जलवायु जोखिम सूचकांक 2025
हाल ही में, पर्यावरण थिंक टैंक जर्मनवाच द्वारा जारी ‘जलवायु जोखिम सूचकांक (CRI) 2025’ में चरम मौसम की घटनाओं के वैश्विक प्रभाव और जलवायु लचीलेपन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- दीर्घकालिक विश्लेषण (1993-2022) में भारत को छठा स्थान मिला, जबकि 2022 में इसका रैंक सुधरकर 49वां हो गया।
मुख्य बिन्दु
- जलवायु जोखिम सूचकांक का महत्व: CRI देशों को चरम मौसम की घटनाओं से प्रभावित होने की संवेदनशीलता के आधार पर रैंक प्रदान करता है।
- यह मौसम-जनित आपदाओं से हुई मानवीय और आर्थिक क्षति का तुलनात्मक विश्लेषण करता है और जलवायु नीतियों को दिशा देने में मदद करता है।
- भारत ....
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