वैश्वीकरण

वैश्वीकरण: भारत और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

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विवरण

परिचय / अवधारणा

वैश्वीकरण देशों, अर्थव्यवस्थाओं और समाजों के बीच बढ़ती अंतरनिर्भरता एवं एकीकरण की प्रक्रिया है। इसमें सीमाओं के पार वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, सूचना और विचारों का आदानप्रदान शामिल है। थॉमस फ्रीडमैन के अनुसार, यह बाजारों, राष्ट्रराज्यों और प्रौद्योगिकियों का अटूट एकीकरण है।

पृष्ठभूमि / वर्तमान संदर्भ

1991 के आर्थिक सुधारों (LPG) ने भारत में वैश्वीकरण की नई शुरुआत की। सोवियत संघ के विघटन और वैश्विक व्यापार उदारीकरण ने इसे गति दी। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 1947 में 2% से बढ़कर 2025 में 8.21% हो गई।

प्रमुख विशेषताएँ ....

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