भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ़ पहल

1. अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमयः अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (Comprehensive Convention on International Terrorism-CCIT) को 1996 में भारत ने प्रस्तावित किया था। लेकिन अभी तक दो दशक बाद भी आतंकवाद को परिभाषित करने पर सहमति नहीं बन पाई है। भारत के प्रयासों के बावजूद CCIT के अंतिम रूप और अनुमोदन पर मुख्य रूप से अमेरिका, इस्लामिक देशों के संगठन (Organizations of Islamic Countries-OIC) और लैटिन अमेरिकी देशों के विरोध के कारण गतिरोध बना हुआ है।

2. राष्ट्रीय जांच एजेंसीः राष्ट्रीय जांच एजेंसी भारत में आतंकवाद से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक केंद्रीय एजेंसी है। यह केंद्रीय आतंकवाद निरोधक कानून की प्रवर्तक एजेंसी के रूप में कार्य करती है। एजेंसी को राज्यों से विशेष अनुमति के बिना राज्यों में आतंकवादी संबंधित अपराधों से निपटने का अधिकार है। यह एजेंसी भारत की संसद द्वारा 31 दिसंबर, 2008 को राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के साथ अस्तित्व में आई।

3. राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्रः 26/11 मुंबई हमले के बाद राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र (National Counter Terrorism Centre-NCTC) को गठित करने पर विचार किया गया था। आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए यह केंद्र, इंटेलिजेंस ब्यूरो, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग, संयुक्त इंटेलिजेंस समिति और राज्यों की खुफिया एजेंसियों के लिए नोडल एजेंसी का काम करेगा। ये सारी एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र को रिपोर्ट करेंगी।

कई राज्यों जैसे- गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल ने इसका कड़ा विरोध किया है। राज्यों का कहना था कि भारतीय संविधान के अनुसार कानून-व्यवस्था और पुलिस के मुद्दे सरकार के विषय हैं। इसके गठन से भारतीय संविधान के संघीय ढांचे का उल्लंघन होगा।

पृष्ठभूमि

‘आतंकवाद’ शब्द का तात्पर्य भय एवं चिंता की स्थिति है। इसका उद्देश्य है, हिंसा द्वारा जनता में आतंक फैलाकर अपनी शक्ति प्रदर्शित करना।

आतंकवाद एक प्रकार के माहौल को कहा जाता है। इसे एक प्रकार की हिंसात्मक गतिविधि के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो कि अपने आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक एवं विचारात्मक लक्ष्यों की प्रतिपूर्ति के लिए गैर-सैनिक अर्थात नागरिकों की सुरक्षा को भी निशाना बनाते हैं। गैर-राज्य कारकों द्वारा की गई राजनीतिक, वैचारिक या धार्मिक हिंसा को भी आतंकवाद की श्रेणी का ही समझा जाता है।

भारत में आतंकवाद के प्रकार

1. राष्ट्रवाद से प्रेरित आतंकवादः आतंक का यह रूप या तो किसी देश में भीतर या स्वतंत्र देश में या पड़ोसी देश में एक अलग राज्य बनाने पर केंद्रित है या एक जातीय समूह के विचारों/प्रतिक्रिया का दूसरे के खिलाफ जोर देने पर है।

2. धार्मिक आतंकवादः आतंक का यह रूप धार्मिक अनिवार्यता, एक निर्धारित कर्तव्य या एक विशेष धार्मिक समूह के लिए या एक से अधिक धार्मिक समूहों के प्रति एकजुटता पर केंद्रित है। मुंबई 26/11, 2008 में पाकिस्तान में एक इस्लामी समूह का आतंकवादी हमला था जो भारत में धार्मिक आतंकवाद का एक उदाहरण है।

3. वामपंथी आतंकवादः आतंक का यह रूप आर्थिक विचारधारा पर केंद्रित है। इसमें मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक ढांचे को चरित्र में आर्थिक रूप से शोषण के रूप में देखा जाता है और हिंसक साधनों के माध्यम से क्रांतिकारी परिवर्तन आवश्यक माना जाता है। झारखंड और छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा भारत में वामपंथी आतंकवाद का उदाहरण है।

पिछले चार वर्षों में वामपंथी अतिवाद के परिदृश्य में ठोस सुधार आया है। हिंसा की घटनाओं में गिरावट हुई है। वामपंथी अतिवाद भौगोलिक फैलाव 2013 में 76 जिलों में था, वह अब 58 जिलों तक सीमित रह गया है।

4. नार्काे आतंकवादः आतंक का यह रूप अवैध मादक पदार्थों के यातायात क्षेत्र बनाने पर केंद्रित है। उत्तर-पश्चिम भारत में नशीली दवाओं की तस्करी भारत में नार्को-आतंकवाद का एक उदाहरण है। पंजाब में जहाँ नशीली दवाओं का खतरा व्यापक रूप से पैदा हो गया है, ने पाकिस्तान प्रायोजित नार्को-आतंकवाद के शिकार होने के आधार पर ‘विशेष श्रेणी का दर्जा’ की मांग की है।