परमाणु ऊष्मा-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन
हाल ही में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के सचिव द्वारा तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित 'इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र' (IGCAR) में विश्व के पहले 'परमाणु प्रक्रिया ऊष्मा-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र' का उद्घाटन किया गया है। यह 'स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण' की दिशा में भारत का एक ऐतिहासिक और स्वदेशी कदम है।
मुख्य तथ्य
- तकनीकी आधार (Cu-Cl Cycle): यह अत्याधुनिक संयंत्र 'कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) थर्मोकेमिकल चक्र' पर आधारित है। इस जटिल रासायनिक प्रक्रिया को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई और IGCAR द्वारा संयुक्त रूप से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है।
- ऊर्जा का स्रोत (परमाणु ऊष्मा): पारंपरिक 'इलेक्ट्रोलिसिस' (जहाँ पानी को तोड़ने ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 रचनात्मक पूर्वन्याय: विवादों के अंतिम समाधान का सिद्धांत
- 2 जून 2026 के घटनाक्रम पर आधारित
- 3 क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण
- 4 भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष
- 5 सेलुलर कृषि और संवर्धित मांस
- 6 भारत का बढ़ता रोग बोझ
- 7 जलवायु परिवर्तन और चुनाव
- 8 मरुस्थलीकरण और सूखे पर G7 घोषणा
- 9 अपशिष्ट जल प्रदूषण से समुद्री संरक्षित क्षेत्रों को खतरा
- 10 UAE का OPEC से बाहर निकलना

