भारत में 5G स्पेक्ट्रम

30 दिसंबर, 2019 दूरसंचार मंत्रालय भारत में 5G स्पेक्ट्रम के लिए परीक्षण (trial) करने का निर्णय लिया है। भारत सरकार देश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड के लिए जल्द ही 5G सेवाओं की सार्वजनिक शुरुआत के लिए तत्पर है; जबकि चीन, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी जैसे देशों के कुछ क्षेत्रों में 5जी सेवा का संचालन शुरू हो चुका है। 5G 5वीं पीढ़ी का मोबाइल नेटवर्क है। यह पिछली पीढ़ियों की तुलना में एक उन्नत तकनीक है और बड़ी भूमिका के निर्वहन में सक्षम है। 5G शब्द का उपयोग लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (Long-Term Evolution-LTE) या 4G की अगली पीढ़ी का वर्णन करने के लिये किया जाता है।

5G नेटवर्कः 5G का आवृत्ति स्पेक्ट्रम मिलीमीटर तरंगों (millimeter waves), मध्य-बैंड (mid-band) और लघु-बैंड (low-band) तरंगों में विभाजित है।

  • लो-बैंड पूर्ववर्ती, 4G के समान आवृत्ति रेंज का उपयोग करता है। इसमें मिलीमीटर तरंग सबसे तेज होती है, जिसकी आवृत्ति 24 गीगाहर्ट्ज से 72 गीगाहर्ट्ज तक होती है, जो अत्यधिक उच्च आवृत्ति की निचली सीमा से ऊपर है।
  • मिलीमीटर तरंगों को दीवारों और खिड़कियों को भेदने में कठिनाई होती है, इसलिए इनडोर कवरेज सीमित होता है। इस नेटवर्क में शुरुआत में उच्च आवृत्ति स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल किया गया, जिसमें ऑनलाइन एक्सेस के लिए छोटी रेंज लेकिन उच्च क्षमता थी।
  • इसकी सीमाओं और दीवारों व अन्य अवरोधों को देखते हुए कम आवृत्ति वाले स्पेक्ट्रम का उपयोग किया जा रहा है। 5G नेटवर्क हाई-स्पीड इंटरनेट और कनेक्टिविटी सेवा प्रदान करेगा।
  • यह माना जाता है कि इसमें वीडियो बफरिंग नहीं होगी, क्योंकि डेटा ट्रांसफर बहुत तेजी से होगा।
  • रिपोर्टों के अनुसार, 5G नेटवर्क एक मिलीसेकंड में डेटा वितरित करेगा, जबकि 4G सेवाओं में लगभग 70 मिलीसेकंड समय लगता है। यह भी माना जाता है कि 5G नेटवर्क 3,500 मेगाहर्ट्ज बैंड पर काम करेगा।
  • यह नेटवर्क उच्च स्पीड के साथ इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IOT) की क्षमता, न्यून विलंबता (Low Latency) और अन्य कई अनुप्रयोगों (Application) की सुविधा प्रदान करेगा। यह नेटवर्क न केवल लोगों को आपस में जोड़ेगा; बल्कि मशीनों, वस्तुओं और उपकरणों को भी इंटरकनेक्ट और कंट्रोल करेगा।
  • यह प्रदर्शन और दक्षता के नए स्तरों को उपलब्ध कराएगा। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स के लिये उपयुक्त नेटवर्क साबित हो सकता है।
  • यह नेटवर्क बहुत कम ऊर्जा का उपयोग करने के साथ ही विकिरण भी कम उत्पन्न करता है और व्यापक कनेक्टिविटी के माध्यम से बहुत अधिक डेटा गति (Speed) प्रदान करता है।

स्पाइनेकर

  • स्पाइनेकर दुनिया का सबसे बड़ा सुपर कंप्यूटर है, जो मानव मस्तिष्क के समान काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • नवगठित मिलियन-प्रोसेसर-कोर स्पाइकिंग न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर (Spiking Neural Network Architecture- SpiNaker) मशीन प्रति सेकंड 200 मिलियन से अधिक गणनाओं को पूरा करने में सक्षम है। इसमें प्रत्येक चिप्स में 100 मिलियन ट्रांजिस्टर हैं।
  • विशेषताः स्पाइनेकर यूनिक है, क्योंकि पारंपरिक कंप्यूटरों के विपरीत यह मानक नेटवर्क के माध्यम से बिंदु ए से बी तक बड़ी मात्रा में जानकारी भेजकर संवाद नहीं करता है। यह मस्तिष्क के बड़े पैमाने पर समांतर संचार आर्किटेक्चर की नकल करता है, जो हजारों विभिन्न गंतव्यों तक छोटी मात्रा में अरबों जानकारी भेजता है।
  • कार्यः अब शोधकर्ता रियल टाइम में एक बिलियन जैविक न्यूरॉन्स को तैयार करने से केवल एक कदम दूर है। यह विचार वस्तुतः इस तथ्य से आया कि चूहे के मस्तिष्क में लगभग 100 मिलियन न्यूरॉन्स होते हैं, जबकि मानव मस्तिष्क उससे 1,000 गुना बड़ा होता है।
  • एक अरब न्यूरॉन्स मानव मस्तिष्क का एक प्रतिशत होता है। मानव मस्तिष्क में 100 अरब मस्तिष्क कोशिकाएं या न्यूरॉन्स होते हैं, जो लगभग एक चौथाई तंत्रिका ऊतकों की संधि ‘स्यनेप्सस’ (synapses) के माध्यम से जुड़े होते हैं।