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सामयिक प्रश्न

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 8 अक्टूबर, 2021 को राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा और पोषण में प्रभावी योगदान देने के लिए भारतीय चावल और काबुली चने (Chickpea) की आनुवंशिक किस्में जारी कीं। इन आनुवंशिक किस्मों को किसके द्वारा विकसित किया गया है?

A
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
B
राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान
C
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना
D
जी बी पंत कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर

Prelims IAS Books Hindi 2021
Prelims PCS Books Hindi 2021
साक्षात्कार
बिंदुनन्दन सिंह
बिंदुनन्दन सिंह
यूपीपीसीएस 2019 नायब तहसीलदार पद पर चयन


  • नाम: बिंदुनन्दन सिंह
  • पिता का नाम एवं पेशा: शिवेन्द्र प्रताप सिंह, एडवोकेट
  • माता का नाम: श्रीमति बिंदु सिंह (गृहिणी)
  • शैक्षिक योग्यता: एम-ए- नेट (हिन्दी साहित्य)
  • सबल पक्ष: आत्म विश्वास, लक्ष्य के प्रति निष्ठा
  • दुर्बल पक्ष: अति भावुक होना
  • रुचियां: क्रिकेट खेलना, मूवी देखना
  • आदर्श व्यक्तित्व: कबीर, ए-पी-जे- अब्दुल कलाम
  • वैकल्पिक विषय: हिन्दी साहित्य

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः यूपीपीसीएस 2019 में शानदार सफलता के लिए आपको हार्दिक बधाई।

बिंदुनन्दन सिंहः धन्यवाद।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपकी सफलता में परिवार, मित्रें व शिक्षकों का सहयोग कैसा रहा? आपकी पृष्ठभूमि ने आपकी सफलता में किस प्रकार योगदान किया?

बिंदुनन्दन सिंहः मैं अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता एवं अपने गुरुजनों के साथ बड़े भाई और मार्गदर्शक उपेन्द्र प्रताप सिंह (सहायक कमान्डेंट सीआरपीएफ) एवं अनूप कुमार सिंह (आईपीएस) को देना चाहता हूं, जिन्होंने मेरी इस यात्र में सदैव मेरे उत्साह को बनाए रखा। कोई भी सफलता मित्रें के सहयोग के बिना मुश्किल है अतः इस प्रयत्न यात्र में अपने मित्रें प्रभात, आशुतोष, अभिषेक, अनुज, शुभम के सहयोग का ऋणी हूं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गौरवमयी नागरिक सेवा संबंधी वातावरण एवं डॉ- ताराचन्द्र छात्रवास के चयनित अग्रजों ने उस भाव-बोधना का सृजन किया जिसने इस यात्र को आसान बनाया।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने परीक्षा की तैयारी आरंभ कैसे की? तैयारी आरंभ करते समय आपने किन पहलुओं पर विशेष रूप से ध्यान दिया? परीक्षा की तैयारी शुरू करने का आदर्श समय क्या होना चाहिए?

बिंदुनन्दन सिंहः मैंने परीक्षा की तैयारी स्नातक में प्रवेश के साथ ही आरम्भ कर दी थी। विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम ने सिविल सेवा के पाठ्यक्रम से नैरंतर्य स्थापित करने में सहयोग किया। स्नातक के दौरान ही मैंने विषय की मूलभूत समझ के लिए एनसीईआरटी का अध्ययन किया और समझ विकसित होने के उपरान्त प्रामाणिक किताबों का अध्ययन प्रारम्भ किया।

स्नातक के प्रारंभ में ही सिविल सेवा के पाठ्यक्रम के प्रति समझ विकसित करते हुए तैयारी प्रारम्भ करनी चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः भाषा माध्यम के कारण क्या आपको कोई लाभ हुआ? क्या आप मानते हैं कि अंग्रेजी भाषी लाभप्रद स्थिति में होते हैं?

बिंदुनन्दन सिंहः आरंभिक शिक्षा एवं स्नातक हिन्दी परिपाटी से करने के कारण भाषा की सहजता की दृष्टि से हिन्दी ही मेरे लिए सर्वोत्तम विकल्प था अतः मैंने हिन्दी को ही चुना। मेरी सलाह है कि आप जिस भाषा में सहज हों उसी भाषा को चुने।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपका वैकल्पिक विषय क्या था? इसके चयन का आधार क्या था? क्या वैकल्पिक विषय के चयन में आपने कथित लोकप्रियता को भी आधार बनाया?

बिंदुनन्दन सिंहः मेरा वैकल्पिक विषय हिन्दी साहित्य था। यह विषय छोटा होने के साथ अंकदायी भी है और साथ ही मेरे रुचि के अनुरूप भी है।

वैकल्पिक विषय के चयन में मैंने कथित लोकप्रियता को कभी आधार नहीं बनाया बल्कि अपने अभिरुचि को आधार बनाया जिससे मैं अपने वैकल्पिक विषय को बिना किसी तनाव के पढ़ सकूं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः परीक्षा के तीनों चरणों की तैयारी के लिए आप कितना समय उपयुक्त मानते हैं? तीनों चरणों की तैयारी में आपकी समय की रणनीति एक जैसी रही या उसमें बदलाव भी किए?

बिंदुनन्दन सिंहः सिविल सेवा की तैयारी एक लम्बी प्रक्रिया है जिसमें 2 से 3 वर्ष का समय लग सकता है। तैयारी की प्रारंभिक अवस्था में प्रिलिम्स और मेंस को साथ में लेकर चलना चाहिए आगे प्रिलिम्स के समय 3-4 महीने का अलग से समय देना चाहिए और मेंस के समय अपने बनाए गए नोट्स को ध्यान में रखकर रिवीजन करना चाहिए और साक्षात्कार के समय ग्रुप डिस्कशन के माध्यम से समसामयिक विषयों पर पकड़ बनाने का प्रयास करना चाहिए।

इस परीक्षा की पूरी प्रक्रिया के दौरान अपने आप को सकारात्मक बनाए रखें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत बढ़ा दी गई है। इसे पूरी तरह कवर करने व अच्छी तरह तैयार करने का सर्वाेत्तम तरीका क्या हो सकता है? मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के विस्तृत पाठड्ढक्रम को देखते हुए इसकी तैयारी के लिए आपने क्या रणनीति अपनाई? परीक्षा भवन में प्रश्नों को हल करने के लिए क्या आपने कोई विशेष रणनीति अपनाई?

बिंदुनन्दन सिंहः मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन की अहमियत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इसके साथ-साथ वैकल्पिक विषय का भी महत्व है।

मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पर पूरी तरह पकड़ बनाने के लिए मैंने अपने क्लास नोट्स के बार-बार रिवीजन पर जोर दिया साथ ही कुछ प्रामाणिक पुस्तकों से जरूरी तथ्यों, अवधारणाओं को नोट्स में सम्मिलित कर पाठ्यक्रम को पूरा करने का प्रयास किया।

इसके साथ ही टेस्ट सीरीज के माध्यम से अपने उत्तर में गुणवत्ता लाने का प्रयास किया_ साथ ही टेस्ट सीरीज के जो प्रश्न मुझे नहीं आते थे उनको कॉपी में नोट कर उनके अभ्यास पर जोर दिया, जिसका मुझे मुख्य परीक्षा में काफी सहयोग मिला। परीक्षा भवन में मैंने सबसे पहले उन प्रश्नों को हल किया जो अच्छी तरह से आते थे उसके बाद उन प्रश्नों को जो आधे-अधूरे आते थे। अन्त में उन प्रश्नों को हल किया जो एकदम से नहीं आते थे।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने अपने नोट्स बनाए? ये नोट्स किस प्रकार उपयोगी रहे? एक ही कोचिंग संस्थान के नोट्स का उपयोग कई छात्र करते हैं। ऐसे में इन नोट्स को औरों से अलग बनाने हेतु आपने क्या रणनीति अपनाई?

