स्वतंत्रता तब तक निरर्थक है जब तक उसमें गलतियाँ करने की स्वतंत्रता शामिल न हो।

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स्वतंत्रता मानव जीवन का सबसे आदिम और सबसे मुखर स्वप्न है। लेकिन, स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या स्वतंत्रता का अर्थ एक ऐसी दोषरहित और पूर्णतः सुरक्षित व्यवस्था है जहाँ कोई भी कदम गलत न पड़े? यदि किसी पक्षी को एक ऐसे सोने के पिंजरे में रखा जाए जहाँ उसे समय पर उत्तम भोजन मिले, आंधी-तूफान से पूरी सुरक्षा हो और किसी शिकारी का कोई भय न हो, तो क्या वह पक्षी स्वतंत्र कहलाएगा? कदापि नहीं। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ उस खुले आकाश में उड़ने में है, जहाँ हवाओं के थपेड़े हैं, रास्ता भटकने का जोखिम है, और गिरने ....

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