भारत में विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाले आंतरिक एवं बाह्य कारकों का विश्लेषण करते हुए दीर्घकालिक निवेश आकर्षण बढ़ाने के उपाय सुझाइए।
उत्तर: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) एवं विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए पूंजी, प्रौद्योगिकी, रोजगार तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। भारत विश्व की तीव्र गति से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, किंतु हाल के वर्षों में वैश्विक अनिश्चितताओं तथा पूंजी पुनर्प्रत्यावर्तन के कारण विदेशी निवेश प्रवाह पर दबाव देखा गया है।
विदेशी निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाले कारक
1. आंतरिक कारक
(i) नीतिगत एवं नियामकीय स्थिरता
- स्थिर कर व्यवस्था, उदारीकृत FDI नीति तथा ‘Ease of Doing Business’ निवेश आकर्षित करते हैं।
- वहीं नीतिगत अनिश्चितता, जटिल नियम तथा अनुपालन लागत निवेशकों का ....
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