भारत में प्रतिपूरक वनरोपण महत्व, चुनौतियाँ एवं पहलें
हाल ही में, पूर्व सिविल सेवकों के एक समूह द्वारा सरकार को प्रतिपूरक वनरोपण (Compensatory Afforestation) और ग्रीन क्रेडिट के संबंध में लिखे गए एक ओपन लेटर में ग्रीन क्रेडिट के विविध प्रावधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। ग्रीन क्रेडिट का उपयोग वन भूमि पर प्रतिपूरक वनरोपण के लिए किया जा सकता है।
- प्रतिपूरक वनरोपण के अंतर्गत गैर-वन उपयोगों, जैसे औद्योगिक या अवसंरचनात्मक परियोजनाओं आदि, के लिए वन भूमि विपथन के बदले पेड़ लगाना होता है।
- भारत में प्रतिपूरक वनरोपण निधि अधिनियम 2016 (Compensatory Afforestation Fund Act 2016) के माध्यम से प्रतिपूरक वनरोपण को कानूनी आवश्यकता बना दिया गया ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 समुद्री चोक पॉइंट्स: व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति के निर्णायक द्वार
- 2 ऑनलाइन गेमिंग नियम, 2026: उभरते डिजिटल क्षेत्र का समग्र नियामक ढांचा
- 3 दल-बदल विरोधी कानून: प्रासंगिकता, खामियां और सुधार की आवश्यकता
- 4 औद्योगिक आपदाएं: कारण, लागत और समाधान
- 5 एआई के उद्भव का प्रभाव: असीम संभावनाओं की राह और जोखिमपूर्ण चुनौतियां
- 6 जल-कुशल फसल नवाचार द्वारा भूजल दबाव का न्यूनीकरण
- 7 जलवायु परिवर्तनशीलता और निर्धनता का अंतर्संबंध: भारत में उभरती बहुआयामी चुनौती
- 8 भारत में खाद्य अपव्यय का विरोधाभास: भूख से जूझते भारत में संसाधनों की विडंबना
- 9 भारत में लुप्त होती झीलें: सामाजिक-पारिस्थितिक स्थिरता के लिए एक खतरा
- 10 बाह्य अंतरिक्ष शासन: वैश्विक शक्ति-संतुलन का उभरता क्षेत्र

