भारत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता

भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी आबादी के साथ सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और इसकी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्रांति में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। नीति आयोग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की है। यह नीति इस बात पर केंद्रित है कि भारत सामाजिक और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों का लाभ कैसे उठा सकता है?

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए राष्ट्रीय रणनीति का उद्देश्य

पहुंच, सामर्थ्य, कुशल विशेषज्ञता की कमी और असंगतता की चुनौतियों का समाधान करने के लिए मानव क्षमताओं को बढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना।

  • एआई पहल का प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए समाधान विकसित करना; अनुसंधान, विकास, प्रौद्योगिकी और जिम्मेदार एआई से संबंधित वैश्विक चुनौतियों से निपटने का प्रयास करना।
  • सहयोग और साझेदारी का लाभ उठाना और सभी के लिए समृद्धि सुनिश्चित करना। इस प्रकार, #AIforAll का अर्थ है कि एआई के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी नेतृत्व करना और ‘ग्रेटर गुड’ हासिल करना।

राष्ट्रीय एआई रणनीति

राष्ट्रीय एआई रणनीति एक रूपरेखा पर आधारित है, जो भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के अनुकूल है। इसका उद्देश्य, एआई विकास का लाभ उठाने के लिए पूरी क्षमता हासिल करना है। यह एक ढांचा है, जो निम्नलिखित तीन अलग-अलग, अंतर-संबंधित घटकों का एकत्रीकरण हैः

1. अवसरः भारत के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आर्थिक प्रभाव

  • एआई में पूंजी और श्रम की भौतिक सीमाओं को दूर कर, मूल्य वृद्धि के नए स्रोतों को खोलने की क्षमता है। आर्थिक प्रभाव के दृष्टिकोण से एआई में विकास को बढ़ाने की क्षमता है, जो निम्न को सक्षम करता हैः
  • इंटेलिजेंट ऑटोमेशन, यानी जटिल भौतिक कार्यों को स्वचालित करने की क्षमता, जिसमें अनुकूलन क्षमता और चपलता की आवश्यकता होती है।
  • श्रम और पूंजी वृद्धिः मानव को अपनी भूमिका के उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाना, जो सबसे अधिक मूल्यवान हो, मानव क्षमताओं को पूरक बनाते हैं और पूंजी दक्षता में सुधार करते हैं।
  • इनोवेशन डिफ्यूजन यानी नवाचारों को प्रारंभ करना, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के माध्यम से फैलता है।
  • एक क्षेत्र में एआई नवाचारों का दूसरे में सकारात्मक परिणाम होगा, क्योंकि उद्योग क्षेत्र मूल्य शृंखला के आधार पर अन्योन्याश्रित हैं। एआई के माध्यम से आर्थिक मूल्य नए सामान, सेवाओं और नवाचारों से निर्मित होने की उम्मीद है।
  • एक्सेंचर की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान है कि एआई 2035 तक भारत की वार्षिक विकास दर को 1.3 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

2. ‘ग्रेटर गुड’ के लिए एआईः सामाजिक विकास और समावेशी विकास

  • यह अपेक्षा की जाती है कि एआई का परिवर्तनकारी प्रभाव ‘ग्रेटर गुड’ को बढ़ावा दे, यानी इसका प्रभाव अधिक से अधिक अच्छा हो; जैसे जीवन की गुणवत्ता में सुधार और देश के एक बड़े हिस्से तक उनकी पसंद के अनुसार पहुँच।
  • एआई प्रौद्योगिकी का उपयोग विभिन्न मुद्दों को हल करने में किया जा सकता है; जैसेः
    • औपचारिक वित्तीय उत्पादों की पहुँच से बाहर रहे जनसंख्या के बड़े वर्गों को गुणवत्तापूर्ण वित्तीय सुविधाओं तक पहुँच प्रदान कर, समावेशी वित्तीय विकास सुनिश्चित करना।
    • किसानों को वास्तविक समय की सलाह देना और उत्पादकता बढ़ाने की दिशा में अप्रत्याशित कारकों को दूर करने में मदद करना।
    • तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आबादी की मांगों को पूरा करने के लिए स्मार्ट और कुशल शहरों और बुनियादी ढांचे का निर्माण।

