भारत में भूमि असमानता

7 अप्रैल, 2026 को वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब ने “भारत में भूमि असमानता: प्रकृति, इतिहास और बाजार (Land Inequality in India: Nature, History, and Markets)” शीर्षक से एक अध्ययन जारी किया।

  • इस अध्ययन में ग्रामीण भारत में बढ़ती भूमि असमानता को उजागर किया गया है, जहाँ बड़ी संख्या में परिवार अब भी भूमिहीन हैं।
  • यह अध्ययन सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC), 2011 पर आधारित है, जिसमें 65 करोड़ (650 मिलियन) लोगों और 2.7 लाख गाँवों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसमें असमानता को मापने के लिए गिनी गुणांक का उपयोग किया गया है।

प्रमुख निष्कर्ष

  • भूमि का उच्च संकेन्द्रण:
    • शीर्ष 10% ग्रामीण परिवारों ....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री