बिंदुनन्दन सिंहः कोचिंग के क्लास नोट्स के अलावा मैंने अपना एक अलग नोट्स बनाया था जो कि क्लास नोट्स का संक्षिप्त रूप था। इन नोट्स में विभिन्न टेस्ट सीरीज के कठिन प्रश्नों को शामिल कर विषय पर पकड़ बनाई जा सकती है, जो औरों के नोट्स से आपको बढ़त बनाए रखने में सहायता करेगी है।

सि-स- क्रॉनिकलः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के प्रश्न-पत्र की तैयारी के लिए आपने क्या किया? छात्रें को इस संदर्भ में आप क्या मार्गदर्शन दे सकते हैं?

बिंदुनन्दन सिंहः नीतिशास्त्र व सत्यनिष्ठा के लिए मैंने डॉ- विकास दिव्यकीर्ति सर के नोट्स का अनुकरण किया था, जो काफी मददगार साबित हुआ।

विकास सर के नोट्स का अध्ययन कर अन्य छात्र अपने नीतिशास्त्र विषय पर पकड़ बना सकते हैं।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने निबंध की तैयारी कैसे की और परीक्षा भवन में इसके चयन और लेखन के लिए क्या रणनीति अपनाई?

बिंदुनन्दन सिंहः निबंध के लिए मैंने समसामयिक मुद्दों पर पकड़ बनाई जिसमें सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल, Only IAS यू-ट्यूब चैनल का महत्वपूर्ण योगदान रहा साथ ही पर्यावरण, महिला, राजनीति जैसे विषयों के लिए अलग से Quotes (दोहे या कथन) का नोट्स बनाया जो परीक्षा में काफी मददगार रहा।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली क्या होनी चाहिए? इसके लिए आपने तैयारी के दौरान क्या तरीका अपनाया?

बिंदुनन्दन सिंहः लेखन शैली के अन्तर्गत पहले, प्रश्न से संबंधित प्रस्तावना लिखना चाहिए, फिर मुख्य बिन्दु और अंत में निष्कर्ष के साथ खत्म करना चाहिए।

फ्रलो चार्ट, डायग्राम, रिपोर्ट, आंकड़े ये उत्तर को काफी प्रभावशाली बनाते हैं, साथ ही उत्तर को निबंधात्मक शैली में ना लिखकर प्वाइंट में लिखना चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः आपने साक्षात्कार की तैयारी कैसे की? आपका साक्षात्कार कैसा रहा? आपसे कैसे प्रश्न पूछे गए? क्या किसी प्रश्न पर आप नर्वस भी हुए?

बिंदुनन्दन सिंहः मेरे साक्षात्कार की तैयारी में श्रेष्ठ एकेडमी का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जहां शिवम सर के मार्गदर्शन में हमने समसामयिक विषयों पर ग्रुप डिस्कशन के द्वारा अपनी पर्सनालिटी में सुधार किया और आत्म विश्वास से परिपूर्ण हुए।

साक्षात्कार में किसान बिल, आत्मनिर्भर भारत, वैक्सीन पर प्रश्न पूछे गये वहीं म्-चालान में किस कैमरे का प्रयोग होता है एवं आप विज्ञान को साहित्य की भाषा में कैसे पढ़ाएंगे, के प्रश्न पर मैं काफी नर्वस हो गया था।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः क्या आपने कोचिंग ली? कोचिंग किस प्रकार उपयोगी रही? ऐसे छात्र जो तैयारी हेतु कोचिंग की सहायता लेना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे?

बिंदुनन्दन सिंहः मैंने दृष्टि संस्थान से कोचिंग ली थी और कोचिंग के द्वारा मुझे ‘‘क्या पढ़ना है, क्या छोड़ना है, कैसे लिखना है’’ की सीख के साथ अवधारणाओं को समझने में काफी सहयोग मिला। कोचिंग लेने वाले छात्र को पहले अपने लिखित क्लास नोट्स पर कमांड करना चाहिए। तत्पश्चात प्रिंट मैटेरियल पर ऐसा अनुकरण कर छात्र विषय पर कमांड बना सकता है।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः जो छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहते हैं, उन्हें आप क्या सुझाव देंगे? यदि कोई ग्रामीण पृष्ठभूमि का या आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी आरंभ करना चाहता हो, तो ऐसे छात्र को क्या करना चाहिए?

बिंदुनन्दन सिंहः जो छात्र सिविल सेवा की तैयारी करना चाहते हैं उन्हें अपने स्नातक के पाठ्यक्रम को सही से पढ़ना चाहिए जो आगे सिविल सेवा में सहायक हो सकेगा। साथ ही एनसीईआरटी की बुक्स, वीडियो के माध्यम से समझ विकसित कर तैयरी करनी चाहिए।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः तैयारी में पत्र-पत्रिकाओं से आपको कितनी सहायता मिली? आपने किन पत्र-पत्रिकाओं का अध्ययन किया? सिविल सेवा परीक्षा के लिए इन पत्र-पत्रिकाओं की कितनी उपयोगिता है?

बिंदुनन्दन सिंहः पत्रिकाओं के तौर पर मैंने क्रॉनिकल और विजन का अनुकरण किया जो परीक्षा के तीनों चरण में मददगार रहें।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकलः सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका आपको कैसी लगी? आपकी सफलता में इसका कितना योगदान है? क्या आप इसमें िकसी प्रकार के बदलाव की अपेक्षा रखते हैं?

बिंदुनन्दन सिंहः क्रॉनिकल मैगजीन प्रिलिम्स एक्जाम के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है जो अन्य छात्रें की तुलना में आपको बढ़त बनाने में मददगार होगी।

अनुशंसित पुस्तक सूची

प्रारंभिक परीक्षा

  • दृष्टि के नोट्स, लूसेंट एवं क्रॉनिकल मैगजीन

मुख्य परीक्षा

  • दृष्टि के नोट्स, रामेश्वरम सर की नोट्स (अर्थव्यवस्था)
  • साइंसटेक (रितेश जायसवाल)
  • विजन मैगजीन

वैकल्पिक विषय - हिन्दी साहित्य

  • दृष्टि के नोट्स
Forum IAS
विशेषज्ञ सलाह
हिंदी माध्यम में कैसे हों सफ़ल? भाग-1
Civil Services Chronicle

सिविल सेवा में हिन्दी माध्यम के छात्रों की असफलता की जिम्मेदारी किसकी?

