धर्मनिरपेक्षता

धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा और अर्थ

पहलू

विवरण

मूल अवधारणा

यह एक गत्यात्मक विचारधारा है जो धर्म और राज्य के मामलों को एक-दूसरे से पृथक या तटस्थ रखने पर जोर देती है।

राज्य की भूमिका

राज्य किसी विशेष धर्म को संरक्षण प्रदान नहीं करता और सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहता है।

व्यक्तिगत स्वतंत्रता

धर्म व्यक्ति का निजी मामला है। व्यक्ति को अपने धार्मिक विश्वासों को मानने या न मानने (नास्तिक होने) की पूर्ण आज़ादी है।

हस्तक्षेप की सीमा

राज्य धर्म में तब तक हस्तक्षेप नहीं करता जब तक कि विभिन्न धर्मों या समुदायों के बीच टकराव की स्थिति न बने।

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