तंजावुर चित्रकारी

हाल ही में डाक विभाग ने अपनी लॉजिस्टिक्स पोस्ट सेवा का उपयोग करते हुए भगवान श्री राम की तंजावुर कलाकृति को बेंगलुरु से अयोध्या तक सफलतापूर्वक पहुंचाया।

इतिहास और विकास

  • तंजावुर कला शैली (Tanjore Painting), दक्षिण भारत की एक शास्त्रीय चित्रकला शैली है, जिसका उद्भव 16वीं शताब्दी में तमिलनाडु के तंजावुर शहर (चोल साम्राज्य की राजधानी) में हुआ था।
  • उत्पत्ति: इस कला शैली का विकास “चोल साम्राज्य” के दौरान शुरू हुआ, लेकिन यह “विजयनगर के नायकों” और बाद में “मराठा शासकों (17वीं-19वीं शताब्दी)” के संरक्षण में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची।
  • विषय वस्तु: इसके मुख्य विषय धार्मिक और पौराणिक होते हैं।
    • इसमें अक्सर ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

इतिहास व कला एवं संस्कृति