- संपादकीय मंडल

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल इस अंक से हिंदी माध्यम में कैसे हों सफलनामक मार्गदर्शन शृंखला की शुरुआत कर रही है, जिसमें हम हिंदी माध्यम की असफलता से जुड़ी समस्याओं चुनौतियों की चर्चा करेंगे तथा समाधान भी देंगे। आज सोशल मीडिया या ऑनलाइन सामग्री या कोचिंग द्वारा दी गई सामग्रियों के बीच यह चयन करना मुश्किल हो गया है कि कौन सी सामग्री सही है, कौन सी गलत। इसी को देखते हुए सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल आने वाले अंकों में तथ्य प्रमाण के साथ एक-एक विषय की पड़ताल कर आपका मार्गदर्शन करेगी, बिना किसी लाग लपेट के।

परीक्षार्थियों की भूमिका

छात्रों को परीक्षा की तैयारी से पहले स्वयं की क्षमताओं का आकलन करना चाहिये। इसका सबसे अच्छा तरीका यह है कि विगत 5-6 वर्ष पहले के प्रश्नों को हल करके देखें, अगर उसमें से 25 प्रश्नों का भी उत्तर आप कर पाते हैं तो कोचिंग से जुड़ें; अन्यथा पहले सेल्फ स्टडी के माध्यम से तैयारी की रूपरेखा तैयार करें, जिसमें मानक पुस्तकों या एनसीईआरटी के विस्तृत अध्ययन को प्राथमिकता दें।

  • सामान्यतः परीक्षार्थी अपना स्वयं का आकलन किए बगैर परीक्षा की तैयारी में लग जाते हैं। छात्र, इस नाम पर इस परीक्षा की तैयारी करना शुरू कर देते हैं कि उनका कोई दोस्त, परिवार के किसी सदस्य की इच्छा है कि वो आईएएस बने।
  • छात्र सिर्फ साक्षात्कार, विज्ञापन और संस्थानों के बहकावे में आकर बिना जांच-पड़ताल के किसी भी संस्थान में जाकर एडमिशन ले लेते हैं। वैसे इस सोशल मीडिया मार्केटिंग के युग में सही जानकारी हासिल करना और उस पर विश्वास करना आसान भी नहीं है।
  • परीक्षा की तैयारी का सही समय स्नातक का प्रथम वर्ष है, खासकर हिंदी माध्यम के लिए; इसमें परीक्षा से पूर्व की बेसिक तैयारी का समय मिल जाता है तथा बेसिक तैयारी की समाप्ति के बाद की रणनीति बनाने में सुविधा होती है। साथ ही बेसिक तैयारी के दौरान ही अपनी विषय में रुचि या समझ विकसित हो जाती है, जिससे वैकल्पिक विषय का चयन करने में सहायता मिल जाती है। बेसिक तैयारी के बाद परीक्षा केन्द्रित होकर तैयारी की रणनीति बनानी चाहिये, यानी पहले आई.ए.एस. या पी.सी.एस. किसकी तैयारी करनी है, इसका निर्धारण करें।
  • यह निर्धारण अपनी-अपनी जरूरतों के अनुसार करना चाहिए। यानी अगर आपके पास समय (उम्र) है तो आप पहले पी.सी.एस. से शुरुआत कर सकते हैं तथा जब आप अपने अंदर विषयों को तार्किक रूप से समझने की क्षमता का विकास कर लें तब आई.ए.एस. की तैयारी के लिए आगे बढ़ें।
  • जिस स्थान यानी शहर से आपको तैयारी करनी है उसके चयन की रणनीति भी शुरुआत में ही तैयार करनी चाहिये, जिससे आप सोच-समझकर सहपाठियों व मार्गदर्शक का चयन कर पाएंगे। सहपाठियों व मार्गदर्शक का योगदान मुख्य परीक्षा में अत्यधिक महत्वपूर्ण है, वे आपको भटकाव से बचाते हैं।
  • करेंट अफेयर्स के लिए न्यूज पेपर, पत्रिका आदि का चयन, उनके पढ़ने के तरीके व उन पर स्वयं के नोट्स बनाने की रणनीति भी शुरुआत में ही तैयार करें। शुरू से ही अंग्रेजी भाषा का कोई एक न्यूज पेपर या पत्रिका का अध्ययन अवश्य करें। तैयारी के शुरुआती दिनों में करेंट अफेयर्स या नोट्स के पीछे समय बर्बाद नहीं करना चाहिये; नोट्स तब बनाना शुरू करें, जब आप यह निर्धारित कर लें कि अगला प्रीलिम्स आपको कब देना है।
  • ऑनलाइन साइट, सामग्री व सोशल मीडिया के इस्तेमाल, चयन और जरूरतों को समझना, अनावश्यक के सुझावों से दूरी बनाना तथा क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है, इसकी समझ विकसित करना भी जरूरी है।
  • पहले प्रिलिम्स या मेंसः हिंदी माध्यम का छात्र सामान्यतः यह सोचता है कि पहले प्रीलिम्स पास कर लें, फिर मेन्स की पढ़ाई की जाएगी, जबकि होना यह चाहिये कि सबसे पहले छात्र को वैकल्पिक विषय पर ध्यान देना चाहिए, तत्पश्चात मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन की तैयारी करनी चाहिए तथा इसके बाद प्रीलिम्स के लिए रिवीजन और अंत में टेस्ट सीरीज करनी चाहिये।
  • अपनी कमियों को पहचान कर लक्ष्य को निर्धारित करते हुए टाइम टेबल तैयार करना, समय की कीमत समझना और उसके अनुसार क्लास व स्टडी मैटेरियल आदि को पढ़ने में तालमेल बैठाना भी आपकी रणनीति का एक हिस्सा होना चाहिए। सामान्यतः छात्र क्लास के साथ-साथ स्टडी मैटेरियल का अध्ययन भी शुरू कर देते हैं; ऐसा करना नुकसानदेह है। स्टडी मैटेरियल का अध्ययन या तो क्लास से पहले करें या उस विषय की क्लास खत्म होने के बाद, रिवीजन के लिए। क्लास करते समय सिर्फ क्लास पर फोकस करें, क्लास में प्रश्न पूछना सीखें तथा ‘स्वयं द्वारा बनाए गए’ प्रश्न पूछें।
  • टेस्ट सीरिजः शुरुआत में ही टेस्ट सीरीज, उत्तर लेखन शैली, निबंध लेखन कला आदि की तैयारी के अनावश्यक दबाव से बचना चाहिये। इनकी तैयारी तब शुरू करें, जब आपका पाठ्यक्रम 60 प्रतिशत तक कम्पलीट हो गया हो।
  • अन्य से तुलनाः यदि आपने एक अच्छे कॉलेज/संस्थान से पढ़ाई की है, तो तैयारी की रणनीति अलग बनाएं तथा अगर आपने एक सामान्य कॉलेज/संस्थान से पढ़ाई की है, तो आपको तैयारी की रणनीति अलग बनाने की जरूरत है।
  • यदि आप 10+2 के स्तर पर या स्नातक स्तर पर या नौकरी में रहते हुए तैयारी करे रहे हैं, तो इन सभी के लिए आपको अपनी तैयारी की रणनीति अलग-अलग बनानी होगी। यहां तक कि यदि आप डिस्टेंस लर्निग से पढ़ाई कर रहे हैं, तब भी आपकी रणनीति अन्य प्रतियोगियों से अलग होनी चाहिए।
  • साथ ही आपको अंग्रेजी माध्यम के छात्रों एवं इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले छात्रों की तुलना में भी तैयारी की रणनीति अलग बनानी होगी, खासकर हिंदी माध्यम के छात्रों को।

