भारत-श्रीलंका
भारत-श्रीलंका संबंध भौगोलिक निकटता, सांस्कृतिक साम्यता और ऐतिहासिक रिश्तों पर आधारित हैं। भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति ने इस संबंध को कूटनीति, व्यापार, संपर्क, सुरक्षा, ऊर्जा और जनसामान्य के बीच विनिमय जैसे विविध क्षेत्रें में बहुआयामी साझेदारी में परिवर्तित किया है, जो क्षेत्रीय रणनीतिक परिप्रेक्ष्य को भी ध्यान में रखते हुए विकसित हो रही है।
हालिया विकास
- ऑपरेशन सिंधु (जून 2025): भारत ने ईरान से श्रीलंकाई नागरिकों की सुरक्षित निकासी में सहायता प्रदान की, जो मानवीय मूल्यों और क्षेत्रीय एकजुटता का प्रतीक है।
- मछुआरों की गिरफ्रतारी एवं समुद्री तनाव (जून 2025): श्रीलंकाई नौसेना द्वारा भारतीय मछुआरों की गिरफ्रतारी के बाद समुद्री ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 वैश्विक प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 2025
- 2 वैश्विक मृदा सम्मेलन 2024
- 3 12वां क्षेत्रीय 3R और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम
- 4 आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर एशिया-प्रशांत मंत्रिस्तरीय सम्मेलन
- 5 तीसरा वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन
- 6 वर्ल्ड फ्यूचर एनर्जी समिट 2024
- 7 यूएनसीसीडी: 16वां कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (CoP16)
- 8 यूएनसीबीडी: 16वां कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (CoP16)
- 9 11वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक
- 10 विश्व धरोहर समिति का 46वां सत्र

