संतुलित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
वैश्विक वित्तीय परिवेश तेजी से बदल रहा है। भारत अपने संस्थागत लचीलेपन और घरेलू वित्तीय स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता के कारण आर्थिक रूप से मजबुत बना हुआ है।
- मजबूत मौद्रिक प्रबंधन ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को आर्थिक चुनौतियों के बीच सुरक्षित और स्थिर बनाए रखा है।
मौद्रिक नीतिगत कार्यवाही और तरलता प्रबंधन
- बदलते व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति ने अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच रेपो रेट में कुल 100 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की है।
- इन कटौतियों का उद्देश्य क्रेडिट फ्लो, निवेश और समग्र आर्थिक गतिविधि ....
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संबंधित सामग्री
- 1 भारत में एआई व्यवस्था/ पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
- 2 पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
- 3 राजकोषीय उन्नति
- 4 औद्योगिक उत्पादन
- 5 व्यापार प्रदर्शन: निर्यात में विविधता और सेवाओं में मजबूती
- 6 रोजगार एवं श्रम बाजार
- 7 विकास के क्षेत्रीय कारक
- 8 अर्थव्यवस्था की स्थिति
- 9 एआई के युग में श्रम की स्थिति
- 10 रोजगार और कौशल विकास

