पृथ्वी अवलोकन उपग्रह : रीसैट-2बी

रडार इमेजिंग सैटेलाइट-2बी (RISAT-2B) एक स्वदेशी रूप से विकसित एक्स-बैंड सिंथेटिक एपर्चर रडार (Synthetic Aperture Radar - SAR) इमेजिंग सैटेलाइट है। 22 मई, 2019 को लॉन्च किये गए इस उपग्रह को इसरो द्वारा विकसित किया गया है; जिसका वजन लगभग 615 किलोग्राम है। इसे लॉन्च करने के लिए पीएसएलवी-सी 46 का उपयोग किया गया था। यह पीएसएलवी की 48वीं और एक कोर एलोन उड़ान (स्ट्रैप-ऑन बूस्टर के बिना) थी।

पृष्ठभूमि

पिछले एक दशक में इसरो ने रीसैटशृंखला में दो उपग्रहों को लॉन्च किया है। पहला उपग्रह इजरायल निर्मित रीसैट-2 2009 में और दूसरा रीसैट-1 2012 में लॉन्च किया गया, जिसमें से रीसैट-1 अब परिचालन में नहीं है। इसरो उपग्रहों का समूह (constellation) बनाने के लिए 2019 में इस तरह के 4-5 और उपग्रहों को लॉन्च करेगा, जिससे देश की क्षमता में वृद्धि होगी।

रीसैट-2बी का महत्त्व

  • हाई रिजॉल्यूशनः ये अत्यधिक कुशल उपग्रह हैं, जो विभिन्न मोड में संचालित होने में सक्षम हैं। इसमें 1 मीटर × 0.5 मीटर तथा0.5 मीटर × 0.3 मीटर रिजॉल्यूशन के बहुत उच्च रिजॉल्यूशन रडार इमेजिंग मोड शामिल हैं।
  • झुकी हुई कक्षाः इसकी कक्षा भूमध्य रेखा से 37 डिग्री झुकी हुई है। यह वैश्विक निगरानी में सक्षम नहीं है, लेकिन उपग्रह की निगाहें भारत और पाकिस्तान पर टिकी होंगी।
  • बारहमासी संचालनः रीसैट-2बी एक रडार इमेजिंग उपग्रह है। यह दिन-रात और सभी मौसमों में प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकता है। इसके द्वारा बारिश, धूल, बादल या अंधेरे की स्थिति में और सभी मौसमों के दौरान छवियों (imageries) को एकत्र किया जा सकता है। इस प्रकार यह दूरस्थ संवेदी उपग्रहों (remote sensing satellites) की तुलना में निरंतर और विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराता है।

रीसैट-2बी का अनुप्रयोग

  • स्पॉट इमेजिंगः सैटेलाइट का उपयोग रुचि के स्थलों के उच्च रिजॉल्यूशन स्पॉट इमेजिंग के लिए किया जाएगा।
  • नीति और योजनाः डेटा संचालित नीति और योजना निर्माण के लिए रीसैट-2बी से प्राप्त डेटा का उपयोग किया जाएगा।
  • रिमोट सेंसिंगः एक्स-बैंड एसएआर इमेजरी (X-Band SAR imagery) के अनुप्रयोगों में जल विज्ञान (Hydrology), फसल, वानिकी, भूविज्ञान और क्रायोस्फीयर (Cryosphere) शामिल हैं।
  • आपदा प्रबंधन सहायताः आपदा प्रबंधन में सहायता के लिए इसकी हाई रिजॉल्यूशन इमेजिंग क्षमताओं का उपयोग दिन-रात एवं सभी मौसमों के दौरान किया जा सकता है।
  • निगरानी और सुरक्षाः सीमा प्रबंधन और घुसपैठ विरोधी अभियान के लिए इसकी इमेजिंग क्षमताओं का उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, यह पाक अधिकृत कश्मीर क्षेत्र में आतंकवादी शिविरों के दृश्य प्रदान करने में सक्षम होगा।