ब्लू-इकोनॉमी : भारत के लिए संभावनाएं एवं चुनौतियां
17-19 अक्टूबर, 2023 के मध्य मुंबई में 'ग्लोबल मैरीटाइम इंडिया समिट-2023' (Global Maritime India Summit-2023) के तीसरे संस्करण का आयोजन किया गया। 17 अक्टूबर, 2023 को समिट के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समुद्री ब्लू इकोनॉमी (Maritime Blue Economy) के लिए एक ब्लूप्रिंट 'अमृत काल विजन 2047' (Amrit Kaal Vision 2047) का अनावरण किया।
- भौगोलिक और भू-रणनीतिक अवस्थिति तथा हिंद महासागर पर महत्वपूर्ण निर्भरता के साथ भारत में 'ब्लू इकोनॉमी' के क्षेत्र में अनेक संभावनाएं हैं।
- 'ब्लू इकोनॉमी' का अर्थ महासागरों की आर्थिक क्षमता का टिकाऊ तरीके से दोहन करने से है। इस अवधारणा का सर्वप्रथम प्रयोग ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बच्चों के लिए डिजिटल सुरक्षा: अधिकार, जोखिम और नियामकीय अंतराल
- 2 ऊर्जा सुरक्षा: भारत का नया रणनीतिक दृष्टिकोण
- 3 भारत की जैव-अर्थव्यवस्था: नवाचार, अवसर और नीतिगत चुनौतियाँ
- 4 शहरी भारत की पुनर्कल्पना: एकीकृत, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख बुनियादी ढांचे की ओर
- 5 लोचशील आपूर्ति शृंखलाएँ: भारत की आर्थिक सुरक्षा का एक सुदृढ़ स्तंभ
- 6 भारत में सुदृढ़ नवाचार पारितंत्र का निर्माण: क्षमताएँ और संरचनात्मक बाधाएँ
- 7 प्रतीकात्मकता से परिवर्तन की ओर: भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी
- 8 भारत में गिग कर्मियों के अधिकार: मान्यता बनाम वास्तविकता
- 9 भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु: नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ
- 10 संप्रभु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: भारत की रणनीतिक आवश्यकता

