पोर्नोग्राफिक सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
23 सितंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में कहा कि बच्चों से संबंधित पोर्नोग्राफिक कृत्यों को निजी तौर पर देखना, डाउनलोड करना, संगृहीत करना, रखना, वितरित करना या प्रदर्शित करना 'यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम' (POCSO) तथा 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम' के तहत आपराधिक दायित्व को आकर्षित करता है।
- यह फैसला मद्रास उच्च न्यायालय के जनवरी 2024 के उस आदेश को खारिज करता है, जिसमें कहा गया था कि आईटी अधिनियम की धारा 67-बी के तहत बाल पोर्नोग्राफी का "महज स्वामित्व" (mere possession) या भंडारण (storage) अपराध नहीं है।
- सर्वोच्च न्यायालय ने संसद से आग्रह किया कि वह POCSO ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 राष्ट्रमंडल देशों के लोक सभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन
- 2 जलज आजीविका केंद्र
- 3 विस्फोटक उपकरण डेटा प्रबंधन प्रणाली का उद्घाटन
- 4 भारतीय थल सेना और IISc के बीच समझौता (MoU)
- 5 लंबाडी समुदाय
- 6 UIDAI ने जारी किया आधार शुभंकर: उदय
- 7 86वां अखिल भारतीय अधिष्ठान अधिकारियों का सम्मेलन
- 8 राष्ट्रीय बांध सुरक्षा समिति (NCDS)
- 9 भारत के लोकपाल का स्थापना दिवस
- 10 “वूमनिया” पहल के 7 वर्ष
- 1 नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की शासी परिषद की प्रथम बैठक
- 2 निष्क्रिय इच्छामृत्यु के लिए मसौदा दिशानिर्देश
- 3 कर्नाटक में सीबीआई की 'सामान्य सहमति' समाप्त
- 4 जिला न्यायपालिका का राष्ट्रीय सम्मेलन
- 5 बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा 'संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2023' रद्द किया गया
- 6 केंद्र सरकार एवं उग्रवादी समूहों के मध्य शांति समझौता
- 7 प्रथम संयुक्त कमांडर सम्मेलन
- 8 भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के तहत नई पहलों का शुभारंभ

