अनुबंध कृषि पर बना नया कानून

अक्टुबर 2019 में केंद्र सरकार के मॉडल कॉन्ट्रेक्ट फ²मग एक्ट (अनुबंध कृषि अधिनियम), 2018 की तर्ज पर अनुबंध कृषि पर कानून बनाने वाला तमिलनाडु, देश का पहला राज्य बन गया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में, राष्ट्रपति ने तमिलनाडु कृषि उपज एवं पशुधन अनुबंध कृषि (Contract Farming) व सेवा (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम नामक कानून को अपनी स्वीकृति प्रदान की। यह अधिनियम अत्यधिक फसल उपज या बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान किसानों के हितों की रक्षा करने वाले पंजीकृत समझौते के अनुसार किसानों को पूर्व निर्धारित मूल्य पर भुगतान किया जाना सुनिश्चित करता है।

  • इस अधिनियम में कृषि, बागवानी, मधुमक्ख पालन, रेशम उत्पादन, पशुपालन या वन गतिविधियों के आउटपुट सम्मिलित हैं, लेकिन कानून द्वारा प्रतिबंधित या निषिद्ध उत्पादों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसके अनुसार, किसानों को उत्पादन एवं उत्पादकता में सुधार हेतु निवेश, खाद्य एवं चारा, प्रौद्योगिकी आदि के लिए खरीददारों से समर्थन मिलेगा।
  • इस अधिनियम के कार्यान्वयन सुनिश्चित करने लिए तमिलनाडु राज्य अनुबंध कृषि एवं सेवा (संवर्धन व सुविधा) प्राधिकरण नामक छह सदस्यीय निकाय का गठन किया जाएगा।

अनुबंध कृषि से संबंधित तथ्य

  • अनुबंध कृषि समवर्ती सूची का विषय है; जबकि कृषि, राज्य सूची का विषय है।
  • इनके तहत खरीदारों (जैसे-खाद्य प्रसंस्करण इकाई व निर्यातक) एवं उत्पादकों (किसानों या किसान संगठन) के मध्य फसल-पूर्व समझौते (या वायदा अनुबंध) के आधार पर कृषि उत्पादन (पशुधन व मुर्गीपालन सहित) किया जाता है।
  • अनुबंध कृषि के उत्पादकों एवं प्रयोजकों के हितों की रक्षा के लिए कृषि मंत्रालय ने मॉडल कृषि उपज विपणन समिति (।च्डब्) अधिनियम, 2003 का मसौदा तैयार किया था, जिसमें प्रायोजकों की पंजीकरण, समझौते की रिकॉ²डग, विवाद निपटान तंत्र आदि के प्रावधान शामिल किए गए हैं।
  • केंद्र सरकार, मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम, 2018 के माध्यम से राज्य सरकारों को इस मॉडल अधिनियम के अनुरूप स्पष्ट अनुबंध कृषि कानून अधिनियम करने हेतु प्रोत्साहित कर रही है।

अनुबंध कृषि के लाभ

  • कृषि में निजी निवेशः यह कृषि में निजी क्षेत्रक के निवेश को प्रोत्साहित करती है, जिससे कृषि में नई कृषि प्रौद्योगिकी, विकासशील बुनियादी ढांचे, आदि को बढ़ावा मिल सके।
  • किसान के हितों की रक्षाः यह पूर्व निर्धारित कीमतों में, कटाई के बाद होने वाले किसी प्रकार की क्षति से बचाने का अवसर प्रदान करती हैं। किसानों को उनकी उपज के लिए एक आश्वासन वाला बाजार मुहैया करवाकर एवं बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव से उन्हें सुरक्षित करके उनके जोखिम को कम करती है।
  • उत्पादकता में सुधारः यह बेहतर आय, वैज्ञानिक पद्धति एंव क्रेडिट सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाकर कृषि क्षेत्र की उत्पादकता व दक्षता को बढ़ाती है, जिससे किसान की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर एवं खाद्य सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • निर्यात में वृद्धिः यह आवश्यक फसलों को उगाने एवं भारतीय किसानों को वैश्विक आपूर्तिश्रृंखलओं से (विशेष रूप से उच्च-मूल्य वाले बागवानी उत्पादन में) जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही खाद्यान्न की बर्बादी को कम करती है।
  • उपभोक्ताओं को लाभः विपणन दक्षता में वृद्धि, बिचौलियों का उन्मूलन, विनियामक अनुपालन में कमी आदि से खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाती है।

