संपीडित बायोगैस (CBG): ऊर्जा सुरक्षा हेतु आवश्यक
भारत की जीडीपी और जनसंख्या के साथ-साथ ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। देश की लगभग 70% ऊर्जा जरूरतें कोयले और जीवाश्म ईंधन से पूरी होती हैं; लेकिन घटते जीवाश्म ईंधन भंडार, बढ़ते ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन और आयातित तेल की बढ़ती लागत के कारण ऊर्जा स्रोतों के विविधिकरण का प्रयास किया जा रहा है।
- 2021 के अंत तक, भारत में कुल स्थापित क्षमता का 154.40 गीगावाट (GW) नवीकरणीय था, जिसमें 10.17 गीगावाट बायोमास ऊर्जा के लिए जिम्मेदार था।
- नवीकरणीय ऊर्जा के लिए अधिकांश ध्यान सौर और पवन ऊर्जा पर केन्द्रित हो गया है; लेकिन कार्बन फुटप्रिंट को कम करने ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 रिवर इंटरलिंकिंग: मुद्दे एवं लाभ
- 2 जल सुरक्षा की आवश्यकता
- 3 प्राकृतिक संसाधान प्रबंधान
- 4 जीरो बजट नेचुरल फ़ार्मिंग
- 5 भारत में कृषि विपणन प्रणाली: चुनातियाँ वं उपाय
- 6 कृषि में नवीन प्रौद्योगिकी
- 7 भारत में कृषि सब्सिडी: महत्व एवं मुद्दे
- 8 भारत में परिशुद्धता कृषि: चुनौतियां एवं उपाय
- 9 कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव एवं समाधान
- 10 क्रिप्टोकरेंसी नियामक ढांचा

