क्या हम सभ्यता के पतन की राह पर हैं?
इतिहासकार अर्नोल्ड टॉयनबी का कथन है कि 'महान सभ्यताएं नष्ट नहीं की जाती हैं, बल्कि वे स्वयं नष्ट हो जाती हैं'। इन्होंने अपनी 12 खंडों में लिखी गई महान कलाकृति 'ए स्टडी ऑफ हिस्ट्री' में 28 विभिन्न सभ्यताओं के उत्थान एवं पतन की खोज की है। अपने निष्कर्षों में टॉयनबी ने सभ्यताओं के पतन के अनेक कारण वर्णित किए हैं। इन सभ्यताओं के अध्ययन तथा वर्तमान संदर्भ में इनकी तुलना करके हम उन चिंताओं का पता लगा सकते हैं जिनके आधार पर वर्तमान सभ्यता के पतन की बात की जा रही है। सभ्यताओं के पतन को जनसंख्या में ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सामाजिक समानता की गारंटी नहीं देता।
- 2 स्वतंत्रता तब तक निरर्थक है जब तक उसमें गलतियाँ करने की स्वतंत्रता शामिल न हो।
- 3 हमारी शिक्षा प्रणाली रटने को पुरस्कृत करती है, जबकि भविष्य को नवाचार की आवश्यकता है।
- 4 चरित्र का निर्माण संकट में नहीं होता, वह केवल उसमें प्रदर्शित होता है।
- 5 डिजिटल युग में निजता: एक मौलिक अधिकार या एक बिकने वाली वस्तु?
- 6 न्यायपूर्ण समाज वह है जहाँ विशेषाधिकार कर्तव्य द्वारा संतुलित होता है
- 7 लोकतंत्र की उत्तरजीविता एक सूचित और निष्पक्ष नागरिक समाज पर निर्भर करती है।
- 8 आत्म-जागरूकता के बिना, ज्ञान केवल एक उपकरण है; इसके साथ, यह ज्ञानोदय है।
- 9 केवल इसलिए कि आपके पास विकल्प है इसका अर्थ यह कदापि नही की उनमे से कोई एक ठीक होगा ही - डॉ. श्याम सुंदर पाठक
- 10 जीवन, स्वयं को अर्थपूर्ण बनाने का अवसर है

