आत्म-जागरूकता के बिना, ज्ञान केवल एक उपकरण है; इसके साथ, यह ज्ञानोदय है।

मानव सभ्यता का इतिहास मूलतः अज्ञात को जानने की एक अनवरत यात्रा है। इस यात्रा में मनुष्य ने प्रकृति के रहस्यों को सुलझाया, ब्रह्मांड की गहराइयों को नापा और अणु के भीतर छिपी असीम ऊर्जा को भी खोज निकाला। यह सब 'ज्ञान' के कारण संभव हुआ। लेकिन, क्या मात्र सूचनाओं और तथ्यों का संग्रह ही मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य है? प्रसिद्ध आंग्ल कवि टी.एस. इलियट ने आधुनिक मनुष्य की विडंबना को व्यक्त करते हुए लिखा था "वह प्रज्ञा कहाँ है जिसे हमने ज्ञान में खो दिया है? और वह ज्ञान कहाँ है जिसे हमने सूचनाओं में खो दिया है?"

ज्ञान, ....

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