स्टडी मैटेरियल क्लास नोट्स की भूमिका

प्रायः सभी कोंचिंग संस्थान के स्टडी मैटेरियल तथा क्लास नोट्स आदि पाठ्य सामग्रियों में नयापन नहीं है। इन पाठ्य सामग्रियों में प्रकाशन संस्थानों द्वारा छापी गई गाइड की तरह की सामग्रियों की ही नोट्स के रूप में प्रस्तुति होती है। ये पाठ्य सामग्रियां 2013 से पहले ही अपनी उपयोगिता खो चुकी हैं।

  • कोचिंग संस्थान की पाठ्य सामग्री के चयन में सावधानी बरतने की जरूरत है। स्टडी मैटेरियल या क्लास नोट्स के नाम पर कुछ भी खरीद कर पढ़ना हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए घातक सिद्ध हुआ है। छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि सामान्य तौर पर कोई भी संस्था यह पाठ्य सामग्री उसके क्लास में पढ़ाने वाले शिक्षक से तैयार नहीं करवाती। सामग्री और क्लास में तालमेल नहीं होने के कारण परीक्षार्थी नोट्स को नवीनतम करने के बजाय, नए नोट्स तैयार करने में लग जाते हैं।
  • वर्तमान में स्टडी मैटेरियल या क्लास नोट्स, पत्र-पत्रिकाएं व पुस्तकें ऐसी होनी चाहिए कि छात्र इनके माध्यम से अपने उत्तर को कम से कम शब्दों में लिख सके। इनमें नवीन टर्मिनोलॉजी या शब्दों का समावेशन होना चाहिए। उत्तर लेखन में शब्दों के चयन का बहुत बड़ा योगदान है।

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की भूमिका

सामान्यतः हिदी भाषी राज्यों में स्नातक स्तर में मानविकी विषयों की पढ़ाई का स्तर इतना निम्न है कि उससे मुख्य परीक्षा का उत्तर लिखना तो दूर एक साधारण प्रतियोगिता परीक्षा भी पास नहीं की जा सकती।

  • हिदी भाषी राज्यों के कॉलेजों में मानविकी विषयों की पढ़ाई, विषयों के विशेषज्ञों के ऊपर निर्धारित होती है। इन राज्यों में कुछ चुनिंदा शिक्षण संस्थानों को छोड़कर ज्यादातर कॉलेजों की स्थिति ऐसी है कि शिक्षक सामान्य तौर पर छात्रों को 5-10 प्रश्न तैयार करने को बोल देते हैं और परीक्षा में ज्यादातर प्रश्न उन्ही में से आ जाते हैं।
  • कॉलेज स्तर की परीक्षाओं में जो प्रश्न पूछे जाते हैं, उनके उत्तर की शब्द सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं होती, जबकि इसके ठीक विपरीत UPSC द्वारा जो प्रश्न पूछे जाते हैं उनकी शब्द सीमा 150 तथा 250 शब्द की ही होती है। इसलिए स्नातक स्तर की सामान्य शिक्षा UPSC में उपयोगी साबित नहीं होती।

पत्र-पत्रिकाओं पुस्तकों की भूमिका

ऐसी पत्र-पत्रिकाएं और पुस्तकें से बचे, जिनमें नवीन पाठ्यक्रम तथा लगातार बदलती प्रश्नों की प्रकृति के अनुरूप परिवर्तन नहीं किया गया है, उनमें पूर्व की भांति ही विषयों तथा सामयिक मुद्दों की प्रस्तुति जारी है।

  • मुख्य परीक्षा की तैयारी कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, इसके लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाकर उसके अनुरूप पत्र-पत्रिकाओं व पुस्तकों का चयन करना चाहिए। साथ ही मुख्य परीक्षा की निरंतर तैयारी जरूरी है, इसके लिए पाठ्यक्रम पर आधारित पत्रिकाओं के आलेख, विशेष सामग्री तथा नए संस्करण की पुस्तकों को पढ़ना जरूरी है।
  • पुस्तकों का चयन और हिंदी माध्यम में उनकी अनुपलब्धता सबसे बड़ी समस्या है, साथ ही बाजार में उपलब्ध अधिकांश पुस्तकें ऐसी हैं, जो प्रीलिम्स परीक्षा को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। अगर आपको UPSC की तैयारी करनी है तो स्नातक से ही अपनी पाठ्य-पुस्तकों का चयन सोच समझ करना चाहिये।

छात्रों की विरोधात्मक प्रवृत्ति

आयोग प्रशासकीय जरूरतों के अनुरूप अपने पाठ्यक्रम का निर्धारण करता है। इसलिए आयोग से यह अपेक्षा नहीं करनी चाहिए कि वह अपने स्तर को हमारे अनुरूप करे, बल्कि हमें अपने आप को UPSC के अनुरूप ढालना होगा। अभी तक जिन समस्याओ के कारण रिजल्ट नहीं आ रहे हैं उन पर सुधार की कोई चर्चा ही नहीं होती।

  • हिंदी माध्यम के छात्र बात-बात पर आंदोलन करने चल देते हैं। छात्रों के आंदोलन करने से या आंदोलन का समर्थन करने से UPSC अपने आपको नहीं बदलेगा। यानी वह वर्तमान हिन्दी माध्यम के छात्रों की मांगों के अनुरूप अपने प्रश्न-पैटर्न व पाठ्यक्रम को नहीं बदलेगा।

आयोग की भूमिका

प्रश्नों के निर्माण से लेकर प्रारूप उत्तर लेखन तक आयोग की परीक्षा प्रक्रिया अंग्रेजी माध्यम के लोगों द्वारा संचालित की जाती है। इसमें क्षेत्रीय भाषाओं तथा हिंदी माध्यम के छात्रों के सामने आने वाली मूल समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया जाता; जैसे प्रश्न-पत्र का हिंदी के अनुकूल न होना तथा हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नों के ट्रांसलेशन में विषय विशेषज्ञों की जगह अनुवादकों का इस्तेमाल करना आदि।

  • तथ्य यह है कि अंग्रेजी में लिखी गई किसी सामग्री को हिंदी में लिखने के लिए अधिक शब्दों की आवश्यकता होती है। कभी-कभी तो ऐसा देखा जाता है कि किसी बात को लिखने के लिए अंग्रेजी में कम शब्दों की जरूरत पड़ती है, जबकि हिंदी में वही सामग्री लिखने में ज्यादा शब्द खर्च करने पड़ते हैं।
  • अतः यह स्पष्ट है कि जिस शब्द सीमा में UPSC द्वारा अपने प्रश्न के उत्तर की अपेक्षा की जाती है, उस शब्द सीमा में उत्तर लिखना हिंदी माध्यम के छात्र के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है।
  • आयोग को यह चाहिए कि वह हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए प्रश्न-पत्र तैयार करने में अंग्रेजी माध्यम के विशेषज्ञों व अनुवादकों के बजाय हिंदी माध्यम के विशेषज्ञों को शामिल करे तथा एग्जामिनर की मॉडल उत्तर पुस्तिकाएं भी हिंदी माध्यम में ही बनाई जाएं।

शिक्षक की भूमिका

विचारणीय तथ्य यह है कि वर्तमान पाठ्यक्रम अधिकांशतः मानविकी विषयों पर आधारित है तथा इन विषयों पर हिन्दी माध्यम में आई.ए.एस. के क्षेत्र में विद्वानों की कमी नहीं है, फिर भी परिणाम क्यों नहीं आ रहे?

