समकालीन चुनौतियाँ

भ्रष्टाचार व पारदर्शिता

उपशीर्षक

विवरण

परिचय / अवधारणा

भ्रष्टाचार सार्वजनिक पद का निजी लाभ हेतु दुरुपयोग है, जो सुशासन, आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय को कमजोर करता है। पारदर्शिता शासन का वह सिद्धांत है, जिसमें सरकारी निर्णय, नीतियाँ एवं कार्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होते हैं।

पृष्ठभूमि / वर्तमान संदर्भ

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के CPI 2024 में भारत 180 देशों में 96वें स्थान पर (स्कोर 38/100) है, जो गंभीर भ्रष्टाचार की स्थिति दर्शाता है। 2023 में CVC ने 1,178 भ्रष्टाचार मामलों की जाँच की।

प्रमुख कारण

- कमजोर कानूनी ढाँचा एवं धीमी न्यायिक प्रक्रिया।
- प्रशासनिक लालफीताशाही एवं विवेकाधीन शक्तियाँ।
....

क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |

पूर्व सदस्य? लॉग इन करें


वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |

संबंधित सामग्री