जलवायु और पर्यावरण: अनुकूलन की अनिवार्यता
- वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त करने की भारत की महत्वाकांक्षा मूल रूप से समावेशी और सतत विकास के दृष्टिकोण में निहित है।
- भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 2,13,701 मेगावाट की संस्थापित बिजली उत्पादन क्षमता सफलतापूर्वक स्थापित की है, जो वर्ष 2030 तक 50 प्रतिशत तक पहुंचने के एनडीसी के अद्यतित लक्ष्य की तुलना में 30 नवम्बर, 2024 तक कुल क्षमता का 46.8 प्रतिशत है।
- भारतीय वन संरक्षण 2024 के अनुसार वर्ष 2005 और वर्ष 2023 के बीच 2.29 बिलियन टन CO2 के समतुल्य का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाया गया है।
- भारत के नेतृत्व वाले वैश्विक अभियान, लाइफस्टाइल फॉर ....
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संबंधित सामग्री
- 1 भारत में एआई व्यवस्था/ पारिस्थितिकी तंत्र का विकास
- 2 पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
- 3 संतुलित वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण
- 4 राजकोषीय उन्नति
- 5 औद्योगिक उत्पादन
- 6 व्यापार प्रदर्शन: निर्यात में विविधता और सेवाओं में मजबूती
- 7 रोजगार एवं श्रम बाजार
- 8 विकास के क्षेत्रीय कारक
- 9 अर्थव्यवस्था की स्थिति
- 10 एआई के युग में श्रम की स्थिति
- 1 अर्थव्यवस्था की स्थिति
- 2 मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र
- 3 बाह्य क्षेत्र : एफडीआई में सुधार
- 4 मूल्य और मुद्रा स्फीति
- 5 मध्य अवधि दृष्टिः विनियमन में कमी से विकास को गति
- 6 निवेश और अवसंरचना
- 7 उद्योग एवं व्यापार सुधार
- 8 सेवा क्षेत्र
- 9 कृषि और खाद्य प्रबंधन
- 10 सामाजिक क्षेत्र
- 11 रोजगार और कौशल विकास
- 12 एआई के युग में श्रम की स्थिति

