प्रतिकूल कब्जे पर विधि आयोग की 280वीं रिपोर्ट
22वें विधि आयोग द्वारा 24 मई, 2023 को प्रतिकूल कब्जे से संबंधित कानून (The Law on Adverse Posession) पर अपनी 280वीं रिपोर्ट जारी की गई।
- विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ‘प्रतिकूल कब्जे से संबंधित कानून में बदलाव करने का कोई औचित्य नहीं है’।
- कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाले इस विधि आयोग का मानना है कि परिसीमन अधिनियम, 1963 के अनुच्छेद 64, 65, 111 या 112 के तहत प्रदान की गई परिसीमा अवधि को बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
- हालांकि, आयोग के दो पदेन सदस्यों ने रिपोर्ट में एक असहमति नोट ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 ‘विकसित भारत स्ट्रैटेजी रूम’ का उद्घाटन
- 2 देश में रक्षा विनिर्माण के अवसरों पर सम्मेलन
- 3 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के विचारार्थ विषयों को स्वीकृति
- 4 राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की समीक्षा बैठक
- 5 असम सरकार लगाएगी बहुविवाह (Polygamy) पर प्रतिबंध
- 6 धर्म की स्वतंत्रता और निजता का अधिकार परस्पर अंतर्संबंधित
- 7 7 वर्ष के अनुभव वाले न्यायिक अधिकारी जिला न्यायाधीश पद हेतु पात्र
- 8 सिद्दी जनजातीय समुदाय
- 9 पुनर्वास शिक्षा में परिवर्तन हेतु सुधारों की घोषणा
- 10 बोडो समुदाय का बाथौ धर्म

