भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता : वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु आवश्यक
हाल ही में, भारत ने मिशन ‘दिव्यास्त्र’ के तहत ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंट टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल’ (MIRV) टेक्नोलॉजी के साथ देश में विकसित ‘अग्नि-5’ मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इसे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
- नाभिकीयप्रतिरोध (Nuclear Deterrence) परमाणु हथियार रखने वाले देशों द्वारा विरोधियों को परमाणु हमला शुरू करने से रोकने के लिए अपनाई जाने वाली एक रणनीति है, ताकि दुश्मन देश को यह विश्वास दिलाया जा सके कि इस तरह के हमले की लागत और परिणाम किसी भी संभावित लाभ से अधिक होंगे।
- विश्वसनीय परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का विकास करना भारत की ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 स्वास्थ्य देखभाल सेवा में लार्ज लैंग्वेज मॉडल: उपयोगिता, चुनौतियाँ और नैतिक विमर्श
- 2 भारत-रूस: रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष
- 3 भारत–EFTA व्यापार समझौता: निवेश, रोजगार और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए आयाम
- 4 पर्यावरणीय शासन में संघीय संतुलन की पुनर्समीक्षा क्या राज्यों को अधिक स्वायत्तता दी जानी चाहिए?
- 5 गुटनिरपेक्ष आंदोलन और बहुध्रुवीयता की खोज सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से प्रभुत्व का प्रतिरोध
- 6 क्या भारत जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बन सकता है?
- 7 आरटीआई अधिनियम के 20 वर्ष: पारदर्शिता की एक ऐतिहासिक यात्रा एवं चुनौतियां
- 8 भारत–यूनाइटेड किंगडम: द्विपक्षीय साझेदारी का नया अध्याय
- 9 भारत में भीड़ प्रबंधन का संकट: त्रासदियों से सीख एवं भावी कार्यनीति
- 10 चीन का दुर्लभ भू-धातु निर्यात प्रतिबंध: वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर बढ़ता नियंत्रण

