मध्य अवधि दृष्टिः विनियमन में कमी से विकास को गति
- भारतीय अर्थव्यवस्था बदलाव के मध्य में है, जो अभूतपूर्व आर्थिक चुनौती और अवसर को प्रतिबिंबित करता है।
- वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विज़न को प्राप्त करने के लिए भारत को अगले एक दशक या दो दशकों तक औसतन स्थिर मूल्य पर लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने की जरूरत है।
- भारत घरेलू विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रणालीगत विनियमन में कमी पर ध्यान केन्द्रित करेगा तथा लोगों और संगठनों को वैध आर्थिक गतिविधि को आसानी से संचालित करने के लिए सशक्त बनाएगा।
- भारत की मध्य अवधि विकास संभावनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए प्रणालीगत विनियमन में कमी तथा व्यक्तिगत ....
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- 1 भारत में एआई व्यवस्था/ पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
- 2 पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
- 3 संतुलित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
- 4 राजकोषीय उन्नति
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- 7 रोजगार एवं श्रम बाजार
- 8 विकास के क्षेत्रीय कारक
- 9 अर्थव्यवस्था की स्थिति
- 10 एआई के युग में श्रम की स्थिति
- 1 अर्थव्यवस्था की स्थिति
- 2 मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र
- 3 बाह्य क्षेत्र : एफडीआई में सुधार
- 4 मूल्य और मुद्रा स्फीति
- 5 निवेश और अवसंरचना
- 6 उद्योग एवं व्यापार सुधार
- 7 सेवा क्षेत्र
- 8 कृषि और खाद्य प्रबंधन
- 9 जलवायु और पर्यावरण: अनुकूलन की अनिवार्यता
- 10 सामाजिक क्षेत्र
- 11 रोजगार और कौशल विकास
- 12 एआई के युग में श्रम की स्थिति

