बांग्लादेश में राजनीतिक संकट तथा भारत: द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा
5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और देश छोड़ दिया। इसके पश्चात 8 अगस्त, 2024 को नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली। बांग्लादेश में सत्ता-पलट की स्थिति से दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है। इससे, न केवल स्थिर पड़ोस बल्कि भारत बांग्लादेश के बेहतर संबंधों को लेकर भी चिताओं में वृद्धि हुई है। वर्तमान घटनाक्रम के संदर्भ में, भारत-बांग्लादेश के संबंधों पर पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों तथा भविष्य की स्थितियों का मूल्यांकन आवश्यक है।
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 बच्चों के लिए डिजिटल सुरक्षा: अधिकार, जोखिम और नियामकीय अंतराल
- 2 ऊर्जा सुरक्षा: भारत का नया रणनीतिक दृष्टिकोण
- 3 भारत की जैव-अर्थव्यवस्था: नवाचार, अवसर और नीतिगत चुनौतियाँ
- 4 शहरी भारत की पुनर्कल्पना: एकीकृत, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख बुनियादी ढांचे की ओर
- 5 लोचशील आपूर्ति शृंखलाएँ: भारत की आर्थिक सुरक्षा का एक सुदृढ़ स्तंभ
- 6 भारत में सुदृढ़ नवाचार पारितंत्र का निर्माण: क्षमताएँ और संरचनात्मक बाधाएँ
- 7 प्रतीकात्मकता से परिवर्तन की ओर: भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी
- 8 भारत में गिग कर्मियों के अधिकार: मान्यता बनाम वास्तविकता
- 9 भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु: नैतिक मुद्दे एवं चुनौतियाँ
- 10 संप्रभु ऊर्जा आत्मनिर्भरता: भारत की रणनीतिक आवश्यकता

