आयुर्वेदिक पांडुलिपियों का पुनरुद्धार
हाल ही में केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) ने दो अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक पांडुलिपियों, ‘द्रव्यरत्नाकर निघण्टु’ एवं ‘द्रव्यमनामाकर निघण्टु’ का पुनरुद्धार किया है।
- आयुर्वेद में निघण्टु शब्द का प्रयोग औषधियों के समूह, समानार्थी शब्दों, गुण एवं उनके उपयोग किए जाने वाले भाग के विवरण के लिए किया जाता है।
- इन ग्रंथों का लोकार्पण मुंबई स्थित आरआरएपी केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित एक समारोह में किया गया।
- इन पांडुलिपियों का संपादन, अनुवाद और आलोचनात्मक विवेचन मुंबई के विख्यात आयुर्वेदाचार्य व पांडुलिपि-विशेषज्ञ डॉ. सदानंद डी. कामत द्वारा किया गया।
पांडुलिपियों का परिचय
- द्रव्यरत्नाकर निघण्टु
- रचना: इसकी रचना 1480 ई. में मुद्गल पंडित ....
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