  • हिंदी माध्यम के शिक्षक, अंग्रेजी माध्यम की तुलना में विषयों को पढ़ाने में समय तो काफी देते हैं, लेकिन उन व्यावहारिक पक्षों को नहीं पढ़ाते जहां से प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • वर्तमान में हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों को इस तरह से पढ़ाने की आवश्यकता है कि वह मुख्य परीक्षा के प्रश्नों को निर्धारित समय में 150 से 250 शब्दों में सटीक रूप से लिख सके। साथ ही वह इतना सक्षम हो कि प्रश्नों की प्रवृत्ति या प्रकृति को आसानी से समझ सके।
  • वर्तमान में सबसे ज्यादा प्रश्न उन क्षेत्रों से आ रहे हैं, जो व्यावहारिक हैं, जिन्हें किसी पुस्तक या पाठ्य सामग्री में ढूंढा नहीं जा सकता। चूंकि प्रश्न बहु-विषयी तथा अंतरविषयी प्रकृति के आ रहे हैं, इसलिए इन्हें अपनी समझ से ही लिखा जा सकता है।
  • सामान्यतः वर्तमान में प्रश्न विभिन्न विषयों या मुद्दों से जुड़ी समस्याओं, चुनौतियों, प्रभाव तथा परिणाम परअपने परंपरागत स्वरूप के साथ-साथ समकालीन संदर्भ लिए हुए होते हैं। इन प्रश्नों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को छात्रों में विषय की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, ताकि वे ‘विश्लेषण करने के स्तर’ की क्षमता का विकास कर सकें।
  • आयोग विगत 10 वर्षों में 3 बार प्रश्नों की प्रकृति व प्रवृत्ति में व्यापक परिवर्तन ला चुका है, ऐसे में शिक्षक को छात्रों को हॉलिस्टिक रूप से पढ़ाना होगा, क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि जिस समय छात्र कोचिंग में पढ़ता है तथा जिस समय वह परीक्षा में शामिल होता है, उसमें 3 या उससे अधिक वर्ष का अंतर हो जाता है।
  • विडंबना यह है कि 5-7 साल का अनुभव रखने वाले शिक्षक भी परीक्षा की जरूरतों को अच्छी तरह समझने के बावजूद अपने पढ़ाने के तरीके में परिवर्तन नहीं ला रहे हैं। इसका कारण यह है कि वर्तमान में व्यावहारिक स्वरूप के तथा बहु-विषयी या अंतरविषयी प्रकृति के प्रश्न आ रहे हैं।
  • इन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों को अपने अध्यापन में व्यावहारिक पक्ष को ज्यादा पढ़ाना पड़ेगा, जिसे पढ़ाने में ज्यादा समय लगता है तथा उन्हें स्वयं भी अपने अध्ययन पर समय देना होगा, जिनका उनके पास अभाव है।

कोचिंग संस्थानों की भूमिका

सामान्यतः कोचिंग संस्थान के प्रबंधक बिना परीक्षार्थी की योग्यता को परखे उन्हें अपनी व्यावसायिक मजबूरियों की चलते परीक्षा के लिए प्रोत्साहित कर एडमिशन ले लेते हैं। ऐसे में यह आवश्यक है कि हर एक छात्र की क्षमता एवं स्तर का व्यक्तिगत रूप से आकलन कर उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुरूप मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। साथ ही संस्थानों को अपने पढ़ने-पढ़ाने के तरीके में व्यापक परिवर्तन लाना होगा, जो 500 या 1 हजार की संख्या वाले क्लास में संभव नहीं है।

  • कोई भी संस्थान सिर्फ परंपरागत तरीके से नोट्स लिखवाकर मुख्य परीक्षा में अच्छे अंक नहीं दिलवा सकता। इस प्रकार के अध्ययन से आप अधिक से अधिक प्रारंभिक परीक्षा ही पास कर सकते हैं।
  • कोचिंग संस्थानों के फाउण्डेशन कोर्स के लिए छात्र लाखों रुपये तथा अपना 18 से 24 महीने का समय खर्च करते हैं। इन फाउण्डेशन कोर्स में संस्थान, छात्रों को सतही तौर पर सामान्य अध्ययन की तैयारी कराकर उन्हें उनके भाग्य पर छोड़ देते हैं। कोचिंग संस्थानों की इस प्रवृत्ति में व्यापक सुधारक की जरूरत है।
  • वर्तमान में कोचिंग संस्थान शिक्षा को व्यवसाय की तरह देखते हैं और छात्रों को एक उत्पाद की तरह; जबकि शिक्षा एक सेवा है ना कि व्यवसाय।
उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली हेतु रणनीति (भाग 4)
Career Consultant (Observer IAS)

सामान्य अध्ययन का तीसरा प्रश्न-पत्र सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण और विविधता लिए हुए है। इस अध्याय में आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी, जैव विविधता, पर्यावरण, सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन जैसे शीर्षक शामिल हैं। इनमें आर्थिक विकास के अतिरिक्त लगभग सभी शीर्षक एक दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए नवीन प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से भले ही जीवन आसान हो रहा है, आर्थिक विकास के नये मानक बन रहे हैं, किंतु इस प्रौद्योगिकी की कीमत अब मानव समाज को चुकानी पड़ रही है। पर्यावरण बनाम आर्थिक विकास के नजरिये से देखें तो लगता है कि आज पर्यावरण, पिछले कई दशकों में हुए अविवेकपूर्ण आर्थिक विकास की कीमत चुका रहा है। जलवायवीय संकट एवं आपदाएं हमेशा कोई न कोई विपत्ति सामने लाती रहती हैं। चाहे वह उत्तराखंड में भूस्खलन हो या बंगाल की खाड़ी में उठने वाला समुद्री तूफान हो या बढ़ता हुआ धरती का तापमान या फिर जैव विविधता के संकट की स्थिति_ यह सब हमारे आम जीवन से जुड़े हुए हैं।

सामान्य अध्ययन का यह तीसरा पेपर सबसे ज्यादा कठिनाई लिए हुए प्रकट होता है क्योंकि आमतौर पर इतिहास और राजव्यवस्था के विपरीत यह पेपर जीवन की वास्तविक घटनाओं के सबसे ज्यादा करीब है और इस विषय पर अध्ययन सामग्री का एक समग्र रूप से उपलब्ध न होना भी अभ्यर्थियों के समक्ष निरंतर समस्याएं पैदा करता रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक ही विषय के तार कई विषयों से जुड़े रहते हैं। उदाहरण के लिए विकास के नाम पर पर्वतीय क्षेत्रें में नई-नई तकनीकों को अपनाकर कई मानदंड गढ़े गए, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता का नुकसान तो हुआ ही, कई आपदाएं भी सामने आईं और इन आपदाओं से सुरक्षा का एक नया संकट हमारे सामने खड़ा हो गया।

संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में जो प्रश्न पूछे जा रहे हैं, उनमें यह निर्धारण करना बहुत मुश्किल हो रहा है कि प्रश्न किस अध्याय से संबंधित हैं, एक ही प्रश्न का जुड़ाव प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास, पर्यावरणीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ा रहता है, ऐसे में उत्तर को लिखना बहुत मुश्किल हो जाता है। फिर भी कुछ वर्षों से संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जिस प्रकार के प्रश्न पूछे जा रहे हैं उस आधार पर इस विषय से जुड़े हुए विभिन्न अध्यायों को पहचाना जा सकता है। इस पेपर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जिन परिस्थितियों से भारत प्रभावित होता है अथवा हो रहा है, सामान्यतः वही विषय प्रश्न बनकर अभ्यर्थियों के सामने आ जाते हैं और अभ्यर्थी से उम्मीद की जाती है कि वह अपने व्यावहारिक और मौलिक ज्ञान का उपयोग करते हुए तथा निश्चित शब्द सीमा का पालन करते हुए उत्तर लिखे। अभ्यर्थियों के बीच सबसे बड़ा संकट यही है कि वे इतिहास और संविधान के अनुच्छेद के दायरे से अपने आप को कैसे निकालें और देश जिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है उसको कैसे देखें, सोचें, समझें और अपने उत्तर में लिखें।

इसी परिपेक्ष में सामान्य अध्ययन के इस तीसरे भाग को सरलीकृत करके फ्रलो-चार्ट के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया है। इसके साथ-साथ इस विषय से कैसे प्रश्न बन सकते हैं और किस प्रकार के प्रश्न अभी बन रहे हैं उनको भी टेबल के माध्यम से समझाया गया है।

पाठ्यक्रम

बनने वाले प्रश्न

विज्ञान व प्रौद्योगिकी विकास, अनुप्रयोग तथा उपलब्धियां

  • दैनिक जीवन व राष्ट्रीय सुरक्षा मानक
  • भारतीय प्रौद्योगिकी नीति
  • भारत की उपलब्धियां
  • नवीन प्रौद्योगिकी का विकास
  • प्रौद्योगिकी प्रयोग, हस्तान्तरण

दैनिक जीवन व राष्ट्रीय सुरक्षा में प्रौद्योगिकी की भूमिका

  • मिसाइल व रक्षा उपकरणों का विकास, विशेषता-उपलब्धियां
  • अंतरिक्ष कार्यक्रम, इसरो की गतिविधियां-उपलब्धियां- अनुप्रयोग
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स क्षेत्र में भारतीय पहल, नीति, समस्या चुनौती_ चिकित्सा क्षेत्र की नीति, समस्या, चुनौती, अनुसंधान

जैव प्रौद्योगिकी

  • जैव प्रौद्योगिकी नीति, अनुसंधान, विकास, अनुप्रयोग_ नई नीति की घोषणा
  • उपलब्धि व चुनौती

सूचना प्रौद्योगिकी

  • सूचना प्रौद्योगिकी नीति
  • अनुसंधान, विकास कार्यक्रम
  • डेटा सुरक्षा का प्रश्न
  • विभिन्न नवनिर्मित कानून व उनका मूल्यांकन

बौद्धिक संपदा अधिकार व डिजिटल मुद्दे

  • बौद्धिक संपदा का अर्थ, प्रभाव
  • प्रकार, अधिकार
  • विकासशील देशों में होने वाले परिवर्तन व उभरती चुनौतियां

कम्प्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक्स

  • अनुसंधान व विकास
  • 5G तकनीक
  • सुपर कम्प्यूटर नीति

नवीनतम प्रौद्योगिकी उनके अनुप्रयोग व उभरती स्थिति व चुनौतियां

  • ऑप्टिकल फाइबर
  • अर्धचालकता, नैनो तकनीक
  • जी-एम- फसलें, स्वास्थ्यजनित प्रभाव
  • रोबोटिक्स, साइबर क्राइम
  • प्रशासनिक-सामाजिक-आर्थिक प्रभाव व हस्तक्षेप का विश्लेषण

पर्यावरण सुरक्षा व पारिस्थितिक तंत्र

  • जैव विविधता (बदलता परिदृश्य)
  • सामाजिक वानिकी (वन विनाश, वनाग्नि, आर्द्रभूमि, मैंग्रोंव वन)
  • पर्यावरण ह्रास के कारण
  • पर्यावरण प्रदूषण (कारण, नई रिपोर्ट)
  • पर्यावरण प्रदूषण (प्रकार, स्थिति, नियंत्रण)

वैश्विक तापन/जलवायु परिवर्तन

  • ग्रीन हाउस प्रभाव
  • ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव (भारत-विश्व)
  • नियंत्रण हेतु पहल (भारत व विश्व) व आवश्यक सुझाव
  • ओजोन क्षरण
  • अंटार्कटिका में भारतीय पहल

ऊर्जा

  • स्रोत, स्थिति, पहल, रिपोर्ट, नीति
  • परंपरागत व गैर परंपरागत स्रोत
  • वैश्विक व भारतीय पहल
  • विविध कार्यक्रम (उपलब्धि, समस्या)
  • चिकित्सा क्षेत्र की नीति, समस्या, चुनौती, नवीन अनुसंधान

सुरक्षा व आपदा प्रबंधन

  • आपदा प्रबंधन नीति (सुझाव, मूल्यांकन)
  • आपदाएं (बाढ़, सूखा, चक्रवात, भूकंप, भूस्खलन) वर्तमान स्थिति व नीति
  • पर्यावरणीय पहलू (ग्लोबन वार्मिंग व आपदाएं, कृषिवानिकी नष्टीकरण, शहरी जोखिम, विकास बनाम पर्यावरण, जैविक खतरे, भूवैज्ञानिक खतरे, एल नीनो, आकाशीय बिजली का कहर)

उपर्युक्त फ्लो-चार्ट और टेबल के माध्यम से सामान्य अध्ययन के तीसरे पेपर से बनने वाले अधिकांश प्रश्नों को समझा जा सकता है। एक परीक्षार्थी इन विषयों की आम समझ रखे, जैसी परिस्थितियों का सामना भारत कर रहा है, उन्हें देखे, समझे और एक प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर आवश्यक सुझाव दे, इसी की अपेक्षा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अपनी परीक्षा में की जाती है। इसमें किताबी ज्ञान की महत्ता बहुत कम होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें टू द पॉइंट मैटर का मिलना बहुत मुश्किल होता है। इस सन्दर्भ में सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल विगत दो दशकों से निरंतर अपनी गुणवत्ता को बनाए हुए परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को एकदम अपडेट मैटर उपलब्ध कराने के अपने अभियान में लगी हुई है।

उत्कृष्ट उत्तर लेखन शैली हेतु रणनीति (भाग 3)
Career Consultant (Observer IAS)

उत्तर लेखन शैली से जुड़ी समस्याएं सामान्य अध्ययन के एक विषय सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित अध्यायों में भी व्यापक रूप से प्रकट होती हैं। सामान्य अध्ययन से जुड़े इस विषय को पहले भारतीय अर्थव्यवस्था शीर्षक से पढ़ा जाता था। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे संस्थानों, मार्गदर्शकों द्वारा लम्बे समय तक यही धारणा बनाई गई कि बस अर्थव्यवस्था में सामाजिक पक्ष जुड़ गया है। इस विषय पर सबसे बड़ी समस्या मानक पुस्तकों का उपलब्ध न हो पाना है। विश्वविद्यालयी पाठड्ढक्रम के आधार पर लिखी गई अर्थव्यवस्था की परंपरागत पुस्तकें बदले हुए पाठड्ढक्रम के हिसाब से काफी पुरानी हो चुकी हैं। कुछ पुस्तकें वही दो दशक पुराने वाले सिलेबस लिए हुए अभी तक छात्रें के बीच अपनी मौजूदगी बनाए हुए है। ज्यादातर पुस्तकें वही मांग-आपूर्ति, बैंक दर वाले पुराने पैटर्न को अपनाते हुए अनेक तथ्यों को समाहित करते हुए छात्रें को रटन्त विद्या मार्ग पर चलाती रही हैं, जबकि संघ लोक सेवा आयोग का पाठड्ढक्रम एक अभ्यर्थी से देश के सामाजिक-आर्थिक पक्षों की सामान्य समझ के आकलन क्षमता की अपेक्षा करता है।

नये प्रश्न पूछने की बढ़ती प्रवृत्ति से जुड़ी समस्याएं?

