रुपये का मूल्यह्रास: कारण एवं प्रभाव

3 दिसंबर, 2025 को भारतीय रुपया पहली बार प्रति अमेरिकी डॉलर 90 के मनोवैज्ञानिक रूप से महत्त्वपूर्ण स्तर से नीचे चला गया।

  • इस घटना से वित्तीय बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ी और व्यापक समष्टि-आर्थिक परिदृश्य (Macroeconomic Landscape) को लेकर चिंताएँ और गहरी हुईं।

रुपये के हालिया मूल्यह्रास (Rupee Depreciation) के तात्कालिक कारण

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में प्रगति का अभाव: व्यापार समझौते में प्रगति न होने से व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ी, डॉलर की माँग तेज़ हुई और रुपये पर दबाव पड़ा।
  • अमेरिका के साथ व्यापार तनाव: US द्वारा भारतीय आयात पर 50% शुल्क वृद्धि और H1B वीज़ा फ़ीस में बढ़ोतरी से डॉलर की माँग ....
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