चुनौतियां

  • एकरूपता या समरूपता का अभावः अनुबंध कृषि के संदर्भ में राज्यों के कानूनों के मध्य एकरूपता या समरूपता का अभाव है। तथा राज्य राजस्व हानि की आशंका से सुधारों को आगे बढ़ाने में अनिच्छुक रहे हैं।
  • क्षेत्रीय असमातनाः वर्तमान में यह कृषि विकसित राज्यों (पंजाब, तमिलनाडु आदि) में प्रचलित है, जबकि लघु एवं सीमांत किसानों की उच्चतम सघनता वाले राज्य इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
  • सामाजिक-आर्थिक विकृतियों को बढ़ावाः अत्याधिक लेन-देन एंव विपणन लागत के कारण खरीदार लघु एवं सीमांत किसानों के साथ अनुबंध कृषि को वरीयता नहीं देते हैं साथ ही उन्हें कोई विशेष प्रोत्साहन भी नहीं मिलता है। इससे सामाजिक-आर्थिक विकृतियों को बढ़ावा मिलता है एवं बड़े किसानों के लिए वरीयता की स्थिति पैदा होती है।
  • उर्वरकों एवं पीड़कनाशियों का अधिकतम उपयोगः यह उर्वरकों एवं पीड़कनाशियों के बढ़ते उपयोग को बढ़ावा देता है, जो प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण, मनुष्यों व जानवरों पर हानिकारक प्रभाव डालने के साथ ही मृदा की सेहत को प्रभावित करता है।

मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम, 2018

  • यह अधिनिमय किसानों के हितों की रक्षा करने पर विशेष बल देता है। इसमें कृषि विज्ञान एवं बागवानी, पशुधन, डेयरी, मुर्गी पालन व मत्स्य पालन की सभी श्रेणियों को सम्मिलित किया गया है।
  • यह हितधारकों के मध्य अनुबंध कृषि को लोकप्रिय बनाने तथा इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने हेतु राज्य स्तर पर एक अनुबंध कृषि (विकास एवं संवर्धन) प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान करता है।
  • उत्पादन के दौरान एवं उत्पादन के पश्चात् की गतिविधियों से संबंधित त्वरित व आवश्यकता-आधारित निर्णय लेने के लिए यह गांव/पंचायत स्तर पर अनुबंध कृषि सुविधा समूह के गठन का प्रावधान करता है।
  • यह किसी भी स्थिति में किसान की जमीन के स्वामित्व के हस्तांतरण (कंपनियों को) पर प्रतिबंध आरोपित करता है। यह प्रयोजकों केा किसान की भूमि पर स्थायी ढांचा बनाने से भी रोकता है।
  • अनुबंध कृषि राज्यो/संघ राज्य क्षेत्रों के संबंधित ।च्डब् अधिनियम के दायरे से बाहर होगी।

सुझाव

  • सभी राज्यों को किसानों के लिए एक समान सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु मॉडल अनुबंध कृषि अधिनियम को अपनाना एवं कार्यान्वित करना चाहिए।
  • अनुबंध कृषि में सम्मिलित खाद्य संसाधकों को कर में छूट दिया जाना चाहिए, जिससे उन्हें ग्रामीण अवसंरचना, किसान कल्याण आदि में निवेश करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
  • सरकार को किसानों एवं खरीदारों के मध्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर एवं सूचना विषमता को कम करके एक सक्षम वातावरण करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • अनुबंध कृषि के लिए आयात किए जा रहे कृषि उपकरणों पर लगने वाले शुल्क को हटाया जा सकता है।