3. दुनिया के 40 प्रतिशत लोगों के लिए ‘एआई गैरेज’

  • भारत मापनीय समाधान (scalable solutions) विकसित करने के लिए वैश्विक उद्यमों और संस्थानों के लिए एक आदर्श ‘प्ले ग्राउंड’ प्रदान करता है; जिसे बाकी विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में आसानी से लागू किया जा सकता है।
  • सरल शब्दों में, ‘भारत के लिए समाधान’ का अर्थ है, दुनिया के 40% या उससे अधिक के लिए समाधान। उदाहरण के लिए, भारत में एक बार विकसित और परिष्कृत एआई आधारित उन्नत तपेदिक समाधान (दुनिया भर में मृत्यु के शीर्ष 10 कारणों में से एक) आसानी से दक्षिण पूर्व एशिया या अफ्रीका के देशों में लागू किया जा सकता है।
  • विकासशील देशों में कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि क्षेत्रों में मुद्दों की समानता एआई समाधान विकसित और उपयोग करने आदर्श स्थिति प्रदान करती है, जिसे कई बाजारों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है।
  • इसलिए, भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए अनुकूल एआई प्रौद्योगिकियों को आसानी से अपने स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के आधार पर अन्य विकासशील देशों के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। इसी तरह, एआई प्रौद्योगिकियां जो भारत की भाषाई रूप से विविध आबादी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में सक्षम हैं, अन्य विकासशील देशों में बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
  • एआई में एक लीडर के रूप में भारत की क्षमता का एक और पहलू है कि इसने प्रौद्योगिकी समाधान प्रदाता के रूप में अपने को साबित किया है। भारतीय आईटी कंपनियां दुनिया भर में सेवा प्रदान करती हैं एवं प्रौद्योगिकी उत्पादों के विकास में अग्रणी रही हैं।
  • इसके अलावा, भारत की आईटी सक्षमता, अवसरों के साथ आपस में मिली हुई हैं, जैसे यह कई भाषाओं के बीच पारस्परिकता (interoperability), सामंजस्य बैठाने में बहुत आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करता है।

भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र

नीति आयोग ने उन पाँच क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है, जिसे हल करने में एआई के सबसे अधिक सहायक होने की कल्पना की गई हैः

1. स्वास्थ्य क्षेत्रः स्वास्थ्य सेवा में एआई का प्रयोग कर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने से सम्बंधित उच्च अवरोधों के मुद्दों को हल किया जा सकता है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जो खराब संपर्क सुविधा और उच्च गुणवत्ता वाले पेशेवरों की सीमित आपूर्ति से पीडि़त हैं। संचालित नैदानिकी सेवाएँ, व्यक्तिगत उपचार, संभावित महामारी की शुरुआती पहचान जैसे अन्य मामलों में एआई का उपयोग किया जा सकता है। इस क्षेत्र में प्रमुख पहल निम्नलिखितहैं:

  • 3नेत्र (3Nethra): नीति आयोग, माइक्रोसॉफ्ट और फोरस हेल्थ के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि डायबिटिक रेटिनोपैथी की शुरुआती पहचान के लिए एक तकनीक तैयार की जा सके। 3नेत्र फोरस हेल्थ द्वारा विकसित, एक पोर्टेबल डिवाइस है, जो आम आंखों की समस्या का जांच कर सकता है। माइक्रोसॉफ्ट के रेटिनल इमेजिंग API का उपयोग करके इस डिवाइस के एआई क्षमताओं को एकीकृत किया जा सकता है। 3नेत्र डिवाइस के ऑपरेटरों को यह AI संचालित अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में सक्षम बनाता है, तब भी जब वे सुदूर क्षेत्रों में नेत्र जांच शिविर में काम कर रहे हों।
  • वातस्फीति (Emphysema) का निदान करने के लिए AI आधारित समाधानः जापानी प्रौद्योगिकी फर्म एनटीटी डाटा सर्विसेज (NTT DATA Services) ने पिछले साल पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल के साथ गठजोड़ किया। एनटीटी डाटा सर्विसेज फेफड़ों की एक पुरानी बीमारी, वातस्फीति का निदान के लिए एआई आधारित समाधान दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल को प्रदान कर रही है। छः महीने की अवधि में इसके सबूत-अवधारणा निदान की दर पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में 170% अधिक थी।
  • भविष्य में किये जाने वाले निदानः प्रौद्योगिकी सेवा प्रदाता ‘पर्सिस्टेंट सिस्टम्स’ प्रीडेक्टिव डाइग्नोसटिक्स (predictive diagnostics) के लिए एआई और मशीन लर्निंग का उपयोग कर रही हैं। कंपनी ने प्रशांति कैंसर केयर मिशन के साथ भागीदारी की है, ताकि एक प्लेटफॉर्म विकसित की जा सके; जो स्तन कैंसर के रोगियों में नए कारकों की पहचान करेगा और बीमारी का जल्द से जल्द पता लगाएगा।

