भारत की वैश्विक रणनीतिक साझेदारियां
भारत की विदेश नीति एक ऐसे रणनीतिक रूपांतरण के दौर से गुजर रही है, जो बदलती वैश्विक व्यवस्था की माँगों को पूरा कर सके। यह नीति रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के मूलमंत्र पर आधारित है, जिसके सहारे भारत विभिन्न क्षेत्रों और देशों के साथ सक्रिय साझेदारियाँ विकसित कर रहा है। बहुपक्षीय मंचों और द्विपक्षीय संबंधों के माध्यम से, यह न केवल राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है, बल्कि एक समावेशी और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा, क्षेत्रीय अस्थिरता और आर्थिक बदलावों के मध्य तेज़ी से बदलते वैश्विक ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 2 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 3 एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली लेज़र बीम
- 4 भारत–यूएई संबंध : ऊर्जा सुरक्षा से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक
- 5 भारत में जैव-ऊर्जा की संभावनाएं हरित ऊर्जा संक्रमण का आधार - आलोक सिंह
- 6 पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह
- 7 भारत में गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ : एक निवारक और सुदृढ़ स्वास्थ्य पारितंत्र की आवश्यकता - आलोक सिंह
- 8 भारत का सामरिक व्यापार नियंत्रण ढांचा राष्ट्रीय सुरक्षा और उच्च-प्रौद्योगिकी व्यापार के मध्य संतुलन - नूपुर जोशी
- 9 भू-आर्थिक टकराव के दौर में भारत चुनौतियां, प्रत्यास्थता एवं रणनीतिक प्रत्युत्तर - आलोक सिंह
- 10 नाभिकीय ऊर्जा: भारत के विकास-पथ की रणनीतिक कुंजी

