Gen Z आंदोलन: विरोध-प्रदर्शन का अधिकार और संवैधानिक सीमाएँ
भारत में हाल के वर्षों में युवाओं, विशेषकर Gen Z (1997–2012 के बीच जन्मी पीढ़ी) की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी तेजी से बढ़ी है। सोशल मीडिया के माध्यम से संगठित होने वाली यह पीढ़ी पारंपरिक आंदोलनों से अलग शैली में अपनी बात रखती है।
हाल ही में संसद मार्च और उससे जुड़े विरोध-प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि क्या भारत में विरोध-प्रदर्शन करना कानूनी अधिकार है? यदि हाँ, तो उसकी संवैधानिक सीमाएँ क्या हैं? यह बहस केवल कानून की नहीं, बल्कि लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन की भी है। .... क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
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