राष्ट्रीय इस्पात नीति

इस्पात उत्पादन के दो महत्वपूर्ण आदानों-उच्च उत्पादन वाले लौह अयस्क और गैर-कोकिंग कोयले की घरेलु उपलब्धता के कारण इस्पात उत्पादन में भारत का प्रतिस्पर्द्धात्मक लाभ प्राप्त है। भारत में स्टील, मजबूत MSME क्षेत्र और प्रतिस्पर्द्धी श्रम लागत के साथ अपेक्षाकृत युवा कार्य बल के कारण एक विशाल और तेजी से बढ़ता बाजार है इसलिए, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी होने के साथ-साथ स्टील उद्योग को चलाने और उच्च अंतः मूल्य वर्द्धित स्टील पर ध्यान केंद्रित करने के साथ स्टील उत्पादन को बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 पेश की गई।

उद्देश्य

  • 2030-31 तक प्रति व्यक्ति स्टील की खपत को बढ़ाकर 160 किलोग्राम करना।
  • 2030-31 तक रणनीतिक अनुप्रयोगों के लिए उच्च ग्रेड ऑटोमोटिव स्टील, इलेक्ट्रिकल स्टील, विशेष स्टील्स और मिश्र धातु की मांग को पूरा करना।
  • कोकिंग कोल पर आयात निर्भरता को कम करने के लिए वाशड़ कोकिंग कोल की घरेलू उपलब्धता में 2030-31 तक 65% से लगभग 85% तक वृद्धि करना।
  • मूल्य वर्द्धित/उच्च ग्रेड स्टील की वैश्विक उपस्थिति बढ़ाना।
  • पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ इस्पात उत्पादन में इस उद्योग को विश्व कुशल बनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • इस्पात उद्योग के कार्बन फुट-प्रिंट को काफी हद तक कम करना।

इसमें शामिल रणनीतियाँ निम्नानुसार हो सकती हैं

  • घरेलू स्टील की मांग में वृद्धि करना।
  • स्टील क्षमता में वृद्धि।
  • कच्चे माल की उचित उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • विवाद मुक्त भूमि, जल और बिजली की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय करना।
  • ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्यों में रेलवे, रोडवेज, बिजली उत्पादन जैसे बुनियादी ढांचे का विकास करना।
  • देश में उत्पादित लौह और इस्पात उत्पादों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा निर्धारित मानकों का उचित कार्यान्वयन करना।
  • न्यून संसाधन गहन और न्यून ऊर्जा गहन इस्पात बनाने की तकनीकी विकसित करने के लिए अनुसंधान संस्थानों को प्रोत्साहित करना।
  • एमएसएमई स्टील सेक्टर में स्टील/स्पंज आयरन सेक्टर के लिए विशेष रूप से गैर-कोकिंग कोयला और लौह अयस्क की नीलामी की सुविधा प्रदान करना।
  • स्टेनलेस स्टील, मिश्र धातु और विशेष इस्पात में मूल्यवर्द्धन।
  • पूंजीगत लागत को कम करने के लिए इस्पात उद्योग को प्रोत्साहित करने वाले वित्तीय जोखिमों, ऋण तथा सेवा इक्विटी को कम करना, ताकि उपयुक्त संरचना विकसित करने में अभिनव बने रहे।
  • बेहतर पर्यावरण प्रबंधन के लिए इस्पात मंत्रालय ने लौह और इस्पात क्षेत्र में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (INDC) प्रस्तुत किया है। यहां बीएफ-बीओएफ मार्ग से 2.2-2.4 प्रति टन कच्चे इस्पात की CO2 उत्सर्जन को कम करने और 2030 तक DRI-EAF मार्ग में 2.6 टन प्रति टन कच्चे इस्पात को घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इसके अलावा हाई-एंड रिसर्च पर ध्यान केंद्रित किया गया है,जिसके लिए स्टील रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी मिशन ऑफ इंडिया (SRTMI) की स्थापना की गई है।