भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती

ध्वनि प्रदूषण अब केवल पर्यावरण अध्ययन का एक छोटा सा हिस्सा नहीं है; यह शासन , सांस्कृतिक मनोविज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों से जुड़ा एक जटिल मुद्दा है।

जब भी भारत में पर्यावरण क्षरण की बात होती है, तो हमारी सामूहिक चिंता तुरंत दिल्ली की सर्दियों के स्मॉग, बेंगलुरु की झागदार झीलों या भूजल के घटते स्तर पर केंद्रित हो जाती है। हम वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और कार्बन उत्सर्जन पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन हम उस जानलेवा प्रदूषक को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं जो हर दिन हमें घेरता है: शोर (Noise)।

  • यातायात का शोर, राजनीतिक रैलियों की गड़गड़ाहट, ....
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