संतुलित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण

वैश्विक वित्तीय परिवेश तेजी से बदल रहा है। भारत अपने संस्थागत लचीलेपन और घरेलू वित्तीय स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता के कारण आर्थिक रूप से मजबुत बना हुआ है।

  • मजबूत मौद्रिक प्रबंधन ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को आर्थिक चुनौतियों के बीच सुरक्षित और स्थिर बनाए रखा है।

मौद्रिक नीतिगत कार्यवाही और तरलता प्रबंधन

  • बदलते व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच रेपो रेट में कुल 100 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की है।
  • इन कटौतियों का उद्देश्य क्रेडिट फ्लो, निवेश और समग्र आर्थिक गतिविधि ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री