“अनुसूचित जनजाति (ST) की संवैधानिक पहचान का आधार धर्म नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विशिष्टताएँ हैं।” हालिया डीलिस्टिंग विवाद के संदर्भ में इस कथन की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। (250 शब्द)

उत्तर: हाल के वर्षों में ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाने वाले आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) सूची से हटाने (Delisting) की मांग ने व्यापक संवैधानिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। मूल प्रश्न यह है कि क्या ST की पहचान धर्म परिवर्तन से समाप्त हो जाती है या वह ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं पर आधारित रहती है।

ST की संवैधानिक पहचान का आधार

  • अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचना राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाती है तथा इसमें धर्म का कोई उल्लेख नहीं है।
  • ST की पहचान मुख्यतः जनजातीय मूल, विशिष्ट संस्कृति, पारंपरिक जीवन शैली, भौगोलिक ....
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