महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण सामाजिक समानता की गारंटी नहीं देता।

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आज के 21वीं सदी के आधुनिक समाज में, जब हम किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की महिला सीईओ, लड़ाकू विमान उड़ाती एक महिला पायलट, या अपने दम पर व्यवसाय खड़ा करने वाली एक महिला उद्यमी को देखते हैं, तो अनायास ही यह भ्रम हो जाता है कि हमने लैंगिक समानता का लक्ष्य हासिल कर लिया है। महिलाएँ आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, वे धन कमा रही हैं और अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रही हैं। लेकिन, क्या बैंक खाते में जमा धनराशि और एक अच्छी नौकरी, समाज में महिलाओं को वह 'समानता' और 'सम्मान' दिलाने की गारंटी बन पाई ....

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