अमिट मतदाता इंक : विकास की कहानी
- किसी व्यक्ति को एक से ज़्यादा वोट डालने से रोकने के लिए एक विधि के रूप में तैयार की गई अमिट इंक का उपयोग भारत में दशकों से किया जा रहा है।
- 1971 तक, इंक नाखून पर नहीं बल्कि उंगली पर लगाई जाती थी। सर्वप्रथम, 1971 में चुनाव आयोग ने नाखून की जड़ पर इंक लगाने का निर्णय लिया, जिससे एक बार सूखने के बाद यह नाखून के बढ़ने पर ही गायब हो सके।
- भारत में पहली बार 1950 में ‘राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास निगम’ (NRDC) द्वारा इस इंक के लिए पेटेंट दायर किया गया था।
- पहली इंक ‘वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ ....
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