भारत में रोजगार योग्यता संकट: डिग्री और कौशल के बीच बढ़ती खाई
भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अगले एक दशक तक भारत के पास जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का सबसे बड़ा अवसर रहेगा। लेकिन विडंबना यह है कि उच्च शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार के बावजूद देश में बड़ी संख्या में स्नातक रोजगार प्राप्त करने में असफल हो रहे हैं।
- इंडिया स्किल्स रिपोर्ट, 2026 के अनुसार, भारत में स्नातकों की रोजगारयोग्यता (Employability) केवल 56.35% है, अर्थात लगभग आधे स्नातक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल नहीं रखते। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि भारत की समस्या डिग्री की कमी नहीं, बल्कि कौशल और ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 अमेरिका–ईरान इस्लामाबाद समझौता: पश्चिम एशिया में नई कूटनीतिक शुरुआत
- 2 अल नीनो : भारत के लिए एक गंभीर विकासात्मक चुनौती क्यों?
- 3 भारत का अप्रत्याशित 'बेबी बस्ट': विश्व के लिए एक जनसांख्यिकीय चेतावनी
- 4 16वाँ वित्त आयोग: कर-वितरण, उपकर और संघीय संतुलन का प्रश्न
- 5 भारत में ध्वनि प्रदूषण : पर्यावरणीय न्याय की नई चुनौती
- 6 एक्स्ट्रागैलेक्टिक जेट्स: ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली लेज़र बीम
- 7 भारत–यूएई संबंध : ऊर्जा सुरक्षा से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक
- 8 भारत में जैव-ऊर्जा की संभावनाएं हरित ऊर्जा संक्रमण का आधार - आलोक सिंह
- 9 पश्चिम एशियाई संकट : भू-राजनीतिक द्वंद्व, ऊर्जा सुरक्षा और भारत के रणनीतिक सरोकार - आलोक सिंह
- 10 भारत में गैर-संचारी रोगों का बढ़ता बोझ : एक निवारक और सुदृढ़ स्वास्थ्य पारितंत्र की आवश्यकता - आलोक सिंह

