अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर बहस
सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में दायर नई याचिकाओं ने एक बार फिर “क्रीमी लेयर” सिद्धांत को अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण पर लागू करने की बहस को तेज कर दिया है। इन याचिकाओं का आधार 2024 के State of Punjab v. Davinder Singh फैसले को बनाया गया है। इससे यह महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उभरकर सामने आया है कि क्या आर्थिक स्थिति, जाति-आधारित सामाजिक भेदभाव का स्थान ले सकती है?
क्रीमी लेयर क्या है?
- क्रीमी लेयर से आशय पिछड़े वर्गों के उन अपेक्षाकृत समृद्ध और सामाजिक रूप से उन्नत वर्गों से है, जिन्हें आरक्षण का पर्याप्त लाभ ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 EV क्रांति और ऊर्जा अवसंरचना की चुनौती
- 2 कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म और भारत के समक्ष चुनौतियाँ
- 3 बढ़ती गर्म रातें : भारत में उभरता नया हीट संकट
- 4 SIR प्रक्रिया से नागरिकता तक: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उभरे नए प्रश्न
- 5 समुद्री चोक पॉइंट्स: व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति के निर्णायक द्वार
- 6 ऑनलाइन गेमिंग नियम, 2026: उभरते डिजिटल क्षेत्र का समग्र नियामक ढांचा
- 7 दल-बदल विरोधी कानून: प्रासंगिकता, खामियां और सुधार की आवश्यकता
- 8 औद्योगिक आपदाएं: कारण, लागत और समाधान
- 9 एआई के उद्भव का प्रभाव: असीम संभावनाओं की राह और जोखिमपूर्ण चुनौतियां
- 10 जल-कुशल फसल नवाचार द्वारा भूजल दबाव का न्यूनीकरण

