बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत के लिए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।” रूस–चीन समीकरण के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

उत्तर: रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) से आशय भारत की उस क्षमता से है, जिसके तहत वह किसी शक्ति गुट के औपचारिक प्रभाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र विदेश नीति संचालित कर सके। वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में रूस–चीन संबंधों की बढ़ती निकटता ने भारत की संतुलनकारी कूटनीति को अधिक जटिल बना दिया है।

रूसचीन समीकरण और भारत के समक्ष चुनौतियाँ

  1. बढ़ता रणनीतिक अभिसरण: रूस और चीन ने ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी तथा भू-राजनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। दोनों देशों की “नो-लिमिट्स पार्टनरशिप” पश्चिमी वर्चस्व के विरुद्ध साझा रणनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिससे भारत की कूटनीतिक लचीलापन ....
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