2. कृषि क्षेत्रः एआई के माध्यम से खाद्य क्रांति लाने और भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है (वैश्विक स्तर 2050 तक अतिरिक्त 2 बिलियन लोगों की खाद्य आवश्यकता को पूरा करने के लिए आज की तुलना में 50% अधिक खाद्यान्न का उत्पादन करने की आवश्यकता होगी)। इसकी सहायता से आवश्यकताओं की पूर्ति, सुनिश्चित सिंचाई की कमी एवं कीटनाशकों और उर्वरकों के अति प्रयोग / दुरुपयोग जैसी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता विकसित की जा सकती है। इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कदम निम्नलिखित हैंः

  • AI बोवाई ऐपः इस ऐप को ICRISAT के सहयोग से माइक्रोसॉफ्ट ने विकसित किया है। यह माइक्रोसॉफ्ट कोर्टाना इंटेलिजेंस सुइट (Microsoft Cortana Intelligence Suite) द्वारा संचालित किया जाता है, जिसमें मशीन लर्निंग भी शामिल है। किसानों को अपने खेतों में कोई सेंसर लगाने या कोई पूंजीगत व्यय करने की आवश्यकता नहीं है। सभी आवश्यक जानकारी एक फोन में टेक्स्ट मेसेज द्वारा भेज दिए जाते हैं। सलाह में आगे की बुवाई की तारीख, मिट्टी परीक्षण आधारित उर्वरक आवेदन, खेत की जुताई, खाद, बीज उपचार, आगे की जाने वाली बुवाई की गहराई और भी अन्य जानकारी दी जाती है। 2017 में, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में खरीफ फसल चक्र (बरसात) के दौरान 3,000 से अधिक किसानों तक कार्यक्रम का विस्तार किया गया, जिसमें मूंगफली, रागी, मक्का, चावल और कपास सहित अन्य फसले भी शामिल थे। फसलों के उपज में 10% से 30% तक वृद्धि हुई।
  • सटीक खेती के लिए AI: नीति आयोग और IBM ने किसानों को रियल टाइम एडवाइजरी प्रदान करने के लिए समझौता किया है। इसमें एआई का उपयोग करते हुए एक फसल उपजाने वाली तकनीक का मॉडल विकसित किया जाएगा, जिससे फसल उत्पादकता में सुधार, मिट्टी की उपज, कृषि आदानों को नियंत्रित करने और कीट/बीमारी के प्रकोप पर प्रारंभिक चेतावनी जारी की जाएगी। आईबीएम का एआई मॉडल रिमोट सेंसिंग (इसरो), मृदा स्वास्थ्य कार्ड, आईएमडी के मौसम की भविष्यवाणी, फसल फेनोलॉजी आदि से प्राप्त डेटा का उपयोग करेगा। यह परियोजना असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 10 आकांक्षी जिलों में कार्यान्वित की जा रही है।
  • तृणनाशक का इष्टतम उपयोग के लिए एआईः ब्लू रिवर टेक्नोलॉजी ने कंप्यूटर विजन और मशीन लर्निंग तकनीक को डिजाइन और एकीकृत किया है, जो किसानों को तृणनाशक के छिड़काव की जहाँ आवश्यकता है, वहां छिड़काव करने में सक्षम बनाता है।

