लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका

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विवरण

परिचय / अवधारणा

लोकतंत्र में सिविल सेवाएँ सरकार की नीति-निर्माण, कार्यान्वयन एवं सेवा वितरण की रीढ़ हैं। ये चुने हुए प्रतिनिधियों को उनके ज्ञान, अनुभव एवं सार्वजनिक मामलों की समझ से सहायता करती हैं। लॉर्ड कर्जन ने इसे "भारतीय प्रशासन का स्टील फ्रेम" कहा।

पृष्ठभूमि / वर्तमान संदर्भ

भारतीय सिविल सेवा वर्तमान ढाँचे की शुरुआत लॉर्ड कार्नवालिस ने की। स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं को बनाए रखने पर बल दिया। वर्तमान में सिविल सेवाएँ विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

प्रमुख भूमिकाएँ

- नीति कार्यान्वयन: राजनीतिक कार्यपालिका ....

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