भारत में आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ: उभरता पारिस्थितिक संकट

नेचर पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक नए अध्ययन में पाया गया है कि आक्रामक विदेशी पौधों (Invasive Alien Plants) का विस्तार भारत के प्राकृतिक क्षेत्रों में प्रतिवर्ष लगभग 15,500 वर्ग किलोमीटर की दर से हो रहा है।

  • अध्ययन के अनुसार वर्ष 2022 तक लगभग 144 मिलियन लोग, 2.79 मिलियन पशुधन, 2 लाख वर्ग किलोमीटर लघु कृषि क्षेत्र और लगभग 1.05 लाख वर्ग किलोमीटर बाघ आवास इन पौधों से प्रभावित हो चुके हैं।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष

  • आक्रामक प्रजातियाँ अब भारत के लगभग दो-तिहाई प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों पर हावी हो चुकी हैं।
  • भारत में फैलने वाली प्रमुख आक्रामक प्रजातियाँ: लैंटाना कैमारा, ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री

करेंट अफेयर्स के चर्चित मुद्दे