लोगों को तर्क से प्रभावित करने की योग्यता से जुड़ा होता है। इसलिए लेखक की सोच में गंभीरता तथा तर्क देने की मजबूत शैली ही इस प्रकार के निबंधों में चार चांद लगाती है। इस प्रकार के निबंध को लिखने में रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

निबंध कैसे लिखें?

किसी विषय पर विस्तार से सोचना और उसे विशेष रूप देना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। दिमाग के सोचने की गति तेज है लेकिन लिखने की गति धीमी। दिमाग को एक विषय के इर्द-गिर्द बांधे रखना और सिलसिलेवार सोचने के लिए केंद्रित करना कठिन काम है। इसी अनुशासित किस्म के बंधे हुए रचना कर्म को निबंध कहा जाता है। इसके लिए मूलतः दिमाग के ऐसे प्रशिक्षण की जरूरत होती है कि वह एक मुद्दे पर टिककर विचार करे और उसे सिलसिलेवार अभिव्यक्त करे।

1.निबंध की सामग्रीः निबंध में क्या-क्या होना चाहिए, निबंध में किस-किस सामग्री का समावेश होना चाहिए यह तो निबंध का विषय ही तय करता है, किंतु फिर भी लगभग सभी तरह के निबंधों में कुछ खास सामग्री अवश्य होती है, जिसमें प्रमुख हैं- तथ्य, तर्क, कल्पना और अभिव्यक्ति कौशल। इन पर संक्षेप में विचार आवश्यक है।

क) तथ्यः हर निबंध में उस विषय से संबंधित कुछ तथ्य, सूचनाएं, आंकड़े आदि होने चाहिए। आर्थिक-वाणिज्यिक, वैज्ञानिक विषयों से संबंधित निबंधों में तो आंकड़ों की विशेष आवश्यकता होती है। ये तथ्य प्रामाणिक और यथासंभव अद्यतन होने चाहिए और हो सके तो उन स्रोतों का उल्लेख भी होना चाहिए जहां से ये तथ्य प्राप्त हुए हैं। तथ्यों के संबंध में मनगढ़ंत कल्पना की उड़ान से बचना चाहिए। किंतु यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अधिक तथ्यों को भरने से मौलिक विचार दब जाते हैं तथा भाषा-शैली सपाट हो जाती है।

ख) विचारः निबंध में विचार की अभिव्यक्ति का विशेष महत्व है। विचारशील निबंधों में तो विचार ही मेरुदंड हैं। विचार न केवल सटीक और प्रासंगिक होने चाहिए, बल्कि वे एक के बाद दूसरे को पुष्ट करने वाले भी होने चाहिए। निबंध में मुख्यतः विचारशीलता की ही परीक्षा होती है। इसलिए निबंध में जो भी सामग्री प्रस्तुत की जाए वह वैचारिक दृष्टि से बहुत ही उत्कृष्ट होनी चाहिए। निबंध की समाप्ति एक वैचारिक परिणति के साथ होनी चाहिए। तथ्यों का प्रस्तुतीकरण एवं विशेष रूप से उनका विश्लेषण वैचारिकता पर आधारित होना चाहिए।

ग) कल्पनाः तथ्य एवं तर्क से किसी निबंध की नींव भरी जा सकती है, किन्तु उसकी सजावट विचारों की मौलिकता द्वारा होती है जो लेखक की कल्पना के द्वारा ही संभव है। एक भवन में जो महत्व सजावट का है, वही निबंध में कल्पना का है। बहुत से निबंध तो कल्पना केन्द्रित ही होते हैं।

  • कल्पनाशीलता को न तो पुस्तकों से प्राप्त किया जा सकता है और न इसे तुरंत विकसित ही किया जा सकता है, किन्तु नए ढंग से सोचते रहने से तथा जो जैसा है उससे भिन्न वह कैसा हो सकता है, अर्थात विकल्पों पर सोचते रहने से कल्पनाशीलता विकसित होती है। कल्पना यद्यपि विचारों की मौलिक उड़ान होती है, किन्तु उसकी डोर तथ्यों और तर्कों के हाथ में होती है। निराधार कल्पना का कोई महत्व नहीं है।
  • कल्पना के अपने वैकल्पिक तथ्य एवं तर्क होने चाहिए ताकि वे वास्तविक तथ्यों एवं तर्कों से सामंजस्य बिठाए रखे। किसी भी समस्या के समाधान जुटाने या निबंध में एक नई किस्म की दुनिया रचने में वह निरर्थक न लगे।

घ) अभिव्यक्ति कौशलः तथ्य, विचार और कल्पना को भाषा के माध्यम से व्यक्त करना होता है। यह भी कह सकते हैं कि भाषा के जरिए ही किसी व्यक्ति के तथ्य, विचार और कल्पना से परिचित हुआ जा सकता है। अतः निबंध में भाषा अपने-आप में एक सामग्री है। भाषा में निबंधकार का व्यक्तित्व सन्निहित होता है। अतः निबंध लेखन में भाषा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।

  • भाषा मूल रूप से एक व्यवहार है, वह व्यक्ति की चेतना में निरंतर विकसित होती है। उसको तथ्यों की तरह कुछ समय में ही विकसित नहीं किया जा सकता है। अतः व्यावहारिक होने के नाते भाषा का विकास उसके निरंतर प्रयोग करते रहने से ही होता है।

निबंध में अच्छे अंक कैसे?