सामान्य अध्ययन से जुड़े इस विषय की पहली समस्या नये प्रकार के बनने वाले प्रश्नों की है जिनका उत्तर परंपरागत विश्वविद्यालय स्तर पर संचालित अर्थव्यवस्या की पुस्तकों में दूर-दूर तक नहीं मिलता। आज पूछे जाने वाले प्रश्नों का संबंध सीधे-सीधे देश की सामाजिक-आर्थिक नीतियों से जुड़ा होता है। कुछ प्रश्न तो इतने सम-सामयिक व व्यावहारिक स्तर के होते हैं कि उनको जानना, समझना तथा राजनैतिक समझ वाले पूर्वाग्रह को त्यागते हुए उनको उत्तर में बेहद संतुलित तरीके से लिखना बेहद चुनौतीपूर्ण व कठिन कार्य है।

कुछ सम-सामयिक मुद्दों के माध्यम से इस विषय के बदले हुए पैटर्न को समझा जा सकता है। कृषि क्षेत्र में बने तीन नए कानून, इनका वर्तमान तक जारी विरोध, न्यूनतम समर्थन मूल्य का योगदान, देश की भंडारण नीति, एफ- सी- आई-, नेफेड की विवादित कार्यप्रणाली, अनुबंध व डिजिटल कृषि, निजी क्षेत्र का कृषि गतिविधियों में प्रवेश, कृषि वित्त, लोन माफी व जर्जर भारतीय बैंक, कृषकों की आत्महत्याएं, अन्नदाताओं के नाम पर जारी राजनीति आदि मुद्दों से मौजूदा भारत की आर्थिक नीति प्रभावित हो रही है।

कृषि क्षेत्र से जुड़े ये तमाम मुद्दे अपने अन्दर इतने अंतर्विरोध, विशेषताएं, आशंकाएं लिए हुए हैं कि इन मुद्दों के आधार पर एक समझ बनाकर परीक्षा उत्तीर्ण करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है।

ठीक यही स्थिति गरीबी-बेरोजगारी, उद्योग, वित्त जैसे पुराने परंपरागत विषयों को लेकर उत्पन्न हो रही है। परीक्षा प्रणाली वर्तमान दौर की नीतियों से जुड़े मुद्दों पर प्रश्न पूछ रही है। वहीं पुस्तकें प्रछन्न बेरोजगारी की विशेषताएं व मिश्रित अर्थव्यवस्था के गुण बताकर नये अभ्यर्थियों को अभी भी दशकों पुराने पैटर्न पर चला रही हैं।

वास्तविकता तो यह है कि वर्तमान में संचालित सभी नीतियों का निष्पक्ष, संतुलित ज्ञान रखते हुए सामान्य अध्ययन के इस विषय (सामाजिक-आर्थिक विकास) से जुड़े प्रश्नों का शब्द सीमा के अंतर्गत उत्तर लिखना तभी संभव है जब एक अभ्यर्थी नियमित रूप से विभिन्न नीतियों पर अपनी समझ को शब्द सीमा के दायरे में बांधने की पूर्ण कोशिश करते हुए निरंतर उत्तर लेखन का अभ्यास करे।

एप्रोच को बदलें

सामाजिक-आर्थिक विकास से जुड़े विषय के सन्दर्भ में पहली आवश्यकता तो यह है कि अभ्यर्थी इसका अध्ययन केवल अर्थव्यवस्था के भाग के रूप में न करें, बल्कि देश की सामाजिक-आर्थिक नीति के रूप में इसका अध्ययन करें। इस चार्ट को देखें_ इसमें परंपरागत प्रश्नों के स्थान पर किस प्रकार नये प्रश्न बन सकते हैं, इसे समझाने की कोशिश की गई है-

पाठयक्रम परंपरागत प्रश्न परिवर्तित पाठड्ढक्रम पर बनते नये प्रश्न
भारतीय अर्थव्यवस्था परिचय, प्रकृति, विशेषता, स्थिति, समस्याएं व चुनौतियां अर्थव्यवस्था के सामाजिक-आर्थिक पक्ष व वर्तमान परिदृश्य
मानव विकास सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी मानव विकास की अवधारणा, उपागम, सरकार की नीतियां तथा वैश्विक व भारतीय रिपोर्ट
सतत-विकास सिर्फ सैद्धांतिक जानकारी सतत-विकास लक्ष्य, भारत की नीतियाँ, निष्पादन व सूचकांक
समावेशी विकास सिर्फ सैद्धांतिक व सामान्य जानकारी नीति, पहल, आवश्यकता, वर्तमान रणनीति, निष्पादन, चुनौती, समाधान
गरीबी व बेरोजगारी परिभाषा, प्रकार, मापन, कारण, दूर करने के प्रयास सामाजिक-आर्थिक पक्ष_ जनसंख्या वृद्धि व गरीबी_ बहु-आयामी गरीबी सूचकांक वैश्वीकरण की नीतियां व गरीबी-बेरोजगारी_ कोविड-19 का प्रभाव
कृषि विशेषता, योगदान, पंचवर्षीय योजनाएं, विकास हेतु पहल नये कृषि कानून व भारतीय कृषि की समस्याएं_ डैच् का प्रभाव, भण्डारण, बाजारीकरण व नए कृषि कानून, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव_ कृषकों की दोगुनी आय हेतु उठाये गए कदमों की समीक्षा
उद्योग क्षेत्र समग्र नीतियों की चर्चा लघु उद्योग की महत्ता, स्थिति, चुनौती व सरकारी प्रयास_ स्टार्ट-अप/ स्टैंड-अप व अन्य विकासात्मक योजनाओं का निष्पादन
मुद्रा व बैंकिंग मुद्रा जगत की अवधारणा, RBI की सरंचना व कार्य पद्धति RBI की नीतियों का मूल्यांकन_ वित्तीय समावेशन_ देश के विकास में वित्तीय नीतियां कैसे लागू हो रही हैं, प्रभाव, परिणाम, समस्याएं व सुझाव
कुपोषण व भुखमरी अवधारणा / सामान्य परिचय कुपोषण-प्रकार, मापन, प्रभाव, रिपोर्ट, दूर करने की नीति, सुझाव_ खाद्य सुरक्षा- आवश्यकता, नीतियां, वर्तमान परिदृश्य, समस्याएं, नई पहल, सुझाव
स्वास्थ्य (पाठड्ढक्रम का भाग नहीं) स्वास्थ्य - प्रणाली, स्थिति, मुद्दे, चुनौतियां, सरकार की नीति, राज्यों की स्थिति, सुझाव
ग्रामीण विकास (पाठड्ढक्रम में कृषि, गरीबी अध्याय से जुड़ा महज एक अध्याय) ग्रामीण विकास- अवधारणा, महत्त्व, विकास नीति, दृष्टिकोण, सरकारी प्रयास, उत्पन्न प्रभाव, समस्याएं व सुझाव
सामाजिक सुरक्षा (पाठड्ढक्रम का हिस्सा नहीं) सामाजिक सुरक्षा- अवधारणा, आवश्यकता, उद्देश्य, सुरक्षा की आवश्यकता क्यों, सम्बंधित प्रावधान, समितियां, रिपोर्ट, मूल्यांकन, सुझाव
असुरक्षित वर्ग (पाठड्ढक्रम का हिस्सा नहीं) असुरक्षित वर्ग- परिचय, वर्गीकरण, महिलाएं, बच्चे, वृद्ध, दिव्यांग, अल्पसंख्यक, पिछड़े तथा जातिगत रूप से पिछड़े वर्गों के कल्याणार्थ नीतियां

