पिछले दशक में भारत के विकास के संचालक
वित्तीय क्षेत्र में सुधार
- पहले दशक में ऋण में वृद्धि के कारण 2020 तक संकट बना रहा।
- पुनर्पूंजीकरण, PSB के विलय और IBC सहित सुधारों से वित्तीय क्षेत्र की स्थिति में सुधार हुआ।
- विनियामक ढांचे का सरलीकरण
- रियल एस्टेट अधिनियम सहित विनियामक ढांचे के सरलीकरण ने काले धन के प्रचलन को कम कर दिया।
कर नीति सुधार
- GST को अपनाना, कॉर्पोरेट और आयकर दरों में कमी और अन्य सुधार।
- GST से कर आधार में सुधार हुआ और अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण हुआ।
निजी क्षेत्र के साथ जुड़ाव
- विनिवेश नीति को पुनर्जीवित किया और एक नई PSE नीति पेश की। विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के ....
क्या आप और अधिक पढ़ना चाहते हैं?
तो सदस्यता ग्रहण करें
इस अंक की सभी सामग्रियों को विस्तार से पढ़ने के लिए खरीदें |
पूर्व सदस्य? लॉग इन करें
वार्षिक सदस्यता लें
सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल के वार्षिक सदस्य पत्रिका की मासिक सामग्री के साथ-साथ क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स पढ़ सकते हैं |
पाठक क्रॉनिकल पत्रिका आर्काइव्स के रूप में सिविल सर्विसेज़ क्रॉनिकल मासिक अंक के विगत 6 माह से पूर्व की सभी सामग्रियों का विषयवार अध्ययन कर सकते हैं |
संबंधित सामग्री
- 1 आर्थिक परिदृश्य
- 2 लोचशीलता निर्मित करने की दिशा में भारत की जलवायु कार्रवाई
- 3 जलवायु कार्रवाई
- 4 भारत का बाह्य क्षेत्र: अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित रूप से संचालन
- 5 कौशल विकास और उद्यमिता
- 6 पिछले दशक में रोजगार की स्थिति
- 7 महिला-नेतृत्व के माध्यम से विकासः India/100 के लिए लैंगिक लाभांश का दोहन
- 8 कल्याण के प्रति नया दृष्टिकोण
- 9 मानव संसाधान - कल्याण के साथ विकास को अनुकूलित करना
- 10 व्यापक आर्थिक स्थिरता की सुरक्षा