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में निबंध एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में शामिल है। इस पत्र में अच्छे अंक प्राप्त कर आसानी से प्रतियोगी अंतिम चयन में उच्च स्थान प्राप्त कर सकते हैं। जैसा कि पहले उल्लेख किया जा चुका है, इस पत्र में अभ्यर्थियों को 50-60 से लेकर 160-170 तक अंक प्राप्त होते हैं। जाहिर है ऐसे में जरा सी चूक न सिर्फ आपको 115-120 अंकों से वंचित कर देगी, बल्कि अंतिम चयन पर भी प्रश्न चिह्न लगा देगी। न्यूनतम एवं अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले प्रतियोगियों के लेखन में जो अंतर होता है, अगर आपने इस अंतर की पहचान कर ली तो यकीन मानिए आप इस प्रश्न-पत्र में काफी अच्छे अंक प्राप्त करेंगे।

आईएएस मुख्य परीक्षा में उम्मीदवारों को तीन घंटे की समय सीमा में किसी एक निर्दिष्ट विषय पर निबंध लिखना होता है। विषयों के संबंध में विकल्प दिया जाता है। उम्मीदवारों से यह अपेक्षा की जाती है कि वो अपने विचारों को क्रमबद्ध करते हुए निबंध के विषय से निकटता बनाए रखें और अपनी बात संक्षेप में लिखें। प्रभावशाली एवं सटीक अभिव्यक्ति को विशेष वरीयता दी जाती है।

संघ लोक सेवा आयोग द्वारा निबंध प्रश्न-पत्र में उम्मीदवार की विषय वस्तु पर पकड़, चुने हुई विषय वस्तु के साथ उसकी प्रासंगिकता, रचनात्मक तरीके से सोचने की उसकी योग्यता और विचारों को संक्षेप में युक्तिसंगत एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता की जांच की जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए निबंध में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए निम्न बातों पर अमल करना चाहिए।

  • विषय का चयनः सर्वप्रथम निबंध में विषय चयन पर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। इस संबंध में पहली सावधानी यही होनी चाहिए कि प्रश्न-पत्र में दिए हुए विषयों में जो भी विषय आपको पहली नजर में प्रिय लगे तथा जिस पर आप ठीक ढंग से अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हों, उसी विषय का चयन करें। उस विषय को चुनें, जिसके बारे में पर्याप्त तथ्य एवं तर्क हों और सबसे बड़ी बात जिसमें अपनी भाषायी सामर्थ्य दिखाने का पर्याप्त अवसर हो।
  • विषय के प्रारूप पर विचारः विषय चुनने के बाद उसकी भूमिका से उपसंहार तक के प्रारूप पर विचार करें। विचार करने में जल्दी न करें, पर्याप्त समय दें। विचार करते समय बिंदुओं को लिखते चलें। फिर उन बिन्दुओं के क्रम को अच्छी तरह देख लें। यह कार्य रफ में करें। इसके लिए पर्याप्त समय लेकर चलें; प्रक्रिया का यह चरण बहुत आवश्यक है।
  • निबंध लेखनः इसके बाद बिंदुवार निबंध लेखन आरम्भ करें। न तो शुरू में आधार बिन्दु लिखें और न ही बिन्दुओं के शीर्षक दें। हां, महत्वपूर्ण तथ्यों एवं विचारों वाले शब्दों तथा वाक्यों को रेखांकित (Underline) किया जा सकता है। अंत में लिखे हुए निबंध को गौर से पढ़ें तथा वर्तनी, शब्दों, तथ्यों, तर्कों, क्रमिकता आदि की दृष्टि से जहां जरूरी हो, संशोधन करें।
  • निबंध वही लिखें जिस पर आपकी पकड़ सबसे अच्छी हो। कई प्रतियोगी उस विषय पर निबंध लिखने का प्रयत्न करते हैं, जिस पर प्रायः कोई नहीं लिखता। यह एकदम गलत दृष्टिकोण है। हमेशा ध्यान रखें कि आपको अंक उत्तर पर मिलते हैं, प्रश्न पर नहीं।
  • कुछ विषयों पर विविध स्रोतों से सामग्री एकत्र करें, पढ़ें और उसका विश्लेषण करें।
  • विषय से न भटकें। अगर भूलवश भटकाव हो भी जाए तो उस गिलहरी की भांति वापस लौट जाएं, जो पेड़ के निचले हिस्से से चढ़कर पेड़ की पत्ती-पत्ती तक घूमकर पुनः वापस आ जाती है।
  • निबंध में प्रभावोत्पादक शुरुआत व सारगर्भित निष्कर्ष आधारस्तंभ की भूमिका निभाते हैं। अतः इसका विशेष ध्यान रखें।
  • निबंध सरल, स्पष्ट, विशिष्ट तथा सुंदर शैली में होना चाहिए। विचारों को यथासंभव मौलिक तथा ‘टू द पॉइंट’ रखें।

ऐसा विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि उपर्युक्त बिंदुओं को ध्यान में रखकर प्रतियोगी, निबंध में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं।

सामान्य प्रश्न ,ट्रिप्स और ट्रिक
   सफलता के लिए आखिर सही रणनीति क्या होनी चाहिए?
   क्या असफलता के लिए गलत रणनीति जिम्मेवार है?
   रैंक व अंतिम चयन का निर्धारण कैसे होता है?
   साक्षात्कार से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा करें?
   वैकल्पिक विषय के चयन के आधार क्या हैं?
   अंतिम रूप से चयन में सामान्य अध्ययन ज्यादा महत्वपूर्ण है या वैकल्पिक विषय?
   मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय कौन-कौन से हैं?
   मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम क्या है?
   मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पाठ्यक्रम को विस्तार से समझाएं ?
   प्रारंभिक परीक्षा की रूपरेखा क्या हैं?
Top UPSC Faculty
Anil Keshri

Anil Keshri


Discription

Faculty of Geography

About Faculty

ANIL KESHRI, is a well know Author and Faculty of Geography. He has experience of two decades of teaching in UPSC CSE. Under his guidance more than thousands got selections in UPSC and different PCS examination. He is also a true academician and due to his interest in ...

पुस्तकें

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में सहायक, क्रॉनिकल आईएएस की पुस्तकों का संग्रह। क्रॉनिकल आईएएस के पुस्तकों के संग्रह में आईएएस परीक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों के लिए पिछले कई वर्षों के मॉडल प्रश्न पत्र एवं वैकल्पिक विषयों के संदर्भ में उपयुक्त पुस्तकें, नोट्स इत्यादि के साथ अन्य बहुत कुछ ऐसा उपलब्ध है जो प्रारम्भिक परीक्षा के साथ ही मुख्य परीक्षा के लिए भी सहायक है। सभी पुस्तकें हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में उपलब्ध हैं तथा सभी पुस्तकें आईएएस परीक्षा के वर्तमान प्रारुप के अनुसार उत्परिवर्तित(update) की हुई हैं।
All the books are updated to the current format of IAS examination.

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सामाजिक-आर्थिक मुद्दे 2022

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Socio-Economic Issues 2022

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General Studies Geography India & World 2022

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पत्रिकाएं

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Civil Services Chronicle July 2022

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सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल जुलाई 2022

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समसामयिकी क्रॉनिकल जुलाई 2022

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Civil Services Chronicle June 2022

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सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल जून 2022

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समसामयिकी क्रॉनिकल जून 2022

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Civil Services Chronicle May 2022

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सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मई 2022

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समसामयिकी क्रॉनिकल मई 2022

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Civil Services Chronicle April 2022

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नई पुस्तकें
सामाजिक-आर्थिक मुद्दे 2022 Socio-Economic Issues 2022 16 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र इतिहास (प्रश्नोत्तर रूप में) 2022 16 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र समाजशास्त्र (प्रश्नोत्तर रूप में) 2022 17 Years Topic-Wise Solution Of Previous Papers Public Administration IAS Mains Q & A 2022 16 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र दर्शनशास्त्र (प्रश्नोत्तर रूप में) 2022 22 वर्ष सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा का हल प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन (प्रश्नोत्तर रूप में) 2022 General Studies Geography India & World 2022 16 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र लोक प्रशासन (प्रश्नोत्तर रूप में) 2022 16 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध (प्रश्नोत्तर रूप में) 2022
आईएएस हेल्पलाइन
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Uttar Pradesh Public Service Commission (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग), 2021

Bihar Public Service Commission (बिहार लोक सेवा आयोग), 2021

UPSC INDIAN FOREST SERVICE EXAMINATION, 2021

UPSC CIVIL SERVICES EXAMINATION 2021

JHARKHAND PUBLIC SERVICE COMMISSION (JPSC)

JPSC Pre 2021

Combined Civil Services
( pre )Examination-2021

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