इस छोटी सारणी में विषय से जुड़े तमाम प्रसंगों को समेटने का प्रयास किया गया है। ये सभी मुद्दे प्रारम्भिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा निबंध के अतिरिक्त इंटरव्यू में भी पूछे जा सकते हैं।

भविष्य की राह

नये-पुराने अभ्यर्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वह अर्थशास्त्र के जटिल सिद्धांतों के मकड़जाल से निकलकर देश के विकास हेतु आवश्यक सामाजिक-आर्थिक नीतियों को समझे। सिविल सर्विसेस क्रॉनिकल जैसी पत्रिकाएं पिछले दो दशक से इसी दायित्व को पूर्ण कर रही हैं।

नये अभ्यर्थी के साथ पुराने परीक्षार्थी भी इनका नियमित अध्ययन कर परीक्षा के मानकों को पूर्ण कर सकते हैं।

Prelims IAS Books English 2021
सामान्य प्रश्न ,ट्रिप्स और ट्रिक
   सफलता के लिए आखिर सही रणनीति क्या होनी चाहिए?
   क्या असफलता के लिए गलत रणनीति जिम्मेवार है?
   रैंक व अंतिम चयन का निर्धारण कैसे होता है?
   साक्षात्कार से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों पर चर्चा करें?
   वैकल्पिक विषय के चयन के आधार क्या हैं?
   अंतिम रूप से चयन में सामान्य अध्ययन ज्यादा महत्वपूर्ण है या वैकल्पिक विषय?
   मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय कौन-कौन से हैं?
   मुख्य परीक्षा का पाठ्यक्रम क्या है?
   मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पाठ्यक्रम को विस्तार से समझाएं ?
   प्रारंभिक परीक्षा की रूपरेखा क्या हैं?
Top UPSC Faculty
Anil Keshri

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About Faculty

ANIL KESHRI, is a well know Author and Faculty of Geography. He has experience of two decades of teaching in UPSC CSE. Under his guidance more than thousands got selections in UPSC and different PCS examination. He is also a true academician and due to his interest in ...

पुस्तकें

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में सहायक, क्रॉनिकल आईएएस की पुस्तकों का संग्रह। क्रॉनिकल आईएएस के पुस्तकों के संग्रह में आईएएस परीक्षा से संबंधित विभिन्न विषयों के लिए पिछले कई वर्षों के मॉडल प्रश्न पत्र एवं वैकल्पिक विषयों के संदर्भ में उपयुक्त पुस्तकें, नोट्स इत्यादि के साथ अन्य बहुत कुछ ऐसा उपलब्ध है जो प्रारम्भिक परीक्षा के साथ ही मुख्य परीक्षा के लिए भी सहायक है। सभी पुस्तकें हिन्दी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में उपलब्ध हैं तथा सभी पुस्तकें आईएएस परीक्षा के वर्तमान प्रारुप के अनुसार उत्परिवर्तित(update) की हुई हैं।
All the books are updated to the current format of IAS examination.

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16 Years Topic-Wise Solution Of Previous Papers History IAS Mains Q & A 2021

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21 Years Solved General Studies IAS Mains Questions And Answer

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पत्रिकाएं

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सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल नवंबर 2021

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Civil Services Chronicle November 2021

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समसामयिकी क्रॉनिकल नवंबर 2021

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Civil Services Chronicle October 2021

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समसामयिकी क्रॉनिकल अक्टूबर 2021

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समसामयिकी क्रॉनिकल सितंबर 2021

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सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल सितंबर 2021

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Civil Services Chronicle September 2021

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सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल अगस्त 2021

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PCS Books 2021
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16 Years Topic-Wise Solution Of Previous Papers History IAS Mains Q & A 2021 15 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र दर्शनशास्त्र (प्रश्नोत्तर रूप में) 2021 तीव्र अवलोकन उत्तर प्रदेश विशेष सामयिकी एवं सामान्य ज्ञान तीव्र अवलोकन राजस्थान विशेष , सामयिकी एवं सामान्य ज्ञान 21 Years Solved General Studies IAS Mains Questions And Answer 21 वर्ष सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा का हल प्रश्न पत्र सामान्य अध्ययन (प्रश्नोत्तर रूप में) पेपर I - IV 2021 THE LEXICON नीतिशास्त्र,सत्यनिष्ठा व अभिरुचि 2021 15 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र समाजशास्त्र (प्रश्नोत्तर रूप में) 2021 15 वर्ष यूपीएससी सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा हल प्रश्न पत्र हिंदी साहित्य (प्रश्नोत्तर रूप में) 2021 21 Years Topic-Wise Solution Of Previous Papers English Compulsory IAS Mains Q & A 2021
क्रॉनिकल निबंध प्रतियोगिता-3

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल “निबंध प्रतियोगिता” प्रतियोगियों के लेखन कौशल को संवर्धित करने की दिशा में एक प्रयास है। निबंध के विषय आई.ए.एस व पी.सी.एस. परीक्षाओं के दृष्टिकोण से दिए गए है। सर्वश्रेष्ठ निबंध के लिए लेखक को 1500/- रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।

सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल दिसंबर 2021 अंक में प्रकाशित किये जाने वाले निबंध प्रतियोगिता-3 का विषय है-

विषय : 'भविष्य उनका है, जिनके पास डेटा है'

सर्वश्रेष्ठ निबंध को लेखक के नाम के साथ सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल पत्रिका व chronicleindia.in में प्रकाशित किया जाएगा। निबंध लिखने की अधिकतम शब्द सीमा 1200 शब्द है।

प्रतियोगिता में भाग लेने के इच्छुक पाठक अपने नाम, मोबाइल नंबर और पते के साथ 20 अक्टूबर, 2021 तक हमें cschindi@chronicleindia.in पर मेल करें अथवा इस पते पर भेजें : Chronicle Publications Pvt. Ltd., A-27D, Sector 16, Noida –201301 (U.P.)

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नोटिफिकेशन

Uttar Pradesh Public Service Commission (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग), 2021

Bihar Public Service Commission (बिहार लोक सेवा आयोग), 2021

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