3. शिक्षा और कौशल क्षेत्रः एआई भारतीय शिक्षा क्षेत्र में संभावित रूप से गुणवत्ता और पहुंच के मुद्दों को हल कर सकता है। संभावित उपयोग के मामलों में व्यक्तिगत कार्यों के माध्यम से सीखने के अनुभव को बढ़ाना, प्रशासनिक कार्यों को स्वचालित और तेज करना तथा ड्रॉपआउट को कम करने या छात्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण की सिफारिश करने के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता का अनुमान लगाना शामिल है।

  • बेहतर अन्तरक्रियाशीलता के लिए स्मार्ट सामग्रीः कंटेंट टेक्नोलॉजीज इंक (CTI) एक AI अनुसंधान और विकास से संबंधीत कंपनी है, जो विशिष्ट रूप से निर्मित शैक्षिक सामग्री प्रदान करने के लिए AI विकसित कर रही है। यह मौजूदा पाठ्यक्रम सामग्री, पाठ्यपुस्तकों और पाठ्यक्रम को आत्मसात करने और विश्लेषण करने के लिए डीप लर्निंग का उपयोग करती है, विशिष्ट रूप से निर्मित शैक्षिक सामग्री बनाती है।
  • ReadEx: नीति आयोग द्वारा हाल ही में किए गए कथॉन में ‘ReadEx’ भी शामिल है, जो एक एंड्रॉइड एप्लिकेशन है। यह एनएलपी, सामग्री सिफारिशों और फ्लैशकार्ड निर्माण का उपयोग करके वास्तविक समय पर प्रश्न का निर्माण करता है।
  • ड्रॉपआउट दर की भविष्यवाणीः माइक्रोसॉफ्ट, आंध्र प्रदेश में ड्रॉप आउट की भविष्यवाणी करने में मदद कर रहा है। विशिष्ट मापदंडों, जैसे लिंग, सामाजिक-आर्थिक जनसांख्यिकी, अकादमिक प्रदर्शन, स्कूल के बुनियादी ढांचे और शिक्षक कौशल आदि का उपयोग किया जा रहा है। एज्योर मशीन लर्निंग द्वारा संचालित एप्लीकेशन का प्रयोग कर अनुमानित पैटर्न का पता लगाया जा रहा है। इसके आधार पर, जिला शिक्षा अधिकारी हस्तक्षेप कर सकते हैं और उन छात्रों की मदद कर सकते हैं, जिन्हें सबसे अधिक जरूरत है। इन छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और परामर्श सत्र आयोजित किए जा सकते हैं। मशीन लर्निंग और एनालिटिक्स के आधार पर, आंध्र प्रदेश सरकार ने अगले शैक्षणिक वर्ष (2018-19) के लिए विशाखापत्तनम जिले के सरकारी स्कूलों से लगभग 19,500 संभावित ड्रॉपआउट की पहचान की है।

4. स्मार्ट मोबिलिटी एंड ट्रांसपोर्टेशनः इसके संभावित उपयोग में राइड शेयरिंग के लिए स्वायत्त गाडि़यों का समूह का प्रबंधन, अर्द्ध-स्वायत्त कार्य जैसे चालक सहायता और प्रीडिक्टिव इंजन मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस आदि शामिल हैं। स्वायत्त ट्रक चालन और डिलीवरी तथा बेहतर यातायात प्रबंधन जैसे अन्य क्षेत्रों में एआई का प्रयोग किया जा सकता है।

  • रेलवे के लिए AI: अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2012-2017 के बीच 500 से अधिक रेल दुर्घटनाएं हुईं, उनमें से 53% पटरी से उतरने के कारण हुईं। ट्रेन चालक रियलटाइम ऑपरेशनल डेटा के माध्यम से स्थितिजन्य बुद्धिमत्ता प्राप्त कर सकते हैं। हाल ही में, रेल मंत्रालय ने निगरानी के लिए एआई का उपयोग करने का निर्णय लिया है।
  • LogiNext: यह एक AI संचालित स्टार्टअप है, जो फील्ड सेवाओं को प्रबंधित करने में मदद करता है। यह अपने उपयोगकर्ताओं को हर एक मिनट शिपमेंट को ट्रैक (वास्तविक समय) करने में सक्षम बनाता है। यह पिकअप से डिलीवरी तक हर एक विवरण प्रदान करता है।

5. स्मार्ट सिटीज और इन्फ्रास्ट्रक्चरः नए विकसित स्मार्ट शहरों और बुनियादी ढांचे में एआई का एकीकरण भी तेजी से शहरीकरण की मांग को पूरा करने और उन्हें जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद कर सकता है। संभावित उपयोग के मामलों में भीड़ प्रबंधन को कम करने और बेहतर भीड़ प्रबंधन के माध्यम से यातायात नियंत्रण शामिल हैं।

  • पुणेः एक यथार्थ स्मार्ट सिटीः स्मार्ट शहरों को सुरक्षित बनाने में एआई की अहम भूमिका है। पुणे को यथार्थ स्मार्ट सिटी बनाने के लिए टोरंटो विश्वविद्यालय ने आईआईटी-बॉम्बे के साथ साझेदारी की है। स्मार्ट सिटी से सम्बंधित समस्याओं के समाधान के लिए एआई समाधान को प्रयोग किया जायेगा। यह साझेदारी पुणे में आने वाले ग्रामीण आप्रवासन, साइबर सुरक्षा, डिजिटल सिस्टम इंटरऑपरेबिलिटी और किफायती आवास जैसी समस्याओं से निपटने पर केंद्रित है।
  • स्मार्ट सिटी और इसके AI: संचालित-IoT उपयोग के मामलेः एक स्मार्ट शहर में AI संचालित IoT सक्षम प्रौद्योगिकी के बहुत सारे उपयोग हैं, इसे बेहतर वातावरण से लेकर सार्वजनिक परिवहन और सुरक्षा बढ़ाने तक प्रयोग किया जा सकता है।
  • इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), मुंबईः इसका उद्देश्य यातायात के प्रवाह में सुधार कर यात्रा में लगने वाले समय में कटौती करना है। ITMS के अंतर्गत 4,705 स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नलों, 300 रेड लाइट उल्लंघन का पता लगाने वाले कैमरे, गलत तरीके से चलने वाले वाहनों की पहचान करने के लिए 925 स्वचालित रूप से नंबर प्लेट पहचान करने वाले कैमरे और 300 विशेष कैमरे अवैध पार्किंग का पता लगाने के लिए स्थापित किये जायेंगे। सिस्टम सॉफ्टवेयर द्वारा कैप्चर किए गए डायनामिक ट्रैफिक डेटा के आधार पर, ट्रैफिक पुलिस सिग्नल टाइमिंग को संशोधित करने और प्रवाह को विनियमित करने में भी सक्षम होगी।

भारत में एआई तैनाती के लिए चुनौती

भारत को AI जैसी विघटनकारी तकनीक के क्षेत्र में पूर्ण क्षमता का दोहन कराने के लिए इसके समक्ष उपस्थित समस्याओं को दूर करना होगा।

  • तकनीकी चुनौतियाँ: डेटा पारिस्थितिक तंत्र को शक्ति प्रदान करने वाली नीति अनुपस्थिति है, अर्थात इंटेलिजेंट डेटा तक पहुंच न होना, एआई को अपनाने की उच्च संसाधन लागत, कम जागरुकता, एआई के प्रयोग से संबंधति सहयोगी दृष्टिकोण की अनुपस्थिति, एआई में अपर्याप्त विशेषज्ञता की उपलब्धता, कौशलयुक्त जनशक्ति की कमी है।

भारत के लिए रोडमैप नीति

दो-स्तरीय संरचना के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता में मूलभूत और अनुप्रयुक्त अनुसंधान को प्रोत्साहन देनाः

  • सेंटर ऑफ रिसर्च एक्सीलेंस (CORE) ने नए ज्ञान के सृजन के माध्यम से मौजूदा कोर रिसर्च की बेहतर समझ विकसित करने और प्रौद्योगिकी के मोर्चे को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
  • परिवर्तनीय कृत्रिम बुद्धिमता के लिए आदर्श अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीटीएआई) को अनुप्रयोग-आधारित अनुसंधान संचालित करता है। आईसीटीएआई निजी क्षेत्र के साथ सहयोग करता है, जो इसका एक प्रमुख पहलू माना जाता है।
  • एआई में प्रौद्योगिकी नेतृत्व का लक्ष्य हासिल करने के लिए ‘मूनशूट (moonshot) प्रोजेक्ट’ पर कार्य किया जाना चाहिए।
  • एक समर्पित सुपरनैशनल एजेंसी "CERN वित AI" विकसित करना, जो एआई से सम्बंधित बड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करेगी।
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सम्बंधित संस्थानों और उद्योगों के कौशल विकास में तेजी लाना और तकनीकी योग्यता के मानदंड को समय के अनुसार बदलना। यह निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर और विकेंद्रीकृत शिक्षण तंत्र को अपनाने के माध्यम से किया जा सकता है।
  • साझेदारी और सहयोग के माध्यम से मूल्य शृंखला में एआई को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। एआई द्वारा प्रदान किए जाने वाले फायदों के बारे में और स्टार्टअप का समर्थन करने के बारे में जागरुकता फैलाना।
  • एआई को त्वरित रूप से अपनाने के लिए सरकार एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकती है। सरकार, बुनियादी ढांचे के विकास, अनुसंधान के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देकर और सरकार की विभिन्न जरूरतों को पूरा करने के लिए समाधान ढूँढ़ कर, मांग पैदा कर सकती है।
  • उपयोगकर्ता की गोपनीयता और सुरक्षा के लिए एक डेटा सुरक्षा ढांचा स्थापित करना, जिसे कानून का समर्थन प्राप्त हो।
  • राष्ट्रीय डेटा संरक्षण एवं गोपनीयता कानून के मानक को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना और स्व-विनियमन को प्रोत्साहित करना।
  • प्रत्येक अनुसंधान उत्कृष्टता केंद्र में आचार परिषद की स्थापना की जा सकती है और यह उम्मीद की जाती है कि सभी कोर एआई प्रौद्योगिकी और उत्पादों को विकसित करते समय एक मानक अभ्यास का पालन किया जाएगा।
  • चिकित्सकों और एआई डेवलपर्स के बीच अंतर को कम करने में मदद करने के लिए आईपी सुविधा केंद्रों की स्थापना करना, जिससे बौद्धिक संपदा के मुद्दों का समाधान हो सके। बौद्धिक संपदा अधिकार प्रदान करने वाले अधिकारियों, न्यायपालिका और न्यायाधिकरणों को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
  • नियामक चुनौतियां: एआई डेटा समाधानों के विकास के लिए प्राथमिक वस्तु है और डेटा की उचित हैंडलिंग, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना मुख्य मुद्दे हैं। सहमति के बिना डेटा उपयोग, डेटा के माध्यम से व्यक्तियों की पहचान का जोखिम, डेटा चयन पूर्वाग्रह और एआई मॉडल के परिणामस्वरूप भेदभाव और डेटा एकत्रीकरण में विषमता शामिल हैं।
  • सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां: समाज में डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिए एक समाधान खोजने की आवश्यकता है और ऐसे नवाचार को तलाशने की चुनौती है, जो सार्वजनिक वित्तयन और साझेदारी के लायक हो।
  • नैतिक चुनौतियां: जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान हमारे जीवन के अंग बन रहा है, नैतिकता, गोपनीयता और सुरक्षा से सम्बंधित प्रश्न भी उभर रहे हैं।

निष्कर्ष

कृत्रिम बुद्धिमत्ता 21वीं सदी का गेम-चेंजर है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता समावेशी और धारणीय सामाजिक-आर्थिक विकास में सहयोगी हो सकता है। एआई के विकास से उपलब्ध क्षमता का दोहन करने के लिए अनुसंधान एवं विकास पर जोर देना होगा। एआई के विकास के साथ ही कोई भी उद्योग इसके प्रभाव से मुक्त नहीं होगा। व्यवधान आने से पहले ही इसका समाधान कर देना चाहिए, जो एआई व्यवधान के